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Kangra News: नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में दोषी को सात साल का कारावास
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धर्मशाला। कांगड़ा जिले के फतेहपुर क्षेत्र में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में धर्मशाला की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विजय लक्ष्मी की अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए सात साल के कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
जुर्माना अदा न करने पर दोषी को छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। पुलिस थाना फतेहपुर में दर्ज मामले के अनुसार नाबालिग की मां ने 20 जुलाई 2025 को शिकायत दर्ज करवाई थी।
उन्होंने पुलिस को बताया था कि उनकी बेटी दो दिन से डरी और चुपचाप थी। पूछने पर नाबालिग ने बताया कि 18 जुलाई को आरोपी ने उसे घर के मंदिर वाले कमरे में बुलाया और प्रसाद देने के बाद उसके साथ दुष्कर्म किया।
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शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर भारतीय न्याय संहिता की धारा 65 (2) और 351(2) और पॉक्सो अधिनियम की धारा 10 के तहत मामला दर्ज किया।
जांच के दौरान सामने आया कि घटना की जानकारी परिवार को होने के बाद आरोपी ने लिखित में माफी मांगी थी। पुलिस ने माफीनामा समेत अन्य साक्ष्यों को जांच में शामिल किया।
मामले की जांच के दौरान दस्तावेज, हस्तलिखित सामग्री और हस्ताक्षरों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया। इसके अलावा पीड़िता के बयान, चिकित्सकीय परीक्षण, घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य और अन्य दस्तावेज भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए।
साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। मामले की पैरवी जिला न्यायवादी नवीना राही ने की। नायब कोर्ट यशपाल ने सहयोग किया।
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जुर्माना अदा न करने पर दोषी को छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। पुलिस थाना फतेहपुर में दर्ज मामले के अनुसार नाबालिग की मां ने 20 जुलाई 2025 को शिकायत दर्ज करवाई थी।
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उन्होंने पुलिस को बताया था कि उनकी बेटी दो दिन से डरी और चुपचाप थी। पूछने पर नाबालिग ने बताया कि 18 जुलाई को आरोपी ने उसे घर के मंदिर वाले कमरे में बुलाया और प्रसाद देने के बाद उसके साथ दुष्कर्म किया।
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शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर भारतीय न्याय संहिता की धारा 65 (2) और 351(2) और पॉक्सो अधिनियम की धारा 10 के तहत मामला दर्ज किया।
जांच के दौरान सामने आया कि घटना की जानकारी परिवार को होने के बाद आरोपी ने लिखित में माफी मांगी थी। पुलिस ने माफीनामा समेत अन्य साक्ष्यों को जांच में शामिल किया।
मामले की जांच के दौरान दस्तावेज, हस्तलिखित सामग्री और हस्ताक्षरों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया। इसके अलावा पीड़िता के बयान, चिकित्सकीय परीक्षण, घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य और अन्य दस्तावेज भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए।
साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। मामले की पैरवी जिला न्यायवादी नवीना राही ने की। नायब कोर्ट यशपाल ने सहयोग किया।