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Kangra News: किसानों के खेतों से बाजार तक पहुंचा देसी साग
Thu, 24 Sep 2026 01:54 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Thu, 24 Sep 2026 01:54 AM IST
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धर्मशाला के शिल्ला चौक में सब्जी और साग बेचते हुए किसान। अमर उजाला
धर्मशाला। मौसम में हल्की ठंडक की दस्तक के साथ ही क्षेत्र के किसानों की मेहनत रंग लाने लगी है। आसपास के ग्रामीण इलाकों में उगाई गई देसी हरी सब्जियों से बाजारों और सड़कों के किनारे रौनक बढ़ गई है। इस बार किसान ताजा उपज को आढ़तियों या मंडियों में ले जाने के बजाय मुख्य सड़कों के किनारे बैठकर सीधे ग्राहकों को बेच रहे हैं।
किसानों के पास परंपरागत सरसों के साग के अलावा कई तरह के दुर्लभ पहाड़ी व देसी साग उपलब्ध हैं। इनमें चरेरी, नानियरा, कुलफा, खोला और ललिहारा जैसी किस्में शामिल हैं। किसानों ने बताया कि उन्होंने यह फसल करीब 20 से 25 दिन पहले खेतों में लगाई थी, जो अब पूरी तरह तैयार होकर बिकने लगी है। दो-तीन दिन से इसकी बिक्री शुरू की गई है। स्थानीय ग्राहकों के साथ राहगीर भी इसे खूब पसंद कर रहे हैं।
साग की एक गुच्छी 30 रुपये में, जबकि दो गुच्छियां 50 रुपये में बेची जा रही हैं। किसान रोजाना 100 से अधिक गुच्छियां बेच रहे हैं। किसानों के अनुसार, खेतों में लगाया गया देसी पालक भी करीब एक महीने में तैयार होकर बाजार में पहुंच जाएगा।
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हमने यह फसल करीब 20 दिन पहले उगाई थी जो अब बिल्कुल तैयार है। बाजार में बिना खाद का ताजा साग देखते ही लोग हाथों-हाथ खरीद रहे हैं। -नेक चंद, किसान, निवासी ढगवार
यह पूरी तरह से प्राकृतिक और देसी साग है। इसमें किसी भी तरह के रासायनिक खाद या कीटनाशक का इस्तेमाल नहीं किया गया है। हम रोज सुबह खेतों से ताजा साग तोड़कर लाते हैं। -रजिंद्र सिंह, किसान, निवासी सहौड़ा
फिलहाल खेतों में सरसों और पारंपरिक किस्मों का साग तैयार हुआ है। बाजार में इस समय बिक रहा पालक पंजाब से आ रहा है। हमारे खेतों का देसी पालक एक महीने बाद तैयार होकर बाजार में आएगा। -सतीश कुमार, किसान, निवासी बगली
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किसानों के पास परंपरागत सरसों के साग के अलावा कई तरह के दुर्लभ पहाड़ी व देसी साग उपलब्ध हैं। इनमें चरेरी, नानियरा, कुलफा, खोला और ललिहारा जैसी किस्में शामिल हैं। किसानों ने बताया कि उन्होंने यह फसल करीब 20 से 25 दिन पहले खेतों में लगाई थी, जो अब पूरी तरह तैयार होकर बिकने लगी है। दो-तीन दिन से इसकी बिक्री शुरू की गई है। स्थानीय ग्राहकों के साथ राहगीर भी इसे खूब पसंद कर रहे हैं।
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साग की एक गुच्छी 30 रुपये में, जबकि दो गुच्छियां 50 रुपये में बेची जा रही हैं। किसान रोजाना 100 से अधिक गुच्छियां बेच रहे हैं। किसानों के अनुसार, खेतों में लगाया गया देसी पालक भी करीब एक महीने में तैयार होकर बाजार में पहुंच जाएगा।
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हमने यह फसल करीब 20 दिन पहले उगाई थी जो अब बिल्कुल तैयार है। बाजार में बिना खाद का ताजा साग देखते ही लोग हाथों-हाथ खरीद रहे हैं। -नेक चंद, किसान, निवासी ढगवार
यह पूरी तरह से प्राकृतिक और देसी साग है। इसमें किसी भी तरह के रासायनिक खाद या कीटनाशक का इस्तेमाल नहीं किया गया है। हम रोज सुबह खेतों से ताजा साग तोड़कर लाते हैं। -रजिंद्र सिंह, किसान, निवासी सहौड़ा
फिलहाल खेतों में सरसों और पारंपरिक किस्मों का साग तैयार हुआ है। बाजार में इस समय बिक रहा पालक पंजाब से आ रहा है। हमारे खेतों का देसी पालक एक महीने बाद तैयार होकर बाजार में आएगा। -सतीश कुमार, किसान, निवासी बगली

धर्मशाला के शिल्ला चौक में सब्जी और साग बेचते हुए किसान। अमर उजाला

धर्मशाला के शिल्ला चौक में सब्जी और साग बेचते हुए किसान। अमर उजाला

धर्मशाला के शिल्ला चौक में सब्जी और साग बेचते हुए किसान। अमर उजाला