{"_id":"6ad68157d1f1ac525f006582","slug":"kangra-news-kangra-latest-news-kangra-local-news-kangra-hindi-news-kangra-amar-ujala-news-kangra-news-c-399-dsl1017-541176-2026-10-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kangra News: विशेषज्ञ बोले-खेलकूद से दूर, किताबें न पढ़ने और परिवार के साथ समय न बिताने से बिगड़ रही बच्चों की दिनचर्याहाथ में मोबाइल<bha>;<\/bha> सामने टीवी, बच्चों की नींद पर डिजिटल डाका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kangra News: विशेषज्ञ बोले-खेलकूद से दूर, किताबें न पढ़ने और परिवार के साथ समय न बिताने से बिगड़ रही बच्चों की दिनचर्याहाथ में मोबाइल<bha>;</bha> सामने टीवी, बच्चों की नींद पर डिजिटल डाका
विज्ञापन
धर्मशाला। रात को सोने से पहले मोबाइल और टीवी की लत बच्चों की आंखों से नींद छीन रही है, जिससे अगली सुबह थकान और चिड़चिड़ापन उनके व्यवहार का हिस्सा बन रहा है। टांडा मेडिकल कॉलेज के बाल हार्मोन रोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल गुप्ता के मुताबिक, सोने के समय स्क्रीन का अंधाधुंध इस्तेमाल बच्चों की नींद का चक्र बिगाड़ रहा है, जिसका सीधा असर उनकी पढ़ाई और शारीरिक विकास पर पड़ रहा है।
टांडा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के बाल हार्मोन रोग विशेषज्ञ एवं एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अतुल गुप्ता के अनुसार, बच्चों के बेहतर विकास के लिए माता-पिता को उनके स्क्रीन टाइम पर ध्यान देना चाहिए। बच्चों को मोबाइल में व्यस्त रखने के बजाय बाहर खेलने, किताबें पढ़ने और परिवार के साथ समय बिताने के लिए प्रोत्साहित करना जरूरी है। स्क्रीन का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल बच्चों की पढ़ाई, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता, भाषा विकास, नींद और व्यवहार पर असर डाल सकता है।
चिंता केवल स्क्रीन देखने में बिताए जाने वाले समय की नहीं है, बल्कि यह भी है कि इसके कारण बच्चे खेलकूद, बातचीत और सामाजिक मेलजोल जैसी जरूरी गतिविधियों से दूर हो सकते हैं। डिजिटल तकनीक पढ़ाई में मददगार है, लेकिन यह पारिवारिक बातचीत और शारीरिक गतिविधियों का विकल्प नहीं बन सकती।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि बातचीत करने, सवाल पूछने, कहानियां सुनने और दूसरे बच्चों के साथ खेलने से बच्चों की सीखने और अपनी बात व्यक्त करने की क्षमता विकसित होती है। लंबे समय तक स्क्रीन पर व्यस्त रहने से उन्हें नए शब्द सीखने और संवाद करने के अवसर कम मिल सकते हैं। वहीं, बार-बार वीडियो और गेम बदलने की आदत ध्यान केंद्रित करने में परेशानी पैदा कर सकती है।
ऐसे में माता-पिता को बच्चों के साथ नियमित बातचीत करनी चाहिए और उन्हें किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए। लंबे समय तक मोबाइल देखने से शारीरिक गतिविधियां कम हो सकती हैं, जिससे वजन बढ़ने का खतरा रहता है। सोने से पहले मोबाइल का इस्तेमाल नींद की दिनचर्या को भी प्रभावित कर सकता है। पर्याप्त नींद नहीं मिलने पर बच्चे अगले दिन थकान, चिड़चिड़ापन और पढ़ाई में ध्यान लगाने में परेशानी महसूस कर सकते हैं।
डॉ. अतुल गुप्ता के अनुसार, बच्चों के स्क्रीन टाइम और यौवनावस्था के विकास के बीच संभावित संबंध को लेकर शोध जारी हैं। हालांकि, अभी यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि अधिक स्क्रीन टाइम सीधे तौर पर समय से पहले यौवनावस्था शुरू होने का कारण बनता है। यदि बच्चे में उम्र से पहले शारीरिक बदलाव दिखाई दें, तो चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। ब्यूरो
विज्ञापन
टांडा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के बाल हार्मोन रोग विशेषज्ञ एवं एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अतुल गुप्ता के अनुसार, बच्चों के बेहतर विकास के लिए माता-पिता को उनके स्क्रीन टाइम पर ध्यान देना चाहिए। बच्चों को मोबाइल में व्यस्त रखने के बजाय बाहर खेलने, किताबें पढ़ने और परिवार के साथ समय बिताने के लिए प्रोत्साहित करना जरूरी है। स्क्रीन का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल बच्चों की पढ़ाई, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता, भाषा विकास, नींद और व्यवहार पर असर डाल सकता है।
विज्ञापन
चिंता केवल स्क्रीन देखने में बिताए जाने वाले समय की नहीं है, बल्कि यह भी है कि इसके कारण बच्चे खेलकूद, बातचीत और सामाजिक मेलजोल जैसी जरूरी गतिविधियों से दूर हो सकते हैं। डिजिटल तकनीक पढ़ाई में मददगार है, लेकिन यह पारिवारिक बातचीत और शारीरिक गतिविधियों का विकल्प नहीं बन सकती।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि बातचीत करने, सवाल पूछने, कहानियां सुनने और दूसरे बच्चों के साथ खेलने से बच्चों की सीखने और अपनी बात व्यक्त करने की क्षमता विकसित होती है। लंबे समय तक स्क्रीन पर व्यस्त रहने से उन्हें नए शब्द सीखने और संवाद करने के अवसर कम मिल सकते हैं। वहीं, बार-बार वीडियो और गेम बदलने की आदत ध्यान केंद्रित करने में परेशानी पैदा कर सकती है।
ऐसे में माता-पिता को बच्चों के साथ नियमित बातचीत करनी चाहिए और उन्हें किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए। लंबे समय तक मोबाइल देखने से शारीरिक गतिविधियां कम हो सकती हैं, जिससे वजन बढ़ने का खतरा रहता है। सोने से पहले मोबाइल का इस्तेमाल नींद की दिनचर्या को भी प्रभावित कर सकता है। पर्याप्त नींद नहीं मिलने पर बच्चे अगले दिन थकान, चिड़चिड़ापन और पढ़ाई में ध्यान लगाने में परेशानी महसूस कर सकते हैं।
डॉ. अतुल गुप्ता के अनुसार, बच्चों के स्क्रीन टाइम और यौवनावस्था के विकास के बीच संभावित संबंध को लेकर शोध जारी हैं। हालांकि, अभी यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि अधिक स्क्रीन टाइम सीधे तौर पर समय से पहले यौवनावस्था शुरू होने का कारण बनता है। यदि बच्चे में उम्र से पहले शारीरिक बदलाव दिखाई दें, तो चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। ब्यूरो