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Kangra News: हिमाचल के सीड मैन... पटौला के बलवीर सैणी ने सहेजीं 70 दुर्लभ देसी किस्में, बनाया अपना बीज बैंक

Mon, 20 Apr 2026 08:14 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 20 Apr 2026 08:14 AM IST
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Himachal's Seed Man... Balveer Saini of Pataula has saved 70 rare indigenous varieties.
देसी बीज बैंक से तैयार चारों रंग के बैंगन को दिखाते हुए बलवीर सैणी। स्रोत: स्वयं
धर्मशाला। आज के दौर में हाइब्रिड बीजों के कारण पारंपरिक खेती की किस्में लुप्त हो रही हैं। मगर कांगड़ा जिला के पटौला गांव के प्रगतिशील किसान बलवीर सैणी ने एक नई मिसाल पेश की है। बलवीर सैणी ने अपने अथक प्रयासों से 70 देसी किस्मों का एक बीज बैंक तैयार किया है, जो प्राकृतिक खेती की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित हो रहा है।
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बलवीर सैणी ने कड़ी मेहनत से पारंपरिक और दुर्लभ किस्मों को संरक्षित किया है। उनके बैंक में टमाटर (3 किस्में), बैंगन (3 किस्में), भिंडी (3 किस्में), मटर (2 किस्में), और मूली (2 किस्में), फूलगोभी (1 किस्म), खीरा (1 किस्म), करेला (1 किस्म) और कियूं की दुर्लभ किस्म शामिल हैैं।
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विशेष रूप से उनके पास बैंगन की चार अलग-अलग किस्में (सफेद, काला, बैंगनी और हरा) मौजूद हैं, जिन्हें तैयार करने में 120 दिन का समय लगता है। इसके अलावा लाल भिंडी, फूलगोभी की अगेती किस्म, राई, मल्टी-कट धनिया और मिर्च की पांच अलग-अलग किस्में उनके बैंक की शोभा बढ़ा रही हैं।
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1,000 किसानों तक पहुंचाया लाभ

बलवीर सैणी का लक्ष्य महज बीज इकट्ठा करना ही नहीं है, बल्कि वह अब तक प्राकृतिक खेती से जुड़े 1,000 से अधिक किसानों को ये देसी बीज वितरित कर चुके हैं। उनका उद्देश्य है कि हर खेत में हमारी पारंपरिक और शुद्ध फसलें लहलहाएं। अपनी काबिलियत के दम पर बलवीर सैणी वर्तमान में हिमाचल सरकार की स्टेट सीड एंड ऑर्गेनिक प्रोड्यूस एजेंसी की गवर्निंग बॉडी के सदस्य भी हैं। वे सरकारी नीतियों के माध्यम से ऑर्गेनिक खेती को जमीनी स्तर पर बढ़ावा देने के लिए लगातार सक्रिय हैं।


बलवीर सैणी का यह प्रयास कृषि क्षेत्र के लिए एक उत्कृष्ट उदाहरण है। देसी बीजों का संरक्षण न केवल मिट्टी की सेहत के लिए जरूरी है, बल्कि यह प्राकृतिक खेती के प्रति किसानों को जागरूक करने में बड़ी भूमिका निभाएगा। विभाग प्रदेश में ऐसी पहलों का पूरा समर्थन करता है। -डॉ. राहुल कटोच, एडीए नॉर्थ जोन, हिमाचल प्रदेश
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