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Kangra News: बैंबू हट्स विवाद में वन विभाग को झटका, फर्म को मिलेंगे 68 लाख

Thu, 09 Apr 2026 10:07 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 09 Apr 2026 10:07 AM IST
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Forest department suffers setback in bamboo huts dispute, firm to get Rs 68 lakh
धर्मशाला। पर्यटन नगरी धर्मशाला में बैंबू हट्स बनाने वाली एक निजी फर्म के साथ चल रहे भुगतान विवाद में वन विभाग को मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) में बड़ा झटका लगा है। मध्यस्थ ने पालमपुर निवासी याचिकाकर्ता तुषार गोयल के दावे को स्वीकार करते हुए विभाग को करीब 68 लाख रुपये का भुगतान करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, विभाग द्वारा प्रस्तुत प्रति-दावा याचिका को सिरे से खारिज कर दिया गया है।
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यह विवाद धर्मशाला के कालापुल स्थित वन विश्रामगृह परिसर में वर्ष 2021-22 में निर्मित बैंबू हट्स से जुड़ा है। स्मार्ट सिटी धर्मशाला प्रोजेक्ट के तहत इन हट्स के निर्माण के लिए वन विभाग को बजट जारी हुआ था। टेंडर की शर्तों के तहत काम पूरा होने पर विभाग ने फर्म को 37.50 लाख रुपये का भुगतान तो कर दिया, लेकिन शेष राशि पर रोक लगा दी।
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निर्माण कार्य पूरा होने के बाद जब फर्म ने हट्स विभाग को सौंपने चाहे तो वन विभाग ने स्मार्ट सिटी के अधिकारियों से निरीक्षण और अन्य तकनीकी औपचारिकताएं पूरी करने की नई शर्तें सामने रख दीं। भुगतान अटकता देख संबंधित फर्म ने आर्बिट्रेशन का रास्ता अपनाया।
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6 अप्रैल 2026 को शिमला में सुनाए गए विस्तृत आदेश के अनुसार विभाग को विभिन्न मदों में भुगतान करना होगा। याचिकाकर्ता को मूल कार्य के लिए 15,51,277 रुपये दिए जाएंगे। इस राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज (कार्य शुरू होने से लेकर भुगतान तक) देय होगा। निर्माण के दौरान किए गए अतिरिक्त कार्यों के लिए 37,47,267 रुपये (जीएसटी सहित) का भुगतान करने के आदेश दिए गए हैं। इस पर भी 9 प्रतिशत ब्याज लगेगा।

याचिकाकर्ता को जीएसटी मद में 2,69,556 रुपये वापस करने होंगे। साथ ही मध्यस्थ शुल्क, अधिवक्ता और कार्यवाही के खर्च के रूप में कुल 3,88,071 रुपये भी विभाग को भरने होंगे। फर्म द्वारा जमा की गई अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट (ईएमडी) राशि भी ब्याज सहित लौटानी होगी। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि विभाग को निर्णय की तिथि से छह माह के भीतर इन सभी देय राशियों का भुगतान करना होगा। भुगतान न करने की स्थिति में ब्याज की दर 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत वार्षिक कर दी जाएगी।
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