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Kangra News: विभाग से बोर्ड को मिल सकता है स्कूलों की मान्यता देने का अधिकार
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एक्सक्लूसिव
बोर्ड ने शिक्षा निदेशालय को भेजा प्रस्ताव, निजी स्कूलों पर कस सकेगा शिकंजा
महंगी निजी किताबों से बचेंगे अभिभावक, छात्रों की पढ़ाई में आएगी एकरूपता
प्रारंभिक और उच्च शिक्षा विभाग के पास है मान्यता देने का अधिकार
विपिन चौधरी
धर्मशाला। प्रदेश में स्कूलों को मान्यता देने का अधिकार अब शिक्षा विभाग के बजाय हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड को मिल सकता है। बोर्ड प्रबंधन ने इसके लिए शिक्षा निदेशालय को प्रस्ताव भेजा है। यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है तो प्रदेश में स्कूल खोलने और उन्हें मान्यता देने का काम सिर्फ बोर्ड करेगा। इस समय प्रारंभिक और उच्च शिक्षा विभाग ही स्कूलों को मान्यता देते हैं।
सूत्रों के अनुसार बोर्ड ने प्रस्ताव में तर्क दिया है कि मान्यता का अधिकार मिलने पर निजी स्कूलों पर बेहतर नियंत्रण संभव होगा। अकसर देखा गया है कि कई निजी स्कूल पहली से 12वीं तक बोर्ड की ओर से जारी पुस्तकों को पढ़ाने के बजाय निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें पढ़ाते हैं। इससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। स्कूल बदलने पर बच्चों की पढ़ाई में असंगति भी आती है। इन्हीं कारणों को ध्यान में रखते हुए बोर्ड प्रबंधन ने निदेशालय को प्रस्ताव भेजा है कि स्कूलों को मान्यता देने का अधिकार केवल बोर्ड को ही दिया जाए।
हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने निदेशालय को पत्र लिखा है। इसमें स्कूलों को मान्यता देने का अधिकार बोर्ड को ही देने की बात कही गई है। यदि यह अधिकार बोर्ड के पास होगा तो उन स्कूलों पर भी लगाम कसेगी जो बोर्ड की किताबों को पढ़ाने से आनाकानी करते हैं।
विज्ञापन
-डॉ. मेजर विशाल शर्मा, सचिव, शिक्षा बोर्ड धर्मशाला
ये भी हो सकते हैं फायदे
एकल खिड़की प्रणाली
अलग-अलग विभागों की बजाय केवल बोर्ड को अधिकार मिलने से मान्यता प्रक्रिया सरल, तेज और पारदर्शी होगी।
स्कूलों को बार-बार विभागों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
गुणवत्ता और मानक सुनिश्चित करना
बोर्ड पहले से ही पाठ्यक्रम, परीक्षा और किताबें नियंत्रित करता है।
यदि वही मान्यता भी देगा तो शिक्षा की गुणवत्ता और मानक एक समान रहेंगे।
निगरानी और जवाबदेही आसान
एक ही संस्था जिम्मेदार होने से जवाबदेही तय करना आसान होगा।
निरीक्षण और कार्रवाई में तेजी आएगी।
अनियमित स्कूलों पर नियंत्रण
कई बार बिना पर्याप्त संसाधन या योग्य शिक्षकों के भी स्कूल खोल दिए जाते हैं।
बोर्ड को अधिकार मिलने पर बुनियादी ढांचे, शिक्षक-योग्यता और सुविधाओं की बेहतर जांच संभव होगी।
शिक्षा नीति और बोर्ड के उद्देश्यों में सामंजस्य
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधानों को सीधे लागू करने की क्षमता बोर्ड के पास होगी।
इससे शिक्षा व्यवस्था अधिक संगठित रहेगी।
अभिभावकों और विद्यार्थियों का हित
मान्यता देने वाला बोर्ड वही है जो परीक्षा भी लेता है, इसलिए विद्यार्थियों का शैक्षणिक भविष्य ज्यादा सुरक्षित रहेगा।
स्कूल बदलने पर बच्चों को पाठ्यक्रम और किताबों में असंगति का सामना कम करना पड़ेगा।
पारदर्शिता और भ्रष्टाचार में कमी
अलग-अलग विभागों की बजाय एक ही निकाय से अनुमति मिलने पर दोहराव और फाइलों में देरी कम होगी।
