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Kangra News: पौंग झील बनेगी ईको-टूरिज्म हब, केंद्र को भेजी डीपीआर
Sun, 20 Apr 2025 07:38 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sun, 20 Apr 2025 07:38 AM IST
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पौंग झील के मध्य स्थित रेंसर गढ़ी टापू। स्त्रोत: विभाग
बरियाल (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश पर्यटन और नागरिक उड्डयन विभाग ने पौंग वेटलैंड के ईको-टूरिज्म विकास के लिए 29 करोड़ रुपये की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) केंद्र को सौंपी है। डीपीआर मंजूरी मिलने पर रामसर साइट पौंग वेटलैंड को विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त ईको-टूरिज्म स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा।
यह वेटलैंड कांगड़ा जिले के जवाली, फतेहपुर, नूरपुर और देहरा क्षेत्रों में 307 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और प्रवासी पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल है। यह एक पक्षी अभयारण्य, रैंसर द्वीप, ऐतिहासिक बाथू-की-लडी मंदिरों और जल क्रीड़ा सुविधाओं का घर है, जो सर्दियों में प्रवासी पक्षियों को आकर्षित करती हैं। हालांकि पारिस्थितिक और सांस्कृतिक महत्व के बावजूद क्षेत्र में बुनियादी ढांचा विकसित नहीं हो सका है।
पर्यटन विभाग की एजेंसियों वॉयंट्स जेवी और आईडीईसीके के साथ तैयार की गई डीपीआर के अनुसार अब परियोजना के तहत नगरोटा सूरियां और खब्बल पंचायत में स्थायी इको-टूरिज्म सुविधाएं स्थापित की जाएंगी। नगरोटा सूरियां में 7.5 एकड़ की साइट पर टेंट वाले आवास, पार्किंग और पक्षी देखने का अनुभव विकसित किया जाएगा। वहीं, खब्बल पंचायत में 5.9 एकड़ क्षेत्र में प्रकृति शिविर स्थापित किया जाएगा, जिसमें बहुउद्देशीय हॉल, आउटडोर स्पेस और फूड कोर्ट जैसी सुविधाएं होंगी।
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पौंग वेटलैंड को प्रमुख इको-टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने के लिए तीन यूनिट मास्टर प्लान प्रस्तावित हैं। नगरोटा सूरियां के सुगनाड़ा और खब्बल क्षेत्रों में स्थायी इको-टूरिज्म सुविधाएं स्थापित की जाएंगी। खटियाड़ में जल क्रीड़ा और एक वेलनेस सेंटर होगा। वेटलैंड के देहरा क्षेत्र में भी इसी तरह की सुविधाएं की जाएंगी।
-विनय धीमान, जिला पर्यटन अधिकारी
पौंग वेटलैंड क्षेत्र में सड़क संपर्क को उन्नत करने की आवश्यकता है। देहरा-नगरोटा सूरियां-जवाली-राजा का तालाब मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग में परिवर्तित करने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। स्वदेश दर्शन-2 के तहत तैयार की गई डीपीआर को मंजूरी मिलती है तो पर्यटकों को सुविधाओं मिलेंगी, जिससे पर्यटक आकर्षित होंगे।
-डॉ. एचएल धीमान, राज्य गंतव्य प्रबंधन समिति
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यह वेटलैंड कांगड़ा जिले के जवाली, फतेहपुर, नूरपुर और देहरा क्षेत्रों में 307 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और प्रवासी पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल है। यह एक पक्षी अभयारण्य, रैंसर द्वीप, ऐतिहासिक बाथू-की-लडी मंदिरों और जल क्रीड़ा सुविधाओं का घर है, जो सर्दियों में प्रवासी पक्षियों को आकर्षित करती हैं। हालांकि पारिस्थितिक और सांस्कृतिक महत्व के बावजूद क्षेत्र में बुनियादी ढांचा विकसित नहीं हो सका है।
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पर्यटन विभाग की एजेंसियों वॉयंट्स जेवी और आईडीईसीके के साथ तैयार की गई डीपीआर के अनुसार अब परियोजना के तहत नगरोटा सूरियां और खब्बल पंचायत में स्थायी इको-टूरिज्म सुविधाएं स्थापित की जाएंगी। नगरोटा सूरियां में 7.5 एकड़ की साइट पर टेंट वाले आवास, पार्किंग और पक्षी देखने का अनुभव विकसित किया जाएगा। वहीं, खब्बल पंचायत में 5.9 एकड़ क्षेत्र में प्रकृति शिविर स्थापित किया जाएगा, जिसमें बहुउद्देशीय हॉल, आउटडोर स्पेस और फूड कोर्ट जैसी सुविधाएं होंगी।
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पौंग वेटलैंड को प्रमुख इको-टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने के लिए तीन यूनिट मास्टर प्लान प्रस्तावित हैं। नगरोटा सूरियां के सुगनाड़ा और खब्बल क्षेत्रों में स्थायी इको-टूरिज्म सुविधाएं स्थापित की जाएंगी। खटियाड़ में जल क्रीड़ा और एक वेलनेस सेंटर होगा। वेटलैंड के देहरा क्षेत्र में भी इसी तरह की सुविधाएं की जाएंगी।
-विनय धीमान, जिला पर्यटन अधिकारी
पौंग वेटलैंड क्षेत्र में सड़क संपर्क को उन्नत करने की आवश्यकता है। देहरा-नगरोटा सूरियां-जवाली-राजा का तालाब मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग में परिवर्तित करने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। स्वदेश दर्शन-2 के तहत तैयार की गई डीपीआर को मंजूरी मिलती है तो पर्यटकों को सुविधाओं मिलेंगी, जिससे पर्यटक आकर्षित होंगे।
-डॉ. एचएल धीमान, राज्य गंतव्य प्रबंधन समिति

पौंग झील के मध्य स्थित रेंसर गढ़ी टापू। स्त्रोत: विभाग