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Kangra News: परागपुर में चमक रहा बोर्ड, सात वर्ष बाद भी नहीं मिला पंचकर्म विशेषज्ञ
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संवाद न्यूज एजेंसी
परागपुर (कांगड़ा)। धरोहर गांव परागपुर में स्थापित आयुर्वेदिक स्वास्थ्य एवं पंचकर्म केंद्र सात साल बाद भी पूरी तरह संचालित नहीं हो पाया है। वर्ष 2018 में इसका उद्घाटन किया गया था।
उस समय विधायक बिक्रम ठाकुर ने इसे क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक सौगात बताया था और दावा किया गया कि देशी-विदेशी पर्यटक और स्थानीय लोग यहां पंचकर्म जैसी विशेष चिकित्सा सुविधाओं का लाभ उठाएंगे। लेकिन अब तक यह सिर्फ बोर्ड और नाम तक सीमित है। सबसे अहम पद पंचकर्म विशेषज्ञ आज तक सृजित नहीं किए गए।
विभाग ने केवल आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी का पद बनाया और वहीं मामला अटक गया। नतीजा यह हुआ कि करोड़ों रुपये की लागत से शुरू यह प्रोजेक्ट उद्घाटन के बाद से ही अधूरा और निष्प्रभावी बना हुआ है। स्थानीय लोग बता रहे हैं कि सिर्फ पंचकर्म विशेषज्ञ ही नहीं, बल्कि क्षारसूत्र विशेषज्ञ, शल्य चिकित्सा आयुर्वेदाचार्य और आयुर्वेदिक संवाहक जैसे कई अन्य अहम पद भी कभी भरे नहीं गए। यदि ये पद समय पर भरे गए होते तो परागपुर और आसपास के धरोहर गांव आयुर्वेदिक चिकित्सा पर्यटन के बड़े केंद्र बन सकते थे और स्थानीय लोगों को रोजगार और स्वास्थ्य सुविधा दोनों का लाभ मिलता।
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जनता अब खुलकर सरकार और विभाग से सवाल कर रही है कि जब सात साल पहले उद्घाटन किया गया था, तब इन महत्वपूर्ण पदों की नियुक्ति क्यों नहीं की गई। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च करके बनाए गए प्रोजेक्ट को सिर्फ नाम और बोर्ड तक सीमित रखना विभाग और प्रशासन की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
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परागपुर (कांगड़ा)। धरोहर गांव परागपुर में स्थापित आयुर्वेदिक स्वास्थ्य एवं पंचकर्म केंद्र सात साल बाद भी पूरी तरह संचालित नहीं हो पाया है। वर्ष 2018 में इसका उद्घाटन किया गया था।
उस समय विधायक बिक्रम ठाकुर ने इसे क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक सौगात बताया था और दावा किया गया कि देशी-विदेशी पर्यटक और स्थानीय लोग यहां पंचकर्म जैसी विशेष चिकित्सा सुविधाओं का लाभ उठाएंगे। लेकिन अब तक यह सिर्फ बोर्ड और नाम तक सीमित है। सबसे अहम पद पंचकर्म विशेषज्ञ आज तक सृजित नहीं किए गए।
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विभाग ने केवल आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी का पद बनाया और वहीं मामला अटक गया। नतीजा यह हुआ कि करोड़ों रुपये की लागत से शुरू यह प्रोजेक्ट उद्घाटन के बाद से ही अधूरा और निष्प्रभावी बना हुआ है। स्थानीय लोग बता रहे हैं कि सिर्फ पंचकर्म विशेषज्ञ ही नहीं, बल्कि क्षारसूत्र विशेषज्ञ, शल्य चिकित्सा आयुर्वेदाचार्य और आयुर्वेदिक संवाहक जैसे कई अन्य अहम पद भी कभी भरे नहीं गए। यदि ये पद समय पर भरे गए होते तो परागपुर और आसपास के धरोहर गांव आयुर्वेदिक चिकित्सा पर्यटन के बड़े केंद्र बन सकते थे और स्थानीय लोगों को रोजगार और स्वास्थ्य सुविधा दोनों का लाभ मिलता।
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जनता अब खुलकर सरकार और विभाग से सवाल कर रही है कि जब सात साल पहले उद्घाटन किया गया था, तब इन महत्वपूर्ण पदों की नियुक्ति क्यों नहीं की गई। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च करके बनाए गए प्रोजेक्ट को सिर्फ नाम और बोर्ड तक सीमित रखना विभाग और प्रशासन की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।