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पर्यटन और वन विभाग की कारगुजारी के बीच फंसा ट्यूलिप गार्डन

Sun, 19 Sep 2021 08:35 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 19 Sep 2021 08:35 PM IST
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For the work of tourism and forest department
धर्मशाला। पर्यटन नगरी धर्मशाला के नरवाणा में बना ट्यूलिप गार्डन पर्यटन
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विभाग और वन विभाग की कारगुजारी के बीच उलझ कर रह गया है। पर्यटन विभाग
अपनी तरफ से ट्यूलिप गार्डन को वन विभाग को सौंपने की तैयारी में है।
हालांकि अभी भी कई खामियां होने के कारण वन विभाग इसे लेने के लिए हामी
नहीं भर रहा है। सात करोड़ 60 लाख रुपये की लागत से बना यह ट्यूलिप गार्डन
रंग-बिरंगे फूलों के बजाय अब अनदेखी के कारण घास और झाड़ियों से भरा पड़ा
है। इस कारण वन विभाग के अधिकारी इस गार्डन को लेने से इंकार कर रहे हैं।
सात करोड़ 60 लाख रुपये खर्च होने के बाद भी गार्डन अपने मालिकों की राह
ताक रहा है। अगर यह ट्यूलिप गार्डन शुरू हो जाता है, तो इसी बहाने
धर्मशाला आने वाले पर्यटकों के लिए एक खूबसूरत डेस्टिनेशन तैयार हो जाएगी। साथ ही नरवाणा पंचायत में भी रोजगार के अवसर बढे़ंगे। वहीं, ट्यूलिप गार्डन शुरू होने से पर्यटन नगरी के विकास को नए पंख लगेंगे।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2018 में इस ट्यूलिप गार्डन के निर्माण का काम
शुरू हो गया था। 2020 के अंत में इसका कार्य पूरा हो गया था। चार
हेक्टेयर में फैले इस गार्डन ने मौसमी फूल और फलों के पौधे भी लगाए गए
हैं। साथ ही बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए कई सुविधाएं इस गार्डन में
उपलब्ध करवाई गई हैं। इससे निश्चित तौर पर पर्यटक इसकी खूबसूरती की ओर
आकर्षित होंगे। बता दें कि कांग्रेस कार्यकाल में पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा ने इस गार्डन को बनाने का सपना देखा था और इसे धरातल पर उतारने की पहल की थी। मगर सरकार बदलते ही इसकी देखभाल और साफ-सफाई ठंडे बस्ते में पड़ गई। न तो इस पार्क की सुध मौजूदा सरकार ने ली और न ही पर्यटन विभाग ने। न तो ट्यूलिप गार्डन में देखरेख करने वाला कोई है और न ही कार्य
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करने वाला। गार्डन के मुख्य गेट पर ताला लटका हुआ है, जो सरकार और विभाग
की लापरवाही दर्शाता है। कुल मिलाकर सरकार ने इस गार्डन को रामभरोसे
छोड़ दिया है। अगर यह पार्क शुरू हो जाता है, तो इससे सरकार की आय के साथ
पर्यटन कारोबार की आय में भी बढ़ोतरी होगी।
50 वाहनों के लिए पार्किंग की है व्यवस्था
ट्यूलिप गार्डन में पर्यटकों को अपने वाहन खड़े करने के लिए परेशान न
होना पड़े, इसके लिए विभाग की ओर से गार्डन के मुख्य गेट के पास 50
वाहनों की पार्किंग बनाई गई है। इस पार्किंग में छोटे वाहन और दोपहिया
वाहन खड़े हो सकते हैं।
गार्डन के अंदर बनाए गए हैं तीन शौचालय
गार्डन में तीन अलग-अलग स्थानों पर तीन प्रकार से शौचालयों का निर्माण
किया गया है, ताकि पर्यटकों को शौचालय जाने के लिए लंबा सफर न करना पड़े।
हर शौचालय में पुरुषों, महिलाओं और दिव्यांग लोगों के लिए अलग व्यवस्था की गई
है।
गार्डन में बना है इंटरप्रिटेशन सेंटर
वन विभाग की मांग के हिसाब से गार्डन में एक इंटरप्रिटेशन सेंटर भी बनाया
गया है। यहां विभाग के अधिकारी बैठ सकते हैं। इसके अलावा पर्यटक वहां पर
एकांत में पढ़ाई भी कर सकते हैं। यह सेंटर गार्डन के मध्य में स्थित है।
रेस्तरां में मिलेगी खाने-पीने की बेहतर व्यवस्था
ट्यूलिप गार्डन के भीतर बने रेस्तरां में बाहर से आने वाने लोगों और
पर्यटकों के लिए खाने-पीने की व्यवस्था का भी पूरा ध्यान रखा गया है।
रेस्तरां में पर्यटकों को खाने के लिए पकवान बनाए जाएंग। ये पहाड़ी पकवान आकर्षण का
विशेष केंद्र बनेंगे।
पार्क के अंदर पाच केंद्रों पर पर्यटक कर सकेंगे खरीदारी
गार्डन में अलग-अगल स्थानों पर पांच दुकानों का भी निर्माण किया गया है।
यहां पर्यटक खदीदारी कर सकते हैं। इन दुकानों से वन विभाग को भी काफी
फायदा होगा और उनकी आय में भी बढ़ोतरी होगी। यहां से होने वाली कमाई से
विभाग इसका संचालन बेहतर ढंग से कर पाएगा।
बारिश से बचाएगा रेन शेल्टर
बारिश के दौरान पर्यटकों को भीगना न पड़े, इसके लिए ट्यूलिप गार्डन में
पर्यटकों की सुविधा के लिए रेन शेल्टर का भी प्रावधान है। पर्यटक वहां
तेज धूप के दौरान भी आराम कर सकते हैं।
मौसमी फूलों के लिए बनाई है छत
पार्क के अंदर मौसमी फूलों के लिए छत बनाई गई है। यहां कई किस्मों के
आकर्षक फूल लगाए जाएंगे। वहां पर्यटक जाकर फूलों को निहार कर खुद को
तरोताजा कर सकेंगे। इसके अलावा यहां फोटो खिंचवा कर उम्र भर के लिए इस
पार्क को यादों को संजो सकेंगे।
केयर टेकर के लिए है रहने की व्यवस्था
पार्क की देखभाल करने वालों के लिए भी ट्यूलिप गार्डन में ही रहने का
प्रावधान किया गया है। देखभाल करने वाले दिन-रात गार्डन में ही रहेंगे और
रात को भी गार्डन की रखवाली करेंगे। उनका रहने और खाने का प्रबंध वन विभाग
की ओर से किया जाएगा।
एक किलोमीटर का होगा वॉकिंग ट्रेल
पार्क के अंदर घूमने-फिरने के लिए एक किलोमीटर लंबा वॉकिंग ट्रेल बनाया
गया है। पूरे रास्ते में इंटरलॉक टाइलें बिछाई गई हैं। वहीं, रास्ते के
दोनों तरफ कई स्थानों में फूल लगाए गए हैं, जो इस रास्ते की सुंदरता
बढ़ाते हैं। इस रास्ते पर पैदल चलकर लोग अपनों के साथ समय बिता सकते हैं।
यह रास्ता एक छोर से दूसरे छोर तक बनाया गया है।
फूलों को पानी देने के लिए बने हैं दो बड़े वाटर टैंक
पार्क के अंदर लगे फूलों को पानी की दिक्कत न हो, इसके लिए गार्डन में दो
बड़े वाटर टैंक बनाए गए हैं। इस दोनों टैंकों में तीन से चार लाख लीटर तक
पानी आ सकता है। इन टैंकों का मुख्य उद्देश्य गर्मियों के दिनों में
फूलों के लिए पर्याप्त पानी मुहैया करवाना है।
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मुख्य द्वार है आकर्षण का केंद्र
ट्यूलिप गार्डन का मुख्यद्वार भी आकर्षण का केंद्र है। यह द्वार लकड़ी
और स्लेट से बनाया गया है। इससे इसकी सुंदरता पर चार चांद लगते हैं। मुख्य
सड़क के साथ में ही बना बड़ा गेट दूर से ही नजर आ जाता है। इस गेट की
खासियत इस पर लगे स्थानीय स्लेट हैं, जो क्षेत्र की एक पहचान के रूप में
हैं।
हर जगह हैं बच्चों के लिए झूले
पार्क में बच्चों के मनोरंजन के लिए कई स्थानों पर विभिन्न प्रकार के
झूले लगाए गए हैं। इन झूलों में बच्चे खेलकूद कर अपना समय व्यतीत कर
सकेंगे। पूरे पार्क में दर्जनों झूले बच्चों के मनोरंजन के लिए कारगर
साबित होंगे। मगर इस समय देखभाल न होने के कारण झूलों के आसपास लंबी घास
और झाड़ियां उग आई हैं।
रात को भी लाइटों से जगमगाएगा पार्क
ट्यूलिप गार्डन में पर्यटक रात के समय भी अपना समय व्यतीत कर सकेंगे,
क्योंकि पूरे पार्क में दर्जनों बड़ी लाइटें लगाई गई हैं। इससे रात के
समय भी पार्क पूरी तरह से जगमगाएगा। ये सभी लाइटें पर्यटन विभाग की ओर से
लगाई गई हैं। ये बड़ी लाइटें देखने में काफी सुंदर हैं। इन लाइटों पर
करीब 70 लाख रुपये खर्च किए गए हैं।
आसपास के क्षेत्र को मिलेगी पहचान
ट्यूलिप गार्डन शुरू होने से क्षेत्र के लोगों को रोजगार मिलेगा और साथ
ही उनके क्षेत्र की पहचान भी बनेगी। बता दें कि स्लेट गोदाम बंद होने के
कारण इस क्षेत्र की अपनी पहचान खत्म हो गई है।
साथ लगते कैंट एरिया से मजबूत होगी सुरक्षा दीवार
ट्यूलिप गार्डन के साथ में सेना का एरिया होने के कारण भी सुरक्षा
कड़ी होगी। लोग बिना डरे क्षेत्र में शाम के समय भी सैर कर सकेंगे। वहीं,
सेना के एरिया में भारत का बड़ा झंडा होने के कारण भी यह क्षेत्र मशहूर
है।
वन विभाग बनाएगा ठहरने के लिए हट्स
जानकारी के अनुसार वन विभाग ट्यूलिप गार्डन को अपने कब्जे में लेने के बाद अंदर पर्यटकों को ठहरने के लिए हट्स बनाएगा। पर्यटक रात को भी हट्स में ठहर सकते हैं।
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ट्यूलिप गार्डन से पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा : पृथी पाल सिंह
पर्यटन नगरी धर्मशाला के नरवाणा में सात करोड़ 60 लाख रुपये की लागत से
बने इस ट्यूलिप गार्डन से क्षेत्र में पर्यटन कारोबार को बढ़ावा मिलेगा। चार हेक्टेयर में बने इस पार्क में कई प्रकार की सुविधाएं हैं, जिससे लोग इसकी ओर आकर्षित होंगे। इस समय यह गार्डन पूरी तरह से बनकर तैयार है और इस पार्क को वन विभाग धर्मशाला को सौंप दिया जाएगा। जो इसकी
देखभाल के साथ रखरखाव भी करेंगे। - पृथी पाल सिंह, पर्यटन अधिकारी,
कांगड़ा।
2018 में शुरू निर्माण कार्य 2020 में खत्म हुआ : गौरव ठाकुर
इस पार्क को बनाने का कार्य वर्ष 2018 में शुरू हो गया था और 2020 के अंत
तक कार्य पूरा कर दिया गया था। पार्क चार हेक्टेयर के एरिया में फैला हुआ
है। इस पार्क में रेस्तरां के साथ-साथ बच्चों के लिए कई झूले भी स्थापित
किए गए हैं। पार्क में बुजुर्ग और अन्य लोगों को टहलने के लिए एक
किलोमीटर का रास्ता भी बनाया गया है। इसमें टाइल बिछाई गई हैं। - गौरव
ठाकुर, कनिष्ठ अभियंता, पर्यटन विभाग, जिला कांगड़ा
निर्माण कार्य पूरा होने पर ही लेंगे पार्क: संजीव शर्मा
जब ट्यूलिप गार्डन पूरी तरह से तैयार हो जाएगा, उसके बाद ही विभाग इसे
चलाने के लिए अपने पास लेगा। मौजूदा समय में पार्क में कई खामियां हैं।
इन पर काम करना बाकी है। पार्क को चलाने के लिए एंट्री फीस रखी जाएगी।
इससे की विभाग के आमदनी बढ़ेगी और पार्क का रखरखाव करने में आसानी होगी।
पार्क की खामियों के बारे में पर्यटन विभाग को अवगत करवा दिया गया है।
जैसे ही पार्क पूरी तरह तैयार होगा, वन विभाग इसे अपने कब्जे में ले लेगा। -संजीव शर्मा, वन मंडल अधिकारी, धर्मशाला।
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