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सात दिन बाद अपने देवालयों को लौटे देवी देवता
Updated Thu, 25 Oct 2018 10:01 PM IST
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सात दिन बाद ढालपुर से अपने
देवालयों को लौटे देवी-देवता
दशहरों में एक दूसरे की दुख तकलीफों को किया साझा
देवताओं के मंदिर लौटने से सूनी पड़ी रघुनाथ की नगरी
अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में शरीक हुए सैकड़ों देवी देवता अपने देवालय की ओर कूच कर गए हैं। वीरवार को सैकड़ों देवी देवता अगले साल फिर मिलने का वादा कर वापस लौट गए हैं, जबकि दूरदराज के देवी देवता लंका दहन से पहले ही देवालय की ओर रवाना हो गए हैं। सात दिन तक देवलोक में तबदील रघुनाथ की नगरी अब देवताओं के बिना सूनी पड़ गई है। दशहरा उत्सव के दौरान देवता और देवलुओं ने आपस में सीधी बात भी की। अंतरराष्ट्रीय दशहरा के समापन के बाद 200 से अधिक देवी देवताओं ने अपने देवालय की तरफ ढोल-नगाड़ों तथा शहनाइयों की थाप पर कूच किया। सोने-चांदी से सजे आकर्षक देवी देवताओं के देवरथों के बिछोह से लोग भावुक हो गए और अपने अधिष्ठाता से भविष्य के लिए सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। देवालय लौटने से पहले देवताओं ने भगवान रघुनाथ से भी मिल कर अपने सुख-दुख को साझा किया और अगले वर्ष फिर आने का वादा किया। कई देवी-देवताओं ने रवानगी से पूर्व रघुनाथ को सम्मान सहित उनके देवालय रघुनाथपुर तक पहुंचाया। देवी देवता कारदार संघ के पूर्व अध्यक्ष दोत राम ठाकुर ने कहा कि एक हफ्ते तक देवलोक में बदली रघुनाथ की धरा अब अगले साल तक के लिए सूनी पड़ गई है। उन्होंने कहा कि देव समागम के अलौकिक दृश्य ने सबका मन मोहा है।
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देवालयों को लौटे देवी-देवता
दशहरों में एक दूसरे की दुख तकलीफों को किया साझा
देवताओं के मंदिर लौटने से सूनी पड़ी रघुनाथ की नगरी
अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में शरीक हुए सैकड़ों देवी देवता अपने देवालय की ओर कूच कर गए हैं। वीरवार को सैकड़ों देवी देवता अगले साल फिर मिलने का वादा कर वापस लौट गए हैं, जबकि दूरदराज के देवी देवता लंका दहन से पहले ही देवालय की ओर रवाना हो गए हैं। सात दिन तक देवलोक में तबदील रघुनाथ की नगरी अब देवताओं के बिना सूनी पड़ गई है। दशहरा उत्सव के दौरान देवता और देवलुओं ने आपस में सीधी बात भी की। अंतरराष्ट्रीय दशहरा के समापन के बाद 200 से अधिक देवी देवताओं ने अपने देवालय की तरफ ढोल-नगाड़ों तथा शहनाइयों की थाप पर कूच किया। सोने-चांदी से सजे आकर्षक देवी देवताओं के देवरथों के बिछोह से लोग भावुक हो गए और अपने अधिष्ठाता से भविष्य के लिए सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। देवालय लौटने से पहले देवताओं ने भगवान रघुनाथ से भी मिल कर अपने सुख-दुख को साझा किया और अगले वर्ष फिर आने का वादा किया। कई देवी-देवताओं ने रवानगी से पूर्व रघुनाथ को सम्मान सहित उनके देवालय रघुनाथपुर तक पहुंचाया। देवी देवता कारदार संघ के पूर्व अध्यक्ष दोत राम ठाकुर ने कहा कि एक हफ्ते तक देवलोक में बदली रघुनाथ की धरा अब अगले साल तक के लिए सूनी पड़ गई है। उन्होंने कहा कि देव समागम के अलौकिक दृश्य ने सबका मन मोहा है।