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ओपीएस को वित्तीय संकट का बहाना बनाना बंद करे सरकार : डॉ. संजीव
Fri, 17 Apr 2026 07:29 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Fri, 17 Apr 2026 07:29 AM IST
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जसूर / नूरपुर (कांगड़ा)। न्यू पेंशन स्कीम रिटायर्ड कर्मचारी अधिकारी महासंघ एवं दस वर्ष से कम सेवाकाल वाले सेवानिवृत्त कर्मचारी अधिकारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजीव गुलेरिया ने प्रदेश की वित्तीय स्थिति और पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को लेकर चल रही बहस पर कड़ा विरोध जताया है।
प्रेस वार्ता में उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी आर्थिक विफलताओं को छिपाने के लिए ओपीएस को गलत तरीके से जिम्मेदार ठहरा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नई पेंशन योजना के तहत सरकार को हर कर्मचारी के मूल वेतन का 14 प्रतिशत अंशदान देना पड़ता था, जबकि ओपीएस लागू होने के बाद यह वित्तीय भार समाप्त हो गया है, जिससे सरकार को प्रत्यक्ष नकद बचत हो रही है।
डॉ. गुलेरिया ने चेतावनी दी कि ओपीएस को ढाल बनाकर पेश करने से आम जनता में कर्मचारियों के प्रति गलत धारणा बन रही है। उन्होंने कहा कि पेंशन को मुफ्त की रेवड़ी बताना अनुचित है, क्योंकि यह कर्मचारियों का अधिकार है, जो उन्होंने वर्षों की सेवा के बाद अर्जित किया है। उन्होंने सरकार को सलाह दी कि वे पेंशन को दोष देने के बजाय वित्तीय अनुशासन पर ध्यान दे, बढ़ते कर्ज पर नियंत्रण करे, फिजूलखर्ची रोके और राजस्व के नए स्रोत विकसित करे, ताकि प्रदेश की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके। संवाद
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प्रेस वार्ता में उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी आर्थिक विफलताओं को छिपाने के लिए ओपीएस को गलत तरीके से जिम्मेदार ठहरा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नई पेंशन योजना के तहत सरकार को हर कर्मचारी के मूल वेतन का 14 प्रतिशत अंशदान देना पड़ता था, जबकि ओपीएस लागू होने के बाद यह वित्तीय भार समाप्त हो गया है, जिससे सरकार को प्रत्यक्ष नकद बचत हो रही है।
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डॉ. गुलेरिया ने चेतावनी दी कि ओपीएस को ढाल बनाकर पेश करने से आम जनता में कर्मचारियों के प्रति गलत धारणा बन रही है। उन्होंने कहा कि पेंशन को मुफ्त की रेवड़ी बताना अनुचित है, क्योंकि यह कर्मचारियों का अधिकार है, जो उन्होंने वर्षों की सेवा के बाद अर्जित किया है। उन्होंने सरकार को सलाह दी कि वे पेंशन को दोष देने के बजाय वित्तीय अनुशासन पर ध्यान दे, बढ़ते कर्ज पर नियंत्रण करे, फिजूलखर्ची रोके और राजस्व के नए स्रोत विकसित करे, ताकि प्रदेश की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके। संवाद
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