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सीलबंदी के बाद 50 फीसदी गिरा कसोल का पर्यटन कारोबार
Updated Wed, 27 Jun 2018 10:32 PM IST
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सीलबंदी के बाद पचास फीसदी
गिरा कसोल का पर्यटन कारोबार
विदेशी सैलानियों की पसंदीदा सैरगाह है धार्मिक नगरी मणिकर्ण
हाईकोर्ट के आदेश पर घाटी के 70 व्यवसायिक प्रतिष्ठान सील
रोशन ठाकुर
कुल्लू। धार्मिक नगरी पार्वती घाटी में व्यापारिक प्रतिष्ठानों की सीलबंदी से घाटी के पर्यटन कारोबार बैकफुट पर आ गया है। पर्यटन सीजन दौरान हुई कार्रवाई से घाटी में एक ही दिन में 50 फीसदी तक पर्यटन में गिरावट आई है। दो दिन पहले जो होटल, होम स्टे और गेस्टहाउस देशी-विदेशी पर्यटकों से गुलजार थे वह अब पूरी तरह से खाली हो गए हैं। तीन से चार दिनों के पैकेज पर आए पर्यटकों ने भी समय से पहले होटलों के कमरों का खाली कर दिया है।
जिला कुल्लू में पर्यटन नगरी मनाली के बाद सबसे अधिक पर्यटक धार्मिक नगरी मणिकर्ण आते हैं जो खासकर विदेशी सैलानियों की सबसे पसंदीदा सैरगाह है। लेकिन हाईकोर्ट के आदेश पर 70 होटलों, रेस्तरां व होमस्टे की सीलबंदी होने से इसका असर पूरी घाटी के पर्यटन कारोबार पड़ा है। बताया जा रहा है कि पार्वती वैली में करीब 300 व्यवसायिक प्रतिष्ठान है, जो सभी हाईकोर्ट के रडार पर हैं। इसमें पहले चरण में 40 और दूसरे चरण में 37 प्रतिष्ठानों को सील किया गया है। 20 के करीब प्रतिष्ठानों ने अपनी कागजी प्रक्रिया को पूरा किया कर दिया था।
मणिकर्ण वैली होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष किशन ठाकुर, महेंद्र सिंह, धर्मवीर, हरि राम, हुकम राम, नौमी राम, अमन सूद तथा गुलाब बिष्ट ने कहा कि होटल एसोसिएशन ने सीलबंदी और अन्य प्रक्रिया को पूरा करने में प्रशासन का पूरा सहयोग दिया है लेकिन मणिकर्ण, कसोल, कटागला, बरशैणी, जरी, तोष और पुलगा आदि क्षेत्रों में पर्यटन कारोबार पूरी तरह से बैकफुट पर आ गया है। सीलबंदी से कई लोगों का रोजगार छीन गया है। एसडीएम कुल्लू डॉ अमित गुलेरिया ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया हाईकोर्ट के आदेशों के तहत की जा रही है।
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अवैध कब्जों को छोड़ने का काम शुरू
कुल्लू। हाईकोर्ट के आदेश के बाद की व्यवसायिक प्रतिष्ठानों की सीलबंदी के बाद भी घाटी के पर्यटन कारोबारियों ने अवैध कब्जों को छोड़ने का काम शुरू कर दिया है। प्रशासन की निशानदेही में अधिकतर होटल, रेस्तरां, होम स्टे और गेस्टहाउस किसी न किसी रूप में अवैध निकले हैं। ऐसे में अब हाईकोर्ट की सख्ती के बाद लोगों ने इन अवैध कब्जों को तोड़कर छोड़ने का काम शुरू कर दिया है। सीलबंदी के अगले दिन बुधवार को घाटी में कई लोगों ने अवैध कब्जों को छोड़ा है।
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गिरा कसोल का पर्यटन कारोबार
विदेशी सैलानियों की पसंदीदा सैरगाह है धार्मिक नगरी मणिकर्ण
हाईकोर्ट के आदेश पर घाटी के 70 व्यवसायिक प्रतिष्ठान सील
रोशन ठाकुर
कुल्लू। धार्मिक नगरी पार्वती घाटी में व्यापारिक प्रतिष्ठानों की सीलबंदी से घाटी के पर्यटन कारोबार बैकफुट पर आ गया है। पर्यटन सीजन दौरान हुई कार्रवाई से घाटी में एक ही दिन में 50 फीसदी तक पर्यटन में गिरावट आई है। दो दिन पहले जो होटल, होम स्टे और गेस्टहाउस देशी-विदेशी पर्यटकों से गुलजार थे वह अब पूरी तरह से खाली हो गए हैं। तीन से चार दिनों के पैकेज पर आए पर्यटकों ने भी समय से पहले होटलों के कमरों का खाली कर दिया है।
जिला कुल्लू में पर्यटन नगरी मनाली के बाद सबसे अधिक पर्यटक धार्मिक नगरी मणिकर्ण आते हैं जो खासकर विदेशी सैलानियों की सबसे पसंदीदा सैरगाह है। लेकिन हाईकोर्ट के आदेश पर 70 होटलों, रेस्तरां व होमस्टे की सीलबंदी होने से इसका असर पूरी घाटी के पर्यटन कारोबार पड़ा है। बताया जा रहा है कि पार्वती वैली में करीब 300 व्यवसायिक प्रतिष्ठान है, जो सभी हाईकोर्ट के रडार पर हैं। इसमें पहले चरण में 40 और दूसरे चरण में 37 प्रतिष्ठानों को सील किया गया है। 20 के करीब प्रतिष्ठानों ने अपनी कागजी प्रक्रिया को पूरा किया कर दिया था।
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मणिकर्ण वैली होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष किशन ठाकुर, महेंद्र सिंह, धर्मवीर, हरि राम, हुकम राम, नौमी राम, अमन सूद तथा गुलाब बिष्ट ने कहा कि होटल एसोसिएशन ने सीलबंदी और अन्य प्रक्रिया को पूरा करने में प्रशासन का पूरा सहयोग दिया है लेकिन मणिकर्ण, कसोल, कटागला, बरशैणी, जरी, तोष और पुलगा आदि क्षेत्रों में पर्यटन कारोबार पूरी तरह से बैकफुट पर आ गया है। सीलबंदी से कई लोगों का रोजगार छीन गया है। एसडीएम कुल्लू डॉ अमित गुलेरिया ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया हाईकोर्ट के आदेशों के तहत की जा रही है।
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अवैध कब्जों को छोड़ने का काम शुरू
कुल्लू। हाईकोर्ट के आदेश के बाद की व्यवसायिक प्रतिष्ठानों की सीलबंदी के बाद भी घाटी के पर्यटन कारोबारियों ने अवैध कब्जों को छोड़ने का काम शुरू कर दिया है। प्रशासन की निशानदेही में अधिकतर होटल, रेस्तरां, होम स्टे और गेस्टहाउस किसी न किसी रूप में अवैध निकले हैं। ऐसे में अब हाईकोर्ट की सख्ती के बाद लोगों ने इन अवैध कब्जों को तोड़कर छोड़ने का काम शुरू कर दिया है। सीलबंदी के अगले दिन बुधवार को घाटी में कई लोगों ने अवैध कब्जों को छोड़ा है।