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Kangra News: छह दशक से भार ढो रहा पुल, खतरे के बीच गुजर रहे वाहन

Tue, 17 Sep 2024 05:15 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा Updated Tue, 17 Sep 2024 05:15 AM IST
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The bridge has been carrying loads for six decades, vehicles are passing through danger
देहरागोपीपुर (कांगड़ा)। साल 1962 में ब्यास नदी पर बने पुल पर खतरे का सफर जारी है। देहरा के साथ राष्ट्रीय राजमार्ग 503 (मुबारिकपुर से रानीताल) पर ब्यास नदी पर बने पुल की आयु 62 साल हो चुकी है, लेकिन अब यह पुराना पुल यातायात में बढ़ोतरी के कारण सुरक्षा के लिहाज से खतरा बन गया है। इस पुल पर रोजाना सैकड़ों भारी एवं हल्के वाहन गुजरते हैं। साथ ही कंपन का अहसास भी होता है। इस पुल से रोजाना बस, रेत के डंपर सहित अन्य भारी वाहन धड़ल्ले से गुजरते हैं।
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यद्यपि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण इस पुल स्थिति से अच्छी तरह वाकिफ है, लेकिन पिछले एक दशक में इसके स्थान पर नया पुल बनाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया। वर्तमान में देखा जाए तो ब्यास नदी पर बने इस पुल का उपयोग सैकड़ों यात्री, पर्यटक और स्थानीय लोगों द्वारा मैक्लोड़गंज, कांगड़ा, धर्मशाला, चंबा और मंडी जिलों के पर्यटन स्थलों तक पहुंचने के लिए किया जा रहा है। साथ ही हर साल हजारों तीर्थयात्री ज्वालाजी, बगलामुखी, ब्रजेश्वरी और चामुंडा देवी जैसे कांगड़ा जिले में स्थित मंदिरों तक पहुंचने के लिए करते हैं।
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इस पुल को कांगड़ा जिला की लाइफ लाइन के तौर पर भी देखा जाता है। यदि किसी कारणवश यह पुल यातायात के लिए बंद होता तो जिला कांगड़ा के पर्यटन को काफी क्षति पहुंचेंगी। साथ ही देहरा और जसवां परागपुर हलके के लोगों का संपर्क उपमंडल मुख्यालय से कट जाएगा। इसलिए 62 साल पुराने इस पुल के स्थान पर नए पुल के निर्माण की मांग जोर पकड़ रही है। हालांकि जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण का नए पुल बनाने की कोई योजना नहीं है।
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क्षमता से अधिक के गुजर रहे वाहन
साल 1962 में इस पुल का डिजाइन और निर्माण 10 टन तक भार ले जाने वाले वाहनों के लिए किया गया था, लेकिन वर्तमान में इस पुल पर 20 से 30 टन सामग्री ले जाने वाले भारी वाहन इस पुल का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे पुल की संरचना को नुकसान पहुंच रहा है। इसलिए जर्जर हो रहे इस पुल के स्थान पर नए पुल के निर्माण की मांग हो रही है।



कांगड़ा जब पंजाब का हिस्सा था तब हुआ था निर्माण
इस पुल का उद्घाटन 7 अप्रैल, 1962 में हुआ था जब कांगड़ा जिला पंजाब का हिस्सा था। इसका उद्घाटन पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रताप सिंह कैरों ने किया था। इस पुल का निर्माण हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी ने किया था। पुरानी तकनीक और डिजाइन से बना यह पुल अब सुरक्षा के लिए खतरा बन चुका है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को इस बारे गहराई से विचार करना चाहिए।




इस बारे हमीरपुर स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के एक्सईएन हरि राम का कहना है कि इस पुराने पुल को नए पुल से बदलने का कोई प्रस्ताव नहीं है। हालांकि मुबारिकपुर से रानीताल मार्ग को फोरलेन करने के प्रस्ताव में नया पुल बनाया जाएगा।
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