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फूलों की खेती से सीएसआईआर करेगा किसानों की आर्थिकी मजबूत
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सीएसआईआर पालमपुर में किसानों को फूलों की खेती कीजानकारी देते हुए वैज्ञानिक
- फोटो : Kangra
पालमपुर (कांगड़ा)। फूलों की खेती से किसानों की आर्थिकी मजबूत करने पर सीएसआईआर संस्थान पालमपुर ने जोर दिया है। बल दिया है। फूलों की खेती में नई तकनीक लाने के लिए संस्थान कई शोध कर रहा है।
इसके चलते सीएसआईआर-फ्लोरिकल्चर मिशन के तहत और उद्यान विभाग ने फूलों की खेती की व्यावसायिक एवं संरक्षित खेती के लिए लोगों को पांच दिन तक प्रशिक्षण दिया। संस्थान ने लिलियम, कैला लिली, गुलदाउदी, कारनेशन, बर्ड ऑफ पैराडाइज, एल्स्ट्रोमेरिया, ग्लैडियोलस एवं गेंदा की खेती पर लोगों को प्रशिक्षित किया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में बैजनाथ, पंचरुखी व भवारना ब्लॉक के करीब साठ प्रतिभागियों ने भाग लिया। संस्थान के निदेशक डॉ. संजय कुमार ने आशा व्यक्त की कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम लोगों के लिए बहुत ही उपयोगी सिद्ध होगा। प्रशिक्षण के संयोजक डॉ. भव्य भार्गव ने बताया कि फ्लोरिकल्चर मिशन के तहत कारनेशन, गुलदाउदी, जरबेरा, ग्लेडियोलस, राजनीगंधा, गुलाब, गेंदा और कैला लिली की पौध सामग्री किसानों तक पहुंचाई जा रही है।
इस प्रशिक्षण में पुष्पों की संरक्षित खेती की तकनीक एवं रखरखाव, उत्तम किस्मों, शुष्क फूल, मौनपालन व अनुपयोगी फूलों का मूल्यवर्धन पर विस्तार से प्रदर्शन एवं व्याख्यान से लोगों को प्रशिक्षित किया गया। डॉ. राकेश कुमार सूद ने विभिन्न पंचायतों से आए
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किसानों से कहा कि बाजार की मांग के अनुरूप फूलों की खेती करनी चाहिए। उद्यान विभाग से विषय विशेषज्ञ डॉ. राजेश शर्मा, उद्यान विकास अधिकारी, डॉ. नेहा डोगरा, डॉ. शैलजा राणा व डॉ. आशीष शर्मा मौजूद रहे।
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इसके चलते सीएसआईआर-फ्लोरिकल्चर मिशन के तहत और उद्यान विभाग ने फूलों की खेती की व्यावसायिक एवं संरक्षित खेती के लिए लोगों को पांच दिन तक प्रशिक्षण दिया। संस्थान ने लिलियम, कैला लिली, गुलदाउदी, कारनेशन, बर्ड ऑफ पैराडाइज, एल्स्ट्रोमेरिया, ग्लैडियोलस एवं गेंदा की खेती पर लोगों को प्रशिक्षित किया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में बैजनाथ, पंचरुखी व भवारना ब्लॉक के करीब साठ प्रतिभागियों ने भाग लिया। संस्थान के निदेशक डॉ. संजय कुमार ने आशा व्यक्त की कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम लोगों के लिए बहुत ही उपयोगी सिद्ध होगा। प्रशिक्षण के संयोजक डॉ. भव्य भार्गव ने बताया कि फ्लोरिकल्चर मिशन के तहत कारनेशन, गुलदाउदी, जरबेरा, ग्लेडियोलस, राजनीगंधा, गुलाब, गेंदा और कैला लिली की पौध सामग्री किसानों तक पहुंचाई जा रही है।
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इस प्रशिक्षण में पुष्पों की संरक्षित खेती की तकनीक एवं रखरखाव, उत्तम किस्मों, शुष्क फूल, मौनपालन व अनुपयोगी फूलों का मूल्यवर्धन पर विस्तार से प्रदर्शन एवं व्याख्यान से लोगों को प्रशिक्षित किया गया। डॉ. राकेश कुमार सूद ने विभिन्न पंचायतों से आए
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किसानों से कहा कि बाजार की मांग के अनुरूप फूलों की खेती करनी चाहिए। उद्यान विभाग से विषय विशेषज्ञ डॉ. राजेश शर्मा, उद्यान विकास अधिकारी, डॉ. नेहा डोगरा, डॉ. शैलजा राणा व डॉ. आशीष शर्मा मौजूद रहे।