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संक्रमित मरीज के एक डोज खाने के बाद दूसरों में नहीं फैलता टीबी : डॉ. गुलेरी
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धर्मशाला। विश्व क्षय रोग दिवस के मौके पर क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला में टीबी के खात्मे पर एक कार्यशाला का आयोजन हुआ। कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. राजेश गुलेरी ने कहा कि एक संक्रमित मरीज को एक से दो डोज दवा खाने के बाद वह दूसरों में टीबी नहीं फैला सकता।
डॉ. गुलेरी ने बताया कि टीबी के प्रति लोगों की सोच में बदलाव आ रहा है और इसके बारे में फैली भ्रांतियों को दूर किया जा रहा है। 2015 के मुकाबले अब टीबी के केसों में कमी आई है और उम्मीद जताई कि कांगड़ा और हिमाचल राज्य 2030 के लक्ष्य से पहले टीबी मुक्त हो जाएंगे। सीएमओ ने यह भी बताया कि लक्षणात्मक टीबी के अलावा, जोखिमपूर्ण आबादी के तहत आने वाले 2.6 लाख लोगों का एक्सरे करवाया गया। इसमें 20 प्रतिशत बिना लक्षण वाले लोग थे, जिनमें से 800 लोग टीबी से संक्रमित पाए गए।
कार्यशाला में केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश के जनसंचार विभाग के डायरेक्टर रिसर्च डॉ. प्रदीप नैय्यर, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आरके सूद, वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन से डॉ. अधविका और एमएस जोनल अस्पताल की डॉ. अनुराधा शर्मा ने भी टीबी के खात्मे में मीडिया की भूमिका पर विचार व्यक्त किए। डॉ. गुलेरी ने इस अभियान को जनसहभागिता से सफल बनाने की आवश्यकता को बताया, ताकि हिमाचल प्रदेश को टीबी मुक्त किया जा सके।
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डॉ. गुलेरी ने बताया कि टीबी के प्रति लोगों की सोच में बदलाव आ रहा है और इसके बारे में फैली भ्रांतियों को दूर किया जा रहा है। 2015 के मुकाबले अब टीबी के केसों में कमी आई है और उम्मीद जताई कि कांगड़ा और हिमाचल राज्य 2030 के लक्ष्य से पहले टीबी मुक्त हो जाएंगे। सीएमओ ने यह भी बताया कि लक्षणात्मक टीबी के अलावा, जोखिमपूर्ण आबादी के तहत आने वाले 2.6 लाख लोगों का एक्सरे करवाया गया। इसमें 20 प्रतिशत बिना लक्षण वाले लोग थे, जिनमें से 800 लोग टीबी से संक्रमित पाए गए।
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कार्यशाला में केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश के जनसंचार विभाग के डायरेक्टर रिसर्च डॉ. प्रदीप नैय्यर, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आरके सूद, वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन से डॉ. अधविका और एमएस जोनल अस्पताल की डॉ. अनुराधा शर्मा ने भी टीबी के खात्मे में मीडिया की भूमिका पर विचार व्यक्त किए। डॉ. गुलेरी ने इस अभियान को जनसहभागिता से सफल बनाने की आवश्यकता को बताया, ताकि हिमाचल प्रदेश को टीबी मुक्त किया जा सके।
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