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26 वर्षों से सड़क का इंतजार कर रहे भलाड़ वासियों को फूटा गुस्सा
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ज्वालामुखी (कांगड़ा)। चंगर क्षेत्र की थिल पंचायत के भलाड़ खुर्द गांव के ग्रामीण 26 वर्षों बाद भी सड़क पक्की न होने से मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि कई सरकारें आई और गईं, लेकिन इस गांव की तस्वीर नहीं बदली।
सड़क की सुविधा न मिलने से गुस्साए ग्रामीणों ने रोष प्रदर्शन किया और सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द सड़क को पक्का किया जाए अन्यथा इस बार चुनाव का बहिष्कार करेंगे और किसी भी नेता को गांव में नहीं आने दिया जाएगा।
थिल पंचायत प्रधान किशोरी लाल ने बताया कि यह मार्ग 1996 में बना था, लेकिन उसके बाद किसी ने इसकी सुध नहीं ली। यह सड़क 800 मीटर पक्की होगी और दो किलोमीटर नई बनेगी। साथ ही कांगड़ा मार्ग से जुड़ेगी और चार-पांच गांवों को इस सड़क का फायदा होगा।
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इस गांव में लगभग 100 मतदाता हैं, जो कि सड़क सुविधा न मिलने पर चुनाव का बहिष्कार करेंगे। ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि उनके बच्चे ठोकरें खाते हुए इस कच्चे रास्ते से दूर पढ़ने जाते हैं। बारिश में सड़क पर जगह-जगह गड्ढे पड़ जाते हैं। हर वर्ष ग्रामीण स्वयं सड़क में मिट्टी डालकर इसे चलने लायक बनाते हैं, लेकिन बारिश के बाद मिट्टी बह जाती है और ग्रामीणों को फिर मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इस गांव में कोई नेता नहीं आता और न ही सड़क बनाने की कोई बात होती है। इस बार सड़क नहीं बनी तो सभी नेताओं की गांव में नो एंट्री होगी। इस मौके पर ग्रामीण किशोरी लाल, राजू, विक्रम कुमार, अशोक कुमार, निक्का, सुनील, बिमला देवी आदि सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे।
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सड़क की सुविधा न मिलने से गुस्साए ग्रामीणों ने रोष प्रदर्शन किया और सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द सड़क को पक्का किया जाए अन्यथा इस बार चुनाव का बहिष्कार करेंगे और किसी भी नेता को गांव में नहीं आने दिया जाएगा।
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थिल पंचायत प्रधान किशोरी लाल ने बताया कि यह मार्ग 1996 में बना था, लेकिन उसके बाद किसी ने इसकी सुध नहीं ली। यह सड़क 800 मीटर पक्की होगी और दो किलोमीटर नई बनेगी। साथ ही कांगड़ा मार्ग से जुड़ेगी और चार-पांच गांवों को इस सड़क का फायदा होगा।
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इस गांव में लगभग 100 मतदाता हैं, जो कि सड़क सुविधा न मिलने पर चुनाव का बहिष्कार करेंगे। ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि उनके बच्चे ठोकरें खाते हुए इस कच्चे रास्ते से दूर पढ़ने जाते हैं। बारिश में सड़क पर जगह-जगह गड्ढे पड़ जाते हैं। हर वर्ष ग्रामीण स्वयं सड़क में मिट्टी डालकर इसे चलने लायक बनाते हैं, लेकिन बारिश के बाद मिट्टी बह जाती है और ग्रामीणों को फिर मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इस गांव में कोई नेता नहीं आता और न ही सड़क बनाने की कोई बात होती है। इस बार सड़क नहीं बनी तो सभी नेताओं की गांव में नो एंट्री होगी। इस मौके पर ग्रामीण किशोरी लाल, राजू, विक्रम कुमार, अशोक कुमार, निक्का, सुनील, बिमला देवी आदि सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे।