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Kangra News: सीरा बेचकर आत्मनिर्भर बनीं कोटली की गीता
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मंडी। प्रतिभा, कड़ी मेहनत और कुछ नया करने का जज्बा हो तो परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, सफलता की नई इबारत लिखी जा सकती है। मंडी के कोटली क्षेत्र की रहने वाली गीता ने अपनी मेहनत से इस बात को सच साबित कर दिखाया है। एक साधारण और गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाली गीता आज अपने हुनर के दम पर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनकर महिला सशक्तीकरण की मिसाल बन चुकी हैं।
गीता के पति मुकेश कुमार सब्जी बेचने का काम करते हैं जबकि गीता घर पर अचार और तेजपत्ता जैसी सामग्री तैयार करती थीं। अपनी आजीविका को संबल देने के लिए वह जय मां नैणा स्वयं सहायता समूह कोटली से जुड़ीं। इसके बाद उन्होंने मंडी के सेरी मंच पर लगने वाले सप्ताह के दो-दिवसीय ग्रामीण हाट में स्टॉल लगाना शुरू किया।
शुरुआत में वे केवल सिड्डू बेचती थीं लेकिन अन्य स्टॉल होने के कारण बिक्री सीमित रहती थी। कारोबार को नया आयाम देने के लिए गीता ने पारंपरिक हिमाचली व्यंजन सीरा को एक नए और खास अंदाज में परोसने का फैसला किया। उन्होंने गेहूं से तैयार होने वाले पारंपरिक सीरे में शक्कर, शुद्ध देशी घी और मेवे (ड्राई फ्रूट्स) मिलाकर उसे नया रूप दिया। लोगों को उनका यह नया स्वाद इतना भाया कि रोजाना हजारों रुपये की बिक्री होने लगी।
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गीता की इस कलात्मकता और स्वाद की बदौलत अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव मंडी के दौरान उन्हें सरस मेले में स्टॉल आवंटित किया गया। मेले में केवल 10 दिनों के भीतर गीता ने लगभग एक क्विंटल सीरा बेचकर 1.50 लाख रुपये की रिकॉर्ड कमाई की। वर्तमान में सेरी मंच पर गीता के हाथों का बना सीरा लोकप्रिय हो चुका है और दूर-दूर से लोग इसे खाने के लिए आते हैं। अब वे दो दिन के ग्रामीण हाट में ही करीब 15 किलो सीरा बेचकर 10,000 रुपये तक की कमाई कर लेती हैं।
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गीता के पति मुकेश कुमार सब्जी बेचने का काम करते हैं जबकि गीता घर पर अचार और तेजपत्ता जैसी सामग्री तैयार करती थीं। अपनी आजीविका को संबल देने के लिए वह जय मां नैणा स्वयं सहायता समूह कोटली से जुड़ीं। इसके बाद उन्होंने मंडी के सेरी मंच पर लगने वाले सप्ताह के दो-दिवसीय ग्रामीण हाट में स्टॉल लगाना शुरू किया।
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शुरुआत में वे केवल सिड्डू बेचती थीं लेकिन अन्य स्टॉल होने के कारण बिक्री सीमित रहती थी। कारोबार को नया आयाम देने के लिए गीता ने पारंपरिक हिमाचली व्यंजन सीरा को एक नए और खास अंदाज में परोसने का फैसला किया। उन्होंने गेहूं से तैयार होने वाले पारंपरिक सीरे में शक्कर, शुद्ध देशी घी और मेवे (ड्राई फ्रूट्स) मिलाकर उसे नया रूप दिया। लोगों को उनका यह नया स्वाद इतना भाया कि रोजाना हजारों रुपये की बिक्री होने लगी।
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गीता की इस कलात्मकता और स्वाद की बदौलत अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव मंडी के दौरान उन्हें सरस मेले में स्टॉल आवंटित किया गया। मेले में केवल 10 दिनों के भीतर गीता ने लगभग एक क्विंटल सीरा बेचकर 1.50 लाख रुपये की रिकॉर्ड कमाई की। वर्तमान में सेरी मंच पर गीता के हाथों का बना सीरा लोकप्रिय हो चुका है और दूर-दूर से लोग इसे खाने के लिए आते हैं। अब वे दो दिन के ग्रामीण हाट में ही करीब 15 किलो सीरा बेचकर 10,000 रुपये तक की कमाई कर लेती हैं।