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लद्दाख से आयात होंगे 100 चीगू बकरे
Updated Sat, 07 Jul 2018 10:04 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
केलांग (लाहौल-स्पीति)। हिमाचल में अब पशमीना के उत्पादन के लिए लद्दाख से विशेष प्रजाति के चीगू बकरे आयात किए जाएंगे। जंगली बकरे चीगू से सबसे बेहतर पशमीना ऊन तैयार होती है। हिमाचल सरकार लद्दाख से जल्द ही 100 चीगू आयात करेगी। उन्हें स्पीति घाटी के लरी स्थित चमुर्थी घोड़ा प्रजनन केंद्र में रखा जाएगा। यहां पर इन बकरों की ब्रीडिंग के जरिये संख्या बढ़ाई जाएगी। बताया जा रहा है कि दस हजार रुपये में एक किलोग्राम पशमीना ऊन बिकती है।
हालांकि दशकों पहले स्पीति घाटी में चीगू बकरों की तादाद काफी अधिक थी। लेकिन वक्त के साथ यह प्रजाति स्पीति घाटी से विलुप्त हो गई। चीगू बकरे से तैयार होने वाली ऊन की दुनिया भर में मांग है। इससे शाल, स्टॉल के अलावा अन्य गर्म वस्त्र तैयार किए जाते हैं। लद्दाख से आयात किए जाने वाले चीगू बकरों से सामान्य चीगू के मुकाबले 250 ग्राम अधिक ऊन निकलती है। कृषि, आईटी एवं जनजातीय विकास मंत्री डॉ. मारकंडा ने बताया कि हिमाचल सरकार लद्दाख के कारगिल क्षेत्र से 100 चीगू बकरों को आयात करने जा रही है। मारकंडा ने बताया कि चीगू बकरों को लरी स्थित प्रजनन केंद्र में रखा जाएगा। यहां पर प्रजनन के माध्यम से बकरों की तादाद को बढ़ाया जाएगा। प्रजनन केंद्र के डॉ. छेरिंग ने बताया कि चीगू एक पहाड़ी बकरा है। इसकी ऊन से शाल और अन्य गर्म वस्त्र तैयार होते हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीगू के ऊन की कीमत 10 हजार रुपये प्रति किलोग्राम है।
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केलांग (लाहौल-स्पीति)। हिमाचल में अब पशमीना के उत्पादन के लिए लद्दाख से विशेष प्रजाति के चीगू बकरे आयात किए जाएंगे। जंगली बकरे चीगू से सबसे बेहतर पशमीना ऊन तैयार होती है। हिमाचल सरकार लद्दाख से जल्द ही 100 चीगू आयात करेगी। उन्हें स्पीति घाटी के लरी स्थित चमुर्थी घोड़ा प्रजनन केंद्र में रखा जाएगा। यहां पर इन बकरों की ब्रीडिंग के जरिये संख्या बढ़ाई जाएगी। बताया जा रहा है कि दस हजार रुपये में एक किलोग्राम पशमीना ऊन बिकती है।
हालांकि दशकों पहले स्पीति घाटी में चीगू बकरों की तादाद काफी अधिक थी। लेकिन वक्त के साथ यह प्रजाति स्पीति घाटी से विलुप्त हो गई। चीगू बकरे से तैयार होने वाली ऊन की दुनिया भर में मांग है। इससे शाल, स्टॉल के अलावा अन्य गर्म वस्त्र तैयार किए जाते हैं। लद्दाख से आयात किए जाने वाले चीगू बकरों से सामान्य चीगू के मुकाबले 250 ग्राम अधिक ऊन निकलती है। कृषि, आईटी एवं जनजातीय विकास मंत्री डॉ. मारकंडा ने बताया कि हिमाचल सरकार लद्दाख के कारगिल क्षेत्र से 100 चीगू बकरों को आयात करने जा रही है। मारकंडा ने बताया कि चीगू बकरों को लरी स्थित प्रजनन केंद्र में रखा जाएगा। यहां पर प्रजनन के माध्यम से बकरों की तादाद को बढ़ाया जाएगा। प्रजनन केंद्र के डॉ. छेरिंग ने बताया कि चीगू एक पहाड़ी बकरा है। इसकी ऊन से शाल और अन्य गर्म वस्त्र तैयार होते हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीगू के ऊन की कीमत 10 हजार रुपये प्रति किलोग्राम है।
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