फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Kangra News ›   Fourlane affected due to not getting proper compensation

मांगे न मानी तो भवनों को नहीं लगाने देंगे हाथ

Fri, 25 Mar 2022 09:00 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 25 Mar 2022 09:00 PM IST
विज्ञापन
Fourlane affected due to not getting proper compensation
नूरपुर के मिनी सचिवालय में अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन करते फोरलेन प्रभावित - फोटो : Kangra
नूरपुर (कांगड़ा)। फोरलेन संघर्ष समिति नूरपुर ने शुक्रवार को मिनी सचिवालय परिसर में भूमि के बदले उचित मुआवजा न मिलने के विरोध में धरना-प्रदर्शन किया। इसके बाद सदस्यों ने एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। प्रभावितों ने साफ कर दिया है कि अगर उनकी मांगें न मानी गईं तो भवनों को हाथ भी नहीं लगाने देंगे।
विज्ञापन

ज्ञापन के माध्यम से प्रभावितों ने कहा कि कंडवाल से सियूणी तक प्रथम चरण में प्रभावितों को मुआवजे की राशि नाममात्र दी जा रही है, जिसका फोरलेन प्रभावित विरोध करते हैं। मुआवजे में फोरलेन एक्ट 2013 के प्रावधानों की कहीं भी पालना नहीं की गई है। प्रभावितों का कहना है कि प्रभावितों की समस्याओं के निवारण के लिए बनाई गई कैबिनेट कमेटी ने भी उनकी कोई सुध नहीं ली। ज्ञापन के माध्यम से प्रभावितों ने कहा कि भवनों के अधिग्रहण को 2020 की लागत के आधार पर लागू करके उसमें भी 35 प्रतिशत कटौती की जा रही है, जबकि 24-2-22 को एसडीएम एवं एनएचएआई के पदाधिकारियों के साथ हुई बैठक में आश्वस्त किया गया था कि स्ट्रक्चर में कोई कटौती नहीं की जाएगी। इसके बावजूद जब अवार्ड की नकल निकाली गई, तो उसमें 35 प्रतिशत की कटौती की गई थी, जो प्रभावितों को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं है।
विज्ञापन

यह हैं प्रमुख मांगें
ज्ञापन के माध्यम से प्रभावितों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि भूमि मुआवजे के तीन विभिन्न अवार्ड दिए गए है। इनमें आखिरी अवार्ड को आधार मानकर आर्बिट्रेटर के पास अपील करने से पहले तत्कालीन जिलाधीश कांगड़ा की ओर से घोषित 2018 के अनुसार मुआवजा दिया जाए। भवनों की लागत का आधार वर्ष 2022 हो तथा जिन प्रभावितों को प्रस्तावित मुआवजा दिया जाना है, उसमें कटौती न की जाए। मुआवजा पूरे भवन का दिया जाए, चाहे उसका आंशिक भाग ही अधिग्रहीत किया जा रहा हो। कारोबारी परिसरों के लिए फोरलेन एक्ट 2013 के तहत क्षतिपूर्ति व पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन के प्रावधानों को लागू किया जाए। भवनों के मुआवजे में 2018 में तत्कालीन जिलाधीश की ओर से सेटल किए गए 59 हजार, 53 हजार व 48 हजार प्रति स्क्वेयर मीटर रेटों को वर्तमान लागत के अनुसार बढ़ाकर लागू किया जाए। घोषित अवार्ड की तिथि से भुगतान किए जाने की तिथि के बीच की अवधि का ब्याज दिया जाए, जबकि तीसरा अवार्ड 6 मास पहले किया गया, परंतु मार्च के आखिरी सप्ताह तक राशि खाते में नहीं डाली गई। यदि उपमंडल स्तर पर कमेटी कोई फैसला नहीं लेती, तो मजबूरन प्रभावित पांच अप्रैल के बाद सख्त फैसले लेने को मजबूर होंगे। प्रभावितों ने कहा कि यदि सरकार तथा प्रशासन ने मांगों पर अमल नहीं किया तो प्रभावित अपने भवनों को हाथ नहीं लगाने देंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed