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Kangra News: रसोई ही नहीं अब डिपुओं में भी राशन बांट रहीं महिलाएं
Wed, 07 Jan 2026 07:07 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Wed, 07 Jan 2026 07:07 AM IST
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धर्मशाला। जिन हाथों ने अब तक केवल परिवार की रसोई संभाली, वही हाथ अब जिले में राशन वितरण व्यवस्था को सुचारू बना रहे हैं। कांगड़ा जिले में 54 महिला संचालक उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से न केवल परिवारों तक राशन पहुंचा रही हैं, बल्कि समाज में पारदर्शिता और सशक्तीकरण का बड़ा संदेश भी दे रही हैं।
खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में जिलेभर में कुल 1142 सस्ते राशन की दुकानें संचालित की जा रही हैं। इनमें से कई महत्वपूर्ण केंद्रों की कमान अब महिलाओं के हाथों में है। ये महिला संचालक विभिन्न स्वयं सहायता समूहों और सहकारी सोसायटियों से जुड़ी हैं, जो जमीनी स्तर पर राशन वितरण व्यवस्था को सुचारू बनाने में जुटी हैं।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से डिपुओं के कामकाज में पारदर्शिता और उपभोक्ताओं के प्रति जवाबदेही बढ़ी है। महिलाएं राशन वितरण के साथ-साथ रिकॉर्ड प्रबंधन और डिजिटल लेन-देन भी बखूबी संभाल रही हैं।
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भविष्य की योजना... और बढ़ेंगी महिला संचालक
जिला प्रशासन का लक्ष्य आने वाले समय में महिला संचालकों की इस संख्या को और अधिक बढ़ाना है। इससे अधिक से अधिक महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे और वे समाज की मुख्यधारा में सक्रिय योगदान दे सकेंगी।
कांगड़ा जिले में 54 महिलाएं विभिन्न सोसायटियों और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से उचित मूल्य की दुकानों का संचालन कर रही हैं। विभाग का प्रयास है कि हर क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिले और सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पारदर्शिता से पहुंचे।
-पुरुषोत्तम सिंह, जिला नियंत्रक, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले
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खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में जिलेभर में कुल 1142 सस्ते राशन की दुकानें संचालित की जा रही हैं। इनमें से कई महत्वपूर्ण केंद्रों की कमान अब महिलाओं के हाथों में है। ये महिला संचालक विभिन्न स्वयं सहायता समूहों और सहकारी सोसायटियों से जुड़ी हैं, जो जमीनी स्तर पर राशन वितरण व्यवस्था को सुचारू बनाने में जुटी हैं।
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प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से डिपुओं के कामकाज में पारदर्शिता और उपभोक्ताओं के प्रति जवाबदेही बढ़ी है। महिलाएं राशन वितरण के साथ-साथ रिकॉर्ड प्रबंधन और डिजिटल लेन-देन भी बखूबी संभाल रही हैं।
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भविष्य की योजना... और बढ़ेंगी महिला संचालक
जिला प्रशासन का लक्ष्य आने वाले समय में महिला संचालकों की इस संख्या को और अधिक बढ़ाना है। इससे अधिक से अधिक महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे और वे समाज की मुख्यधारा में सक्रिय योगदान दे सकेंगी।
कांगड़ा जिले में 54 महिलाएं विभिन्न सोसायटियों और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से उचित मूल्य की दुकानों का संचालन कर रही हैं। विभाग का प्रयास है कि हर क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिले और सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पारदर्शिता से पहुंचे।
-पुरुषोत्तम सिंह, जिला नियंत्रक, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले