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Himachal News: हिमाचल प्रदेश में बस्तियों, गांवों और गलियों के अपमानजनक नाम बदलेंगे, जानें विस्तार से
Mon, 02 Feb 2026 08:37 PM IST
अंकेश डोगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरागोपीपुर (कांगड़ा)।
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरागोपीपुर (कांगड़ा)।
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Mon, 02 Feb 2026 08:37 PM IST
सार
हिमाचल प्रदेश में कस्बों, पंचायतों और गलियों के ऐसे नाम जो जातिसूचक और अपमानजनक हों उन्हें बदला जाएगा। मानवाधिकार आयोग ने स्पष्ट किया है कि समाज में समानता लाने के लिए ऐसे नामों को हटाना अनिवार्य है, जो किसी विशेष वर्ग या समुदाय के लिए अपमानजनक प्रतीत होते हैं। पढ़ें पूरी खबर...
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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
हिमाचल प्रदेश में अब जातिसूचक और अपमानजनक नामों वाले कस्बों, पंचायतों और गलियों की पहचान मिटने वाली है। मानवाधिकार आयोग के कड़े निर्देशों के बाद जिला प्रशासन ने इन नामों को बदलने की प्रक्रिया तेज कर दी है। जिला पंचायत अधिकारी कार्यालय ने सभी खंड विकास अधिकारियों को आदेश जारी कर उनके क्षेत्रों में ऐसे नामों की व्यापक सूची और उन्हें बदलने का प्रस्ताव मांगा है।
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यह पूरी कवायद मानवाधिकार आयोग की ओर से डॉ. आंबेडकर जन कल्याण समिति भोपाल के अध्यक्ष सुनील अहिरवार की कोर्ट में दायर याचिका पर की जा रही है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि समाज में समानता लाने के लिए ऐसे नामों को हटाना अनिवार्य है, जो किसी विशेष वर्ग या समुदाय के लिए अपमानजनक प्रतीत होते हैं। प्रशासन अब उन प्राचीन बस्तियों और मोहल्लों को चिह्नित कर रहा है, जिनके नाम जाति आधारित हैं। जिला पंचायत अधिकारी की ओर से इस मुहिम को लेकर निर्देश जारी किए हैं। पंचायत सचिवों और बीडीओ को निर्देश दिए गए हैं कि वे हर छोटे-बड़े कस्बे और गली का बारीकी से निरीक्षण करें। सूचनाओं के संकलन में कोई त्रुटि न हो, इसके लिए गूगल शीट का उपयोग किया जा रहा है।
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प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि यह कदम न केवल कानूनी अनिवार्यता है, बल्कि नागरिकों के आत्मसम्मान से भी जुड़ा है। आने वाले दिनों में चिह्नित क्षेत्रों के नाम बदलकर नए नाम रखे जाएंगे, जिससे समाज में एक समावेशी और सम्मानजनक वातावरण निर्मित होगा। आयोग ने इस मामले में विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। इसलिए प्रशासन इसे सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है।
सभी खंड विकास अधिकारियों और पंचायत सचिवों को अपने क्षेत्रों की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। यदि कहीं भी जाति-सूचक या अपमानजनक शब्दावली का प्रयोग पाया जाता है तो उसकी सूचना तत्काल निदेशालय के माध्यम से मानवाधिकार आयोग को भेजी जाएगी। - सचिन ठाकुर, जिला पंचायत अधिकारी, कांगड़ा।