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यू टयूब में प्राचीन कुल्लवी नाटियों को देखने का क्रेज बढ़ा
Updated Sat, 06 Jan 2018 06:29 PM IST
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यू ट्यूब में प्राचीन कुल्लवी
नाटियों को देखने का बढ़ा क्रेज
कुल्लवी संस्कृति को युवाओं के बीच ला रहे लोक गायक इंद्रजीत
लोक संस्कृति को बढ़ावा देना ही मकसद: इंद्रजीत
अमर उजाला ब्यूरो
मनाली (कुल्लू)। लोक गायक इंद्रजीत ने कहा कि लोक संस्कृति को बढ़ावा देना और संरक्षित देना ही मेरी गायकी मुख्य मकसद है। कुल्लवी प्राचीन लोक गीतों को जीवंत करने के लिए इन्हें नए सिरे से गाकर युवाओं के बीच लाया जा रहा है। जिसमें प्राचीन स्वरूप को बरकरार रखा गया है। जिससे युवा वर्ग अपनी संस्कृति से रूबरू हो सके। वह शुक्रवार को विंटर कार्निवाल की चौथी सांस्कृतिक संध्या के स्टार कलाकार रहे।
इस दौरान इंद्रजीत ने कहा कि अभी तक उनके 50 से अधिक लोक गीत मार्केट में लांच किए जा चुके हैं। जल्द लोहड़ी से पहले एक और गीत माघा रा साजा गाना लांच किया जा रहा है। 2008 में पहला गाना लांच करने वाले इंद्रजीत की कुल्लू जिला समेत हिमाचल एक अच्छी खासी पहचान बन गई है। 2016 में दोबारा सक्रियता दिखाते हुए उनके करियर ने रफ्तार पकड़ी और आज वह युवाओं से लेकर बुजुर्गों के बीच लोकप्रिय हो चुके हैं। यू टयूब पर आईसुर फोक चैनल पर नाटियों का ट्रेंड बढ़ा है। कई नाटियों को 15 से 20 लाख से अधिक लोग देख व पसंद कर चुके हैं। युवाओं के बीच पुरातन नाटियों को देखने का क्रेज बढ़ रहा है। पारंपरिक लोक संस्कृति को जीवंत करने का प्रयास कर रहे इंद्रजीत लाइव शो के दौरान पारंपरिक परिधानों में नजर आते हैं। लाइव शो के दौरान भी वह मंच पर पुरातन कुल्लू को दर्शाते हैं।
माल रोड पर प्रशंसकों ने खूब ली सेल्फी
शनिवार दोपहर को मनाली माल रोड पहुंचते ही इंद्रजीत के प्रशंसकों ने उन्हें घेर लिया और खूब सेल्फी ली। कुल्लवी डेस में उन्हें देख पर्यटक भी आकर्षित हुए। इंद्रजीत मूलत: कुल्लू शहर के शीशामाटी से संबंध रखते हैं।
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नाटियों को देखने का बढ़ा क्रेज
कुल्लवी संस्कृति को युवाओं के बीच ला रहे लोक गायक इंद्रजीत
लोक संस्कृति को बढ़ावा देना ही मकसद: इंद्रजीत
अमर उजाला ब्यूरो
मनाली (कुल्लू)। लोक गायक इंद्रजीत ने कहा कि लोक संस्कृति को बढ़ावा देना और संरक्षित देना ही मेरी गायकी मुख्य मकसद है। कुल्लवी प्राचीन लोक गीतों को जीवंत करने के लिए इन्हें नए सिरे से गाकर युवाओं के बीच लाया जा रहा है। जिसमें प्राचीन स्वरूप को बरकरार रखा गया है। जिससे युवा वर्ग अपनी संस्कृति से रूबरू हो सके। वह शुक्रवार को विंटर कार्निवाल की चौथी सांस्कृतिक संध्या के स्टार कलाकार रहे।
इस दौरान इंद्रजीत ने कहा कि अभी तक उनके 50 से अधिक लोक गीत मार्केट में लांच किए जा चुके हैं। जल्द लोहड़ी से पहले एक और गीत माघा रा साजा गाना लांच किया जा रहा है। 2008 में पहला गाना लांच करने वाले इंद्रजीत की कुल्लू जिला समेत हिमाचल एक अच्छी खासी पहचान बन गई है। 2016 में दोबारा सक्रियता दिखाते हुए उनके करियर ने रफ्तार पकड़ी और आज वह युवाओं से लेकर बुजुर्गों के बीच लोकप्रिय हो चुके हैं। यू टयूब पर आईसुर फोक चैनल पर नाटियों का ट्रेंड बढ़ा है। कई नाटियों को 15 से 20 लाख से अधिक लोग देख व पसंद कर चुके हैं। युवाओं के बीच पुरातन नाटियों को देखने का क्रेज बढ़ रहा है। पारंपरिक लोक संस्कृति को जीवंत करने का प्रयास कर रहे इंद्रजीत लाइव शो के दौरान पारंपरिक परिधानों में नजर आते हैं। लाइव शो के दौरान भी वह मंच पर पुरातन कुल्लू को दर्शाते हैं।
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माल रोड पर प्रशंसकों ने खूब ली सेल्फी
शनिवार दोपहर को मनाली माल रोड पहुंचते ही इंद्रजीत के प्रशंसकों ने उन्हें घेर लिया और खूब सेल्फी ली। कुल्लवी डेस में उन्हें देख पर्यटक भी आकर्षित हुए। इंद्रजीत मूलत: कुल्लू शहर के शीशामाटी से संबंध रखते हैं।
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