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कुल्लू अस्पताल में बिना विशेषज्ञ मरीज राम भरोसे
Kullu
Updated Thu, 16 Oct 2014 05:32 AM IST
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कुल्लू। जिला अस्पताल में मरीज की जान राम भरोसे है! कारण, यहां ऑपरेशन करने से पहले मरीज को बेहोश करने वाला विशेषज्ञ ही नहीं है। इसका सीधा मतलब है कि यहां ऑपरेशन करवाना किसी खतरे से खाली नहीं है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि ऑपरेशन के लिए निजी संस्थानों से एनेस्थीसिया (मरीज को बेहोश करने वाला चिकित्सक) को हायर किया जाता है। लेकिन, सूत्रों की मानें तो आपातकाल में अस्पताल में ही तैनात चिकित्सक मरीज को बेहोश कर देते हैं। ऐसे में यहां ऑपरेशन करवाना किसी खतरे से खाली नहीं रह गया है।
उल्लेखनीय है कि किसी भी ऑपरेशन से पहले एनेस्थीसिया चिकित्सक का मुख्य रोल होता है। वह मरीज की जांच करता है। इसके बाद उसे बेहोश करने के लिए डोज दी जाती है, जिससे मरीज बेहोश होता है। लेकिन, कुल्लू अस्पताल में यह पद पिछले कई सालों से रिक्त चल रहा है। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि उन्होंने ऑपरेशन वाले दिन के लिए निजी अस्पतालों से चिकित्सकों को बुलाया जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर आपात स्थिति में किसी का ऑपरेशन करना हो तो चिकित्सक कहां से लाया जाएगा? सूत्र बताते हैं कि कई बार आपातकाल में मरीज को अस्पताल में ही तैनात चिकित्सक बेहोश कर देते हैं। ऐसे में अगर छोटी सी लापरवाही हो जाए तो मरीज को जान से हाथ भी धोना पड़ सकता है।
एसएमओ डॉ. कमल किशोर का कहना है कि ऑपरेशन के दौरान निजी क्षेत्र से चिकित्सक हायर किया जाता है।
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उल्लेखनीय है कि किसी भी ऑपरेशन से पहले एनेस्थीसिया चिकित्सक का मुख्य रोल होता है। वह मरीज की जांच करता है। इसके बाद उसे बेहोश करने के लिए डोज दी जाती है, जिससे मरीज बेहोश होता है। लेकिन, कुल्लू अस्पताल में यह पद पिछले कई सालों से रिक्त चल रहा है। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि उन्होंने ऑपरेशन वाले दिन के लिए निजी अस्पतालों से चिकित्सकों को बुलाया जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर आपात स्थिति में किसी का ऑपरेशन करना हो तो चिकित्सक कहां से लाया जाएगा? सूत्र बताते हैं कि कई बार आपातकाल में मरीज को अस्पताल में ही तैनात चिकित्सक बेहोश कर देते हैं। ऐसे में अगर छोटी सी लापरवाही हो जाए तो मरीज को जान से हाथ भी धोना पड़ सकता है।
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एसएमओ डॉ. कमल किशोर का कहना है कि ऑपरेशन के दौरान निजी क्षेत्र से चिकित्सक हायर किया जाता है।