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पौंग बांध विस्थापितों का फिर छलका दर्द, 50 साल बाद फिर उजड़ने का डर
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1971 में विस्थापित होकर शाहपुर आए परिवारों के सदस्य।
- फोटो : Kangra
शाहपुर (कांगड़ा)। वर्ष 1964 में पौंग बांध निर्माण के कारण 24,310 परिवार विस्थापित हुए थे। उनमें से देहरा तहसील की सौथल पंचायत के गाव बिहारी से रामस्वरूप शांडिल्य का परिवार भी था। जो शाहपुर में आकर बसा था। 1971 में विस्थापित रामस्वरूप शांडिल्य सहित पांच परिवारों को अब फिर से उजड़ने का डर सताने लगा है। वे अभी पिछले विस्थापन का दर्द भूल भी नहीं पाए थे कि अब 50 साल बाद फिर उनका दर्द हरा होने वाला है।
फोरलेन की जद में उनकी दर्जनों दुकानें आने से वह बेरोजगार हो जाएंगे, वहीं ट्रक बाय लेन की वजह से घर भी खतरे की जद में हैं। 50 साल बाद विस्थापन का डर उन्हें अंदर ही अंदर खाए जा रहा है। सरकार और प्रशासन अभी तक उनके इस डर को दूर करने में सफल नहीं हो पाया है।
पौंग बांध निर्माण के कारण मुंशी राम, रामस्वरूप शांडिल्य, अनूप शांडिल्य, नरोत्तम शांडिल्य, रणजीत शांडिल्य विस्थापित होकर 1971 में शाहपुर आकर बस गए थे। उस समय उन्होंने यहां पर 10 कनाल जमीन खरीदी थी। पौंग बांध के आगोश में उनकी 500 कनाल जमीन चली गई थी। अब ये पांच परिवार बढ़कर 10 हो गए हैं। 10 परिवारों में कुल 35 सदस्य हैं। पठानकोट मंडी फोरलेन की जद में उनकी 17 दुकानें और घर आ रहे हैं। शाहपुर में फोरलेन के साथ ट्रक बाय लेन भी बनाई जा रही है, जिसकी जद में उनकी दुकानों के साथ घर भी आ रहे हैं। सभी परिवारों ने सरकार को चेताया है कि अगर उन्हें फिर से विस्थापित किया गया तो सड़क पर आकर चक्का जाम करने से भी गुरेज नहीं करेंगे।
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2002 में शाहपुर से विधायक का चुनाव लड़ चुके रामस्वरूप शांडिल्य ने रोष भरे लहजे में कहा कि आखिर सरकार उन्हें कितनी बार विस्थापित करेगी। सरकार शाहपुर में विकास नहीं विनाश कर रही है। यहां पर ट्रक लेन व्यक्ति विशेष की जमीन को फ्रंट में लाने के लिए बनाई जा रही है। शाहपुर में ट्रक लेन का कोई औचित्य नहीं है। न तो शाहपुर में कोई मंडी है, न कोई यूनियन, न कोई इंडस्ट्री है और न ही कोई सुपर मार्केट है। फिर भी कुछ व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने के लिए ट्रक लेन बनाई जा रही है। अगर ट्रक लेन निर्माण नहीं होता है तो उनके घर बच सकते हैं और वे विस्थापित होने से बच सकते हैं।
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फोरलेन की जद में उनकी दर्जनों दुकानें आने से वह बेरोजगार हो जाएंगे, वहीं ट्रक बाय लेन की वजह से घर भी खतरे की जद में हैं। 50 साल बाद विस्थापन का डर उन्हें अंदर ही अंदर खाए जा रहा है। सरकार और प्रशासन अभी तक उनके इस डर को दूर करने में सफल नहीं हो पाया है।
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पौंग बांध निर्माण के कारण मुंशी राम, रामस्वरूप शांडिल्य, अनूप शांडिल्य, नरोत्तम शांडिल्य, रणजीत शांडिल्य विस्थापित होकर 1971 में शाहपुर आकर बस गए थे। उस समय उन्होंने यहां पर 10 कनाल जमीन खरीदी थी। पौंग बांध के आगोश में उनकी 500 कनाल जमीन चली गई थी। अब ये पांच परिवार बढ़कर 10 हो गए हैं। 10 परिवारों में कुल 35 सदस्य हैं। पठानकोट मंडी फोरलेन की जद में उनकी 17 दुकानें और घर आ रहे हैं। शाहपुर में फोरलेन के साथ ट्रक बाय लेन भी बनाई जा रही है, जिसकी जद में उनकी दुकानों के साथ घर भी आ रहे हैं। सभी परिवारों ने सरकार को चेताया है कि अगर उन्हें फिर से विस्थापित किया गया तो सड़क पर आकर चक्का जाम करने से भी गुरेज नहीं करेंगे।
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2002 में शाहपुर से विधायक का चुनाव लड़ चुके रामस्वरूप शांडिल्य ने रोष भरे लहजे में कहा कि आखिर सरकार उन्हें कितनी बार विस्थापित करेगी। सरकार शाहपुर में विकास नहीं विनाश कर रही है। यहां पर ट्रक लेन व्यक्ति विशेष की जमीन को फ्रंट में लाने के लिए बनाई जा रही है। शाहपुर में ट्रक लेन का कोई औचित्य नहीं है। न तो शाहपुर में कोई मंडी है, न कोई यूनियन, न कोई इंडस्ट्री है और न ही कोई सुपर मार्केट है। फिर भी कुछ व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने के लिए ट्रक लेन बनाई जा रही है। अगर ट्रक लेन निर्माण नहीं होता है तो उनके घर बच सकते हैं और वे विस्थापित होने से बच सकते हैं।