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चुनाव के बहिष्कार के बाद अधर में लटके 12 हजार लोग
ब्यूरो/अमर उजाला, कांगड़ा
Updated Wed, 13 Jan 2016 06:47 PM IST
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योल (कांगड़ा) । छावनी बोर्ड योल के चुनाव के बहिष्कार का एक वर्ष पूरा होने पर भी क्षेत्र के बारह हजार लोगों की स्थिति न इधर की और न ही उधर की रही है। ज्ञात रहे कि छावनी क्षेत्र के लोगों ने आज के ही दिन छावनी बोर्ड के चुनाव का बहिष्कार कर पंचायती राज की मांग के आंदोलन को गति दी थी। वर्तमान में न तो लोगों का पंचायती राज का सपना पूरा हो पाया ओर न ही छावनी बोर्ड के चुनाव। इससे छावनी बोर्ड के अंतर्गत सात वार्डों में कोई सदस्य न होने का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। कई सामाजिक सस्थाओं ने पंचायती राज की स्थापना के लिए काफी जद्दोजहद की लेकिन अभी तक कोई परिणाम सामने नहीं आया।
पिछले विधानसभा चुनावों में स्थानीय नेताओं ने छावनी वासियों को पंचायती राज के बड़े -2 वायदे किए थे, जबकि पूरे हिमाचल में पंचायत चुनाव संपन्न हो गए हैं और छावनी क्षेत्र की जनता अपने को ठगा सा महसूस कर रही हैं। दूसरी ओर छावनी प्रशासन पांच जून दो हजार सोलह तक बिना बोर्ड सदस्यों के काम करने के लिए स्वतंत्र हैं। चुनाव हो या न हों प्रशासनिक कार्यों पर कोई असर नहीं पड़ता और न ही छावनी प्रशासन को।
छावनी चिकित्सालय में रैबीज के टीके उपलब्ध न होना, स्ट्रीट लाइटों का खराब होना, पीने के पानी की समस्या इस के ताजा उदाहरण हैं। बहरहाल केंद्र व राज्य सरकार को छावनी वासियों की पंचायती राज संबंधी मांग पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
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पिछले विधानसभा चुनावों में स्थानीय नेताओं ने छावनी वासियों को पंचायती राज के बड़े -2 वायदे किए थे, जबकि पूरे हिमाचल में पंचायत चुनाव संपन्न हो गए हैं और छावनी क्षेत्र की जनता अपने को ठगा सा महसूस कर रही हैं। दूसरी ओर छावनी प्रशासन पांच जून दो हजार सोलह तक बिना बोर्ड सदस्यों के काम करने के लिए स्वतंत्र हैं। चुनाव हो या न हों प्रशासनिक कार्यों पर कोई असर नहीं पड़ता और न ही छावनी प्रशासन को।
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छावनी चिकित्सालय में रैबीज के टीके उपलब्ध न होना, स्ट्रीट लाइटों का खराब होना, पीने के पानी की समस्या इस के ताजा उदाहरण हैं। बहरहाल केंद्र व राज्य सरकार को छावनी वासियों की पंचायती राज संबंधी मांग पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
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