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पिता की बीमारी के बाद 10 लाख का बेल्डिंग कारोबार 80 लाख के पार पहुंचाया

Mon, 11 Jul 2022 12:09 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 11 Jul 2022 12:09 AM IST
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Welding business crossed 80 lakhs after father's illness
Welding business crossed 80 lakhs after father's illness
धर्मशाला। बीमार पिता के वेल्डिंग के काम को जापानी शीट्स में बदलकर लाखों का कारोबार कर गगल के राजेश कुमार ने सफल उद्यमी के रूप में पहचान बनाई है। वहीं, कोरोना काल में काम छोड़कर घर बेकार बैठे युवाओं को उन्होंने मुश्किल वक्त में काम दिया। राजेश ने पिछले साल 80 लाख से ऊपर के कारोबार को इस वर्ष एक करोड़ से ऊपर ले जाने का लक्ष्य रखा है।
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एविएशन, हॅस्पिटेलिटी एंड मैनेजमेंट की पढ़ाई करने के बाद राजेश को पिता के बीमार होने पर उनका वेल्डिंग का कारोबार संभालना पड़ा था। 2013 से वेल्डिंग का कारोबार करने वाले राजेश ने 2019 में काम बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना के तहत ऋण लेकर अपना जापानी शीट्स का काम शुरू किया।
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जापानी शीट्स का काम शुरू करने के छह-सात महीने के बाद ही कोरोना शुरू हो गया। मगर राजेश रुके नहीं, बल्कि फैक्टरियों में काम छोड़कर घर बेकार बैठे युवाओं को भी काम दिया। उन्होंने बताया कि पहले के लड़कों सहित कोरोना काल में 15 युवाओं को काम दिया। इस दौरान काम के अनुसार हर महीने 8,000 से 12,000 रुपये हर महीने पगार देते थे। उन्होंने बताया कि कोरोना काल में तीन से चार घंटे ही दुकान खुलती थी। इस दौरान भी वे अपने पास काम करने वाले साथियों को पूरी पगार देते थे। उन्होंने बताया कि उनके पास काम सीखने के बाद दो लड़कों ने अपना ही काम शुरू कर दिया है। वे हर माह 20 से 25 हजार रुपये कमा रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि पिछले वित्त वर्ष में उनके कारोबार का कुल टर्नओवर 80 लाख रुपये से ऊपर पहुंच गया है। कोरोना काल की दिक्कतों के बावजूद उनका काम ठीक से चलता रहा। उन्होंने बताया कि कोरोना की बंदिशें हटने के बाद से काम अब पहले से अच्छा चल रहा है। उन्होंने बताया कि इस वित्त वर्ष में उनका लक्ष्य टर्नओवर को एक करोड़ रुपये से ऊपर पहुंचाने का है।
30 फीसदी सस्ती चौखटें 20 से 25 साल ज्यादा चलती हैं
राजेश ने बताया कि लकड़ी की बनी चौखटों में दीमक लगने और फुलावट जैसी समस्याएं झेलनी पड़ती हैं। वहीं, लोहे की चौखटों में जंग लगने की समस्या रहती है। जापानी शीट्स की बनी चौखटों में दीमक-जंग की समस्या नहीं रहती। जापानी शीट्स की उम्र भी 30 से 35 साल तक होती है। इसके अलावा इसकी कीमत भी लकड़ी-लोहे की चौखटों की तुलना में करीब 30 फीसदी तक कम होती है।

अब खुद की खरीदी जमीन पर शुरू करेंगे फैक्टरी
राजेश ने बताया कि उन्होंने गगल में एक किराये की दुकान से काम शुरू किया था। काम बढ़ने के बाद 45 मील में भी एक दुकान किराये पर ले ली थी। उन्होंने बताया कि अपनी बचत से उन्होंने खुद की जमीन खरीद ली है। इस जमीन पर आने वाले समय में फैक्टरी शुरू करेंगे।
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