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Kangra News: 25 साल पहले सड़क के लिए ली जमीन का मुआवजा देना होगा
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मंडी। सिविल जज कोर्ट नंबर-दो सरकाघाट ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को निजी भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया है। यह आदेश सड़क निर्माण में इस्तेमाल की गई भूमि के संबंध में चुन्नी लाल और अन्य की याचिका पर दिया गया है। अदालत ने खसरा नंबर 1357/1 और 1370/1 की भूमि के अधिग्रहण के लिए अनिवार्य निषेधाज्ञा जारी की।
बद्दू थौर निवