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Kangra News: वादी के हक में फैसला, खाली करने होंगे मकान और गोशाला
Thu, 13 Aug 2026 07:10 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Thu, 13 Aug 2026 07:10 AM IST
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धर्मशाला। सिविल जज (द्वितीय) डॉ. पार्थ जैन की अदालत ने शाहपुर तहसील के अंतर्गत जमीन पर अवैध कब्जे से जुड़े मामले में वादी के हक में फैसला सुनाया है। अदालत ने प्रतिवादियों को दो खसरा नंबरों पर स्थित कच्चे मकान और गोशाला को खाली कर वादी को शांतिपूर्ण कब्जा सौंपने के आदेश दिए हैं।
छह साल तक चली कानूनी लड़ाई के बाद आए इस निर्णय में अदालत ने प्रतिवादियों को वाद खर्च वहन करने का भी हुक्म दिया है। मामले के अनुसार वादी सुनील कुमार ने एक महिला से जमीन का 1/8 हिस्सा खरीदा था, जिसका इंतकाल 23 जुलाई 2015 को उनके नाम दर्ज हुआ था। राजस्व रिकॉर्ड में दोनों खसरा नंबरों पर मकान और गोशाला दर्ज थी।
वादी का आरोप था कि मार्च 2016 के दूसरे सप्ताह में प्रतिवादियों ने जबरन मकान और गोशाला पर कब्जा कर लिया। शाहपुर थाने में 18 मार्च 2016 को एफआईआर दर्ज कराने के बाद उन्होंने कब्जा वापस पाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। सुनवाई के दौरान प्रतिवादियों ने तर्क दिया कि वे वर्ष 2011 से पूर्व मालकिन की सहमति से वहां रह रहे हैं, लेकिन वे अदालत में कोई साक्ष्य पेश नहीं कर सके।
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बाद में वे मामले में एकपक्षीय रहे। अदालत ने पाया कि राजस्व रिकॉर्ड और घटना के तुरंत बाद दर्ज कराई गई प्राथमिकी से वादी के दावे की पुष्टि होती है। सभी तथ्यों और गवाही के आधार पर अदालत ने वादी के पक्ष में निर्णय सुनाया।
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छह साल तक चली कानूनी लड़ाई के बाद आए इस निर्णय में अदालत ने प्रतिवादियों को वाद खर्च वहन करने का भी हुक्म दिया है। मामले के अनुसार वादी सुनील कुमार ने एक महिला से जमीन का 1/8 हिस्सा खरीदा था, जिसका इंतकाल 23 जुलाई 2015 को उनके नाम दर्ज हुआ था। राजस्व रिकॉर्ड में दोनों खसरा नंबरों पर मकान और गोशाला दर्ज थी।
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वादी का आरोप था कि मार्च 2016 के दूसरे सप्ताह में प्रतिवादियों ने जबरन मकान और गोशाला पर कब्जा कर लिया। शाहपुर थाने में 18 मार्च 2016 को एफआईआर दर्ज कराने के बाद उन्होंने कब्जा वापस पाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। सुनवाई के दौरान प्रतिवादियों ने तर्क दिया कि वे वर्ष 2011 से पूर्व मालकिन की सहमति से वहां रह रहे हैं, लेकिन वे अदालत में कोई साक्ष्य पेश नहीं कर सके।
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बाद में वे मामले में एकपक्षीय रहे। अदालत ने पाया कि राजस्व रिकॉर्ड और घटना के तुरंत बाद दर्ज कराई गई प्राथमिकी से वादी के दावे की पुष्टि होती है। सभी तथ्यों और गवाही के आधार पर अदालत ने वादी के पक्ष में निर्णय सुनाया।