मनमानी व रिश्वत की गुंजाइश घटेगी।
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बोर्ड ने शिक्षा निदेशालय को भेजा प्रस्ताव, निजी स्कूलों पर कस सकेगा शिकंजा
महंगी निजी किताबों से बचेंगे अभिभावक, छात्रों की पढ़ाई में आएगी एकरूपता
प्रारंभिक और उच्च शिक्षा विभाग के पास है मान्यता देने का अधिकार
विपिन चौधरी
धर्मशाला। प्रदेश में स्कूलों को मान्यता देने का अधिकार अब शिक्षा विभाग के बजाय हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड को मिल सकता है। बोर्ड प्रबंधन ने इसके लिए शिक्षा निदेशालय को प्रस्ताव भेजा है। यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है तो प्रदेश में स्कूल खोलने और उन्हें मान्यता देने का काम सिर्फ बोर्ड करेगा। इस समय प्रारंभिक और उच्च शिक्षा विभाग ही स्कूलों को मान्यता देते हैं।
सूत्रों के अनुसार बोर्ड ने प्रस्ताव में तर्क दिया है कि मान्यता का अधिकार मिलने पर निजी स्कूलों पर बेहतर नियंत्रण संभव होगा। अकसर देखा गया है कि कई निजी स्कूल पहली से 12वीं तक बोर्ड की ओर से जारी पुस्तकों को पढ़ाने के बजाय निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें पढ़ाते हैं। इससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। स्कूल बदलने पर बच्चों की पढ़ाई में असंगति भी आती है। इन्हीं कारणों को ध्यान में रखते हुए बोर्ड प्रबंधन ने निदेशालय को प्रस्ताव भेजा है कि स्कूलों को मान्यता देने का अधिकार केवल बोर्ड को ही दिया जाए।
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हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने निदेशालय को पत्र लिखा है। इसमें स्कूलों को मान्यता देने का अधिकार बोर्ड को ही देने की बात कही गई है। यदि यह अधिकार बोर्ड के पास होगा तो उन स्कूलों पर भी लगाम कसेगी जो बोर्ड की किताबों को पढ़ाने से आनाकानी करते हैं।
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-डॉ. मेजर विशाल शर्मा, सचिव, शिक्षा बोर्ड धर्मशाला
ये भी हो सकते हैं फायदे
एकल खिड़की प्रणाली
अलग-अलग विभागों की बजाय केवल बोर्ड को अधिकार मिलने से मान्यता प्रक्रिया सरल, तेज और पारदर्शी होगी।
स्कूलों को बार-बार विभागों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
गुणवत्ता और मानक सुनिश्चित करना
बोर्ड पहले से ही पाठ्यक्रम, परीक्षा और किताबें नियंत्रित करता है।
यदि वही मान्यता भी देगा तो शिक्षा की गुणवत्ता और मानक एक समान रहेंगे।
निगरानी और जवाबदेही आसान
एक ही संस्था जिम्मेदार होने से जवाबदेही तय करना आसान होगा।
निरीक्षण और कार्रवाई में तेजी आएगी।
अनियमित स्कूलों पर नियंत्रण
कई बार बिना पर्याप्त संसाधन या योग्य शिक्षकों के भी स्कूल खोल दिए जाते हैं।
बोर्ड को अधिकार मिलने पर बुनियादी ढांचे, शिक्षक-योग्यता और सुविधाओं की बेहतर जांच संभव होगी।
शिक्षा नीति और बोर्ड के उद्देश्यों में सामंजस्य
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधानों को सीधे लागू करने की क्षमता बोर्ड के पास होगी।
इससे शिक्षा व्यवस्था अधिक संगठित रहेगी।
अभिभावकों और विद्यार्थियों का हित
मान्यता देने वाला बोर्ड वही है जो परीक्षा भी लेता है, इसलिए विद्यार्थियों का शैक्षणिक भविष्य ज्यादा सुरक्षित रहेगा।
स्कूल बदलने पर बच्चों को पाठ्यक्रम और किताबों में असंगति का सामना कम करना पड़ेगा।
पारदर्शिता और भ्रष्टाचार में कमी
अलग-अलग विभागों की बजाय एक ही निकाय से अनुमति मिलने पर दोहराव और फाइलों में देरी कम होगी।
मनमानी व रिश्वत की गुंजाइश घटेगी।