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ताला लगने की कगार पर पहुंचा बंजार का कतोड़ा स्कूल
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अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। जिले के सरकारी स्कूलों में स्टाफ न होने से परेशान विद्यार्थी अब सरकारी स्कूलों से पलायन कर दूसरे स्कूलों में जाने लगे हैं। उपमंडल बंजार के तहत आने वाला मिडल स्कूल कतोड़ा बंद होने की कगार पर पहुंच गया है। स्कूल में कभी भी ताला लग सकता है। 31 में से 30 बच्चों के स्कूल से पलायन करने के बाद महज एक छात्रा ही स्कूल में है। अप्रैल 2016 को पदोन्नत हुए कतोड़ा स्कूल को तीन साल का समय हुआ लेकिन किसी भी शिक्षक की तैनाती नहीं की गई। हैरानी की बात है कि 2019 के सत्र में एक भी विद्यार्थी ने स्कूल में दाखिला नहीं लिया और यहां बचे नौ अन्य छात्र-छात्राएं दूसरे स्कूल जाने को विवश हुए। अब एक मात्र छात्रा होने से उसकी पढ़ाई हाई स्कूल टील में चल रही है और हाजिरी कतोड़ा में लग रही है। मुख्याध्यापक केसरी चंद चौहान ने कहा कि इस मामले को लेकर वह नियमित रूप से शिक्षा विभाग को अवगत करवाते रहे। वहीं दूसरी ओर पार्वती घाटी के मिडल स्कूल नगोठी में एक ही अध्यापक तीन कक्षाओं को पढ़ा रहा है। ऐसे में यहां से आठवीं कक्षा से 12 बच्चे स्कूल छोड़ कर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला जरी में चले गए हैं। स्कूल में अब कुल बच्चों की संख्या 35 ही रह गई है। जबकि आठवीं कक्षा में संख्या दस रह गई। दिसंबर के बाद यहां पर किसी भी अध्यापक की नियुक्ति नहीं हुई है। इसके बाद अध्यापकों ने फैसला लिया है कि अब बच्चों के भविष्य को लेकर किसी प्रकार की कोताही सहन नहीं होगी। अभिभावकों ने निर्णय लिया है कि स्कूल से बच्चों को निकाला जाए। बताया जा रहा है कि जिले के दूसरे सरकारी स्कूलों में भी यह सिलसिला जारी है। अभिभावकों में शिक्षकों के खाली पद न भरे जाने को लेकर विभाग के प्रति रोष है। इस संबंध में शिक्षा उपनिदेशक प्रारंभिक पुष्पा ने कहा कि इन स्कूलों का विशेष तौर पर निरीक्षण किया जाएगा। निरीक्षण के दौरान यहां पर खामियों को जांचा जाएगा। उन्होंने कहा कि खामियों को दूर करने का प्रयास किया जाएगा। इस मसले को विभाग गंभीरता से लेते हुए स्कूल से बच्चों के पलायन को रोकने का प्रयास किया जाएगा।
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कुल्लू। जिले के सरकारी स्कूलों में स्टाफ न होने से परेशान विद्यार्थी अब सरकारी स्कूलों से पलायन कर दूसरे स्कूलों में जाने लगे हैं। उपमंडल बंजार के तहत आने वाला मिडल स्कूल कतोड़ा बंद होने की कगार पर पहुंच गया है। स्कूल में कभी भी ताला लग सकता है। 31 में से 30 बच्चों के स्कूल से पलायन करने के बाद महज एक छात्रा ही स्कूल में है। अप्रैल 2016 को पदोन्नत हुए कतोड़ा स्कूल को तीन साल का समय हुआ लेकिन किसी भी शिक्षक की तैनाती नहीं की गई। हैरानी की बात है कि 2019 के सत्र में एक भी विद्यार्थी ने स्कूल में दाखिला नहीं लिया और यहां बचे नौ अन्य छात्र-छात्राएं दूसरे स्कूल जाने को विवश हुए। अब एक मात्र छात्रा होने से उसकी पढ़ाई हाई स्कूल टील में चल रही है और हाजिरी कतोड़ा में लग रही है। मुख्याध्यापक केसरी चंद चौहान ने कहा कि इस मामले को लेकर वह नियमित रूप से शिक्षा विभाग को अवगत करवाते रहे। वहीं दूसरी ओर पार्वती घाटी के मिडल स्कूल नगोठी में एक ही अध्यापक तीन कक्षाओं को पढ़ा रहा है। ऐसे में यहां से आठवीं कक्षा से 12 बच्चे स्कूल छोड़ कर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला जरी में चले गए हैं। स्कूल में अब कुल बच्चों की संख्या 35 ही रह गई है। जबकि आठवीं कक्षा में संख्या दस रह गई। दिसंबर के बाद यहां पर किसी भी अध्यापक की नियुक्ति नहीं हुई है। इसके बाद अध्यापकों ने फैसला लिया है कि अब बच्चों के भविष्य को लेकर किसी प्रकार की कोताही सहन नहीं होगी। अभिभावकों ने निर्णय लिया है कि स्कूल से बच्चों को निकाला जाए। बताया जा रहा है कि जिले के दूसरे सरकारी स्कूलों में भी यह सिलसिला जारी है। अभिभावकों में शिक्षकों के खाली पद न भरे जाने को लेकर विभाग के प्रति रोष है। इस संबंध में शिक्षा उपनिदेशक प्रारंभिक पुष्पा ने कहा कि इन स्कूलों का विशेष तौर पर निरीक्षण किया जाएगा। निरीक्षण के दौरान यहां पर खामियों को जांचा जाएगा। उन्होंने कहा कि खामियों को दूर करने का प्रयास किया जाएगा। इस मसले को विभाग गंभीरता से लेते हुए स्कूल से बच्चों के पलायन को रोकने का प्रयास किया जाएगा।