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Kangra News: कान पर टैग, फिर भी मालिक लापता, कार्रवाई कोई नहीं
Fri, 31 Jan 2025 01:01 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Fri, 31 Jan 2025 01:01 AM IST
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धर्मशाला में सड़क पर घूमते हुए टैंग लगे पशु।
धर्मशाला। पशुओं के मालिकों की पहचान के लिए उनके कानों पर लगाए गए टैग केवल खानापूर्ति का काम ही रह गया है। सड़कों पर टैग लगे कई लावारिश पशु घूम रहे हैं, लेकिन उनके मालिक लापता हैं। पशुओं को उनके मालिकों तक पहुंचाने और कार्रवाई करने के लिए न प्रशासन, न नगर निकायों के अधिकारी-पार्षद और न पंचायतों के प्रतिनिधि आगे आ रहे हैं। लावारिश गोवंश की समस्या प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, लेकिन बढ़ती तादाद पर अंकुश लगाने के लिए कोई योजना या कार्रवाई नहीं की जा रही है। मजबूरन अपना पेट भरने के लिए शहरों, बाजारों में यह गोवंश कूड़े के ढेर या कूड़ेदानों को खंगाल रहा है या फिर किसानों की फसलों को उजाड़ रहा है।
सड़कों पर पशुओं की तादाद प्रतिदिन बढ़ रही है, लेकिन न तो पशुओं की नसबंदी की जा रही है और न उनके लिए नए गोसदन बनाए जा रहे हैं। जिन गोसदनों में पशु रखे गए हैं, वहां भी उसकी हालत काफी खराब है। पशुओं को न तो समय पर चारा मिल रहा है और न पीने के लिए पानी। कई स्थानों पर तो पशुओं को रहने के लिए शेड तक नहीं हैं। जिला कांगड़ा में गोसदनों की क्षमता केवल 3774 पशुओं को रखने की ही है, ऐसे में अन्य पशुओं के लिए न तो कई ठिकाना है और न ही कोई आसरा। सरकार की ओर से पंचायतों को टैग लगे पशुओं को खुला खोड़ने वाले मालिकों पर कार्रवाई और जुर्माना लगाने की शक्तियां दी गई हैं, लेकिन पंचायत प्रतिनिधि भाई चारे के चलते किसी पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। इस वजह से पशुओं को सड़कों पर भगवान भरोसे छोड़ा जा रहा है, जो वाहन चालकों और किसानों के लिए सबसे गंभीर समस्या बनी हुई है।
पंचायतें और नगर निकाय कर सकते हैं कार्रवाई
समय-समय पर पंचायत प्रतिनिधियों और नगर निकायों को टैग लगे पशुओं के मालिकों पर कार्रवाई करने के लिए कहा गया है, लेकिन उनकी ओर से आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। विभाग का काम पशुओं का इलाज या इनकी नसबंदी आदि करना है। प्रशासन को नगर निकायों और पंचायत प्रतिनिधियों को निर्देश देने चाहिए कि अपने स्तर पर ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, ताकि इस समस्या से निपटा जा सके।
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- डॉ. सीमा, गुलेरिया, उपनिदेशक, पशुलापन विभाग कांगड़ा
नगर निगम को दे जानकारी
- धर्मशाला नगर निगम क्षेत्र से समय-समय पर लावारिस पशुओं को सराह स्थित गोदसन पहुंचाया जाता है, लेकिन लोग फिर पशुओं को सड़कों पर छोड़ रहे हैं। इस समस्या से निपटने के लिए जनसहयोग की भी जरूरत है। अगर कोई व्यक्ति लोगों को पशुओं को खुले में छोड़ता दिखाई देता है तो इसकी जानकारी नगर निगम के अधिकारियों को दें, ताकि कार्रवाई की जा सके।
- नीनू शर्मा, मेयर, नगर निगम धर्मशाला
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सड़कों पर पशुओं की तादाद प्रतिदिन बढ़ रही है, लेकिन न तो पशुओं की नसबंदी की जा रही है और न उनके लिए नए गोसदन बनाए जा रहे हैं। जिन गोसदनों में पशु रखे गए हैं, वहां भी उसकी हालत काफी खराब है। पशुओं को न तो समय पर चारा मिल रहा है और न पीने के लिए पानी। कई स्थानों पर तो पशुओं को रहने के लिए शेड तक नहीं हैं। जिला कांगड़ा में गोसदनों की क्षमता केवल 3774 पशुओं को रखने की ही है, ऐसे में अन्य पशुओं के लिए न तो कई ठिकाना है और न ही कोई आसरा। सरकार की ओर से पंचायतों को टैग लगे पशुओं को खुला खोड़ने वाले मालिकों पर कार्रवाई और जुर्माना लगाने की शक्तियां दी गई हैं, लेकिन पंचायत प्रतिनिधि भाई चारे के चलते किसी पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। इस वजह से पशुओं को सड़कों पर भगवान भरोसे छोड़ा जा रहा है, जो वाहन चालकों और किसानों के लिए सबसे गंभीर समस्या बनी हुई है।
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पंचायतें और नगर निकाय कर सकते हैं कार्रवाई
समय-समय पर पंचायत प्रतिनिधियों और नगर निकायों को टैग लगे पशुओं के मालिकों पर कार्रवाई करने के लिए कहा गया है, लेकिन उनकी ओर से आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। विभाग का काम पशुओं का इलाज या इनकी नसबंदी आदि करना है। प्रशासन को नगर निकायों और पंचायत प्रतिनिधियों को निर्देश देने चाहिए कि अपने स्तर पर ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, ताकि इस समस्या से निपटा जा सके।
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- डॉ. सीमा, गुलेरिया, उपनिदेशक, पशुलापन विभाग कांगड़ा
नगर निगम को दे जानकारी
- धर्मशाला नगर निगम क्षेत्र से समय-समय पर लावारिस पशुओं को सराह स्थित गोदसन पहुंचाया जाता है, लेकिन लोग फिर पशुओं को सड़कों पर छोड़ रहे हैं। इस समस्या से निपटने के लिए जनसहयोग की भी जरूरत है। अगर कोई व्यक्ति लोगों को पशुओं को खुले में छोड़ता दिखाई देता है तो इसकी जानकारी नगर निगम के अधिकारियों को दें, ताकि कार्रवाई की जा सके।
- नीनू शर्मा, मेयर, नगर निगम धर्मशाला