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बिजली बोर्ड यूनियन ने खोला मांगों का पिटारा
ब्यूरो/अमर उजाला, कांगड़ा
Updated Wed, 02 Dec 2015 11:52 PM IST
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नूरपुर (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत कर्मचारी यूनियन के नूरपुर जोन की एक अहम बैठक बुधवार को यूनियन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष पवन मोहल की अध्यक्षता में बौड़ स्थित विश्राम गृह में संपन्न हुई। इसमें उपस्थित यूनियन के पदाधिकारियों ने कर्मचारियों को पदोन्नति पर मिलने वाली ग्रेड पे पर दो साल की बार लगाने पर निगम प्रबंधन के खिलाफ गहरा रोष जताते हुए इसे सरासर कर्मचारी वर्ग के साथ खिलवाड़ बताया है।
यूनियन नेता पवन मोहल ने कहा कि कई कर्मचारी पदोन्नति पर मिलने वाली ग्रेड पे के बिना ही सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार से इस दो साल की बार को तुरंत प्रभाव से हटाने तथा मृतक कर्मचारियों के आश्रितों को नौकरी प्रदान करने की वकालत की। साथ ही मानवरहित बिजली घरों में स्टाफ उपलब्ध करवाने और सर्कल स्तर पर कर्मचारियों की सर्विस बुक की वेटिंग को बोर्ड स्तर पर करवाने की मांग उठाई।
8 अक्तूबर 2013 में यूनियन के शिमला में हुए सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने बिजली बोर्ड में हर वर्ष 677 पद भरने की घोषणा की थी, लेकिन मुख्यमंत्री की उक्त घोषणा के करीब तीन साल बीत जाने के बाद भी प्रबंधक वर्ग पूर्ण रूप से पदों को भरने में नाकाम रहा है। जबकि, बोर्ड में कर्मचारियों की संख्या 43 हजार से घटकर मात्र 19 हजार तक रह गई है और कर्मचारी आए दिन काम के बोझ के चलते दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं। यूनियन ने अनुबंध पर कार्यरत पांच साल का कार्यकाल पूरा कर चुके कर्मचारियों को स्थायी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि बिजली बोर्ड में ज्यादातर कार्य ठेकेदारों के माध्यम से करवाए जा रहे हैं, जिससे कार्य में गुणवत्ता की कमी आ रही है। ठेकेदारी प्रथा को बंद करके सभी कार्य विभाग के माध्यम से करवाने की मांग उठाई। बैक में केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य बुद्धि सिंह, चितरंजन, नूरपुर यूनिट के प्रधान मान सिंह, गंगथ यूनिट के रछपाल सिंह, गनोह से रमेश धीमान, 220 केवी स्टेशन से जोंगिद्र सिंह, यूनिट सचिव अरुण कुमार, सतीश कुमार, वरिष्ठ उपप्रधान मोहिंद्र सिंह सहित कई अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
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यूनियन नेता पवन मोहल ने कहा कि कई कर्मचारी पदोन्नति पर मिलने वाली ग्रेड पे के बिना ही सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार से इस दो साल की बार को तुरंत प्रभाव से हटाने तथा मृतक कर्मचारियों के आश्रितों को नौकरी प्रदान करने की वकालत की। साथ ही मानवरहित बिजली घरों में स्टाफ उपलब्ध करवाने और सर्कल स्तर पर कर्मचारियों की सर्विस बुक की वेटिंग को बोर्ड स्तर पर करवाने की मांग उठाई।
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8 अक्तूबर 2013 में यूनियन के शिमला में हुए सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने बिजली बोर्ड में हर वर्ष 677 पद भरने की घोषणा की थी, लेकिन मुख्यमंत्री की उक्त घोषणा के करीब तीन साल बीत जाने के बाद भी प्रबंधक वर्ग पूर्ण रूप से पदों को भरने में नाकाम रहा है। जबकि, बोर्ड में कर्मचारियों की संख्या 43 हजार से घटकर मात्र 19 हजार तक रह गई है और कर्मचारी आए दिन काम के बोझ के चलते दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं। यूनियन ने अनुबंध पर कार्यरत पांच साल का कार्यकाल पूरा कर चुके कर्मचारियों को स्थायी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि बिजली बोर्ड में ज्यादातर कार्य ठेकेदारों के माध्यम से करवाए जा रहे हैं, जिससे कार्य में गुणवत्ता की कमी आ रही है। ठेकेदारी प्रथा को बंद करके सभी कार्य विभाग के माध्यम से करवाने की मांग उठाई। बैक में केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य बुद्धि सिंह, चितरंजन, नूरपुर यूनिट के प्रधान मान सिंह, गंगथ यूनिट के रछपाल सिंह, गनोह से रमेश धीमान, 220 केवी स्टेशन से जोंगिद्र सिंह, यूनिट सचिव अरुण कुमार, सतीश कुमार, वरिष्ठ उपप्रधान मोहिंद्र सिंह सहित कई अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
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