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Kullu News: कुल्लू में 69 शैक्षणिक संस्थान आपदा के प्रति अति संवेदनशील
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आनी (कुल्लू)। कुल्लू जिले के 69 शैक्षणिक संस्थान आपदा के प्रति उच्च या अति उच्च संवेदनशीलता की श्रेणी में हैं। इनमें 2,977 विद्यार्थी पढ़ते हैं। आनी खंड का राजकीय प्राथमिक पाठशाला रोहरीधार जिले में सबसे अधिक संवेदनशील पाया गया है। यह खुलासा राजकीय महाविद्यालय आनी स्थित हरिपुर में आयोजित आपदा प्रबंधन कार्यशाला में प्रस्तुत शोध अध्ययन में हुआ।
हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला में परियोजना के प्रधान अन्वेषक एवं एमएसहिपा, शिमला में सहायक प्राध्यापक डॉ. ख्याल चंद ने अध्ययन के निष्कर्ष प्रस्तुत किए। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. दायक राम ठाकुर के दिशानिर्देश और आपदा प्रबंधन समिति के संयोजक डॉ. जितेंद्र साहनी के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यशाला में शैक्षणिक संस्थानों को आपदा जोखिम से सुरक्षित बनाने पर चर्चा हुई।
अध्ययन के तहत भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) की मदद से कुल्लू जिले के 1,228 स्कूलों का मानचित्रण किया गया, जबकि 238 शैक्षणिक संस्थानों का सर्वेक्षण किया गया। इनमें कुल 13,337 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। सर्वेक्षण में सामने आया कि 40.3 प्रतिशत संस्थान नालों, खड़ी ढलानों या जंगलों से 100 मीटर के दायरे में स्थित हैं। करीब 40 प्रतिशत संस्थान पहले ही किसी न किसी आपदा का सामना कर चुके हैं। इनमें वर्ष 2023 और 2025 की बाढ़ तथा भूस्खलन प्रमुख हैं।
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अध्ययन के अनुसार, लगभग एक-तिहाई संस्थानों के भवनों में भूकंपरोधी व्यवस्था है, जबकि केवल आधे संस्थानों में आपदा प्रबंधन के लिए प्रशिक्षित कर्मचारी उपलब्ध हैं। आनी और निरमंड क्षेत्रों में खड़ी ढलानें, कमजोर सुरक्षा दीवारें और अग्निशमन सेवाओं की अधिक दूरी जोखिम बढ़ाने वाले प्रमुख कारण पाए गए। इसके अलावा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और बीपीएल परिवारों के विद्यार्थियों की अधिक संख्या को भी जोखिम आकलन में शामिल किया गया।
इनसेट
छह महीने में तैयारी मजबूत करने की सिफारिश
शोध में शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा के लिए छह महीने के भीतर कर्मचारियों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण देने, प्रभावी आपदा प्रबंधन योजनाएं तैयार करने और प्राथमिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करवाने की सिफारिश की गई। इसके साथ ही ढलानों का संरक्षण, सुरक्षा दीवारों को मजबूत करने और भवनों का भूकंपरोधी सुदृढ़ीकरण करने पर जोर दिया गया।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. दायक राम ठाकुर ने शोध निष्कर्षों को शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि नियमित प्रशिक्षण, प्रभावी आपदा प्रबंधन योजनाओं और जन-जागरूकता से आपदाओं के जोखिम को कम किया जा सकता है। उन्होंने कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए आपदा प्रबंधन समिति के प्रयासों की सराहना की। कार्यशाला में शिक्षक, गैर-शिक्षक कर्मचारी, विद्यार्थी और स्थानीय लोग उपस्थित रहे।
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हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला में परियोजना के प्रधान अन्वेषक एवं एमएसहिपा, शिमला में सहायक प्राध्यापक डॉ. ख्याल चंद ने अध्ययन के निष्कर्ष प्रस्तुत किए। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. दायक राम ठाकुर के दिशानिर्देश और आपदा प्रबंधन समिति के संयोजक डॉ. जितेंद्र साहनी के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यशाला में शैक्षणिक संस्थानों को आपदा जोखिम से सुरक्षित बनाने पर चर्चा हुई।
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अध्ययन के तहत भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) की मदद से कुल्लू जिले के 1,228 स्कूलों का मानचित्रण किया गया, जबकि 238 शैक्षणिक संस्थानों का सर्वेक्षण किया गया। इनमें कुल 13,337 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। सर्वेक्षण में सामने आया कि 40.3 प्रतिशत संस्थान नालों, खड़ी ढलानों या जंगलों से 100 मीटर के दायरे में स्थित हैं। करीब 40 प्रतिशत संस्थान पहले ही किसी न किसी आपदा का सामना कर चुके हैं। इनमें वर्ष 2023 और 2025 की बाढ़ तथा भूस्खलन प्रमुख हैं।
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अध्ययन के अनुसार, लगभग एक-तिहाई संस्थानों के भवनों में भूकंपरोधी व्यवस्था है, जबकि केवल आधे संस्थानों में आपदा प्रबंधन के लिए प्रशिक्षित कर्मचारी उपलब्ध हैं। आनी और निरमंड क्षेत्रों में खड़ी ढलानें, कमजोर सुरक्षा दीवारें और अग्निशमन सेवाओं की अधिक दूरी जोखिम बढ़ाने वाले प्रमुख कारण पाए गए। इसके अलावा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और बीपीएल परिवारों के विद्यार्थियों की अधिक संख्या को भी जोखिम आकलन में शामिल किया गया।
इनसेट
छह महीने में तैयारी मजबूत करने की सिफारिश
शोध में शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा के लिए छह महीने के भीतर कर्मचारियों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण देने, प्रभावी आपदा प्रबंधन योजनाएं तैयार करने और प्राथमिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करवाने की सिफारिश की गई। इसके साथ ही ढलानों का संरक्षण, सुरक्षा दीवारों को मजबूत करने और भवनों का भूकंपरोधी सुदृढ़ीकरण करने पर जोर दिया गया।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. दायक राम ठाकुर ने शोध निष्कर्षों को शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि नियमित प्रशिक्षण, प्रभावी आपदा प्रबंधन योजनाओं और जन-जागरूकता से आपदाओं के जोखिम को कम किया जा सकता है। उन्होंने कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए आपदा प्रबंधन समिति के प्रयासों की सराहना की। कार्यशाला में शिक्षक, गैर-शिक्षक कर्मचारी, विद्यार्थी और स्थानीय लोग उपस्थित रहे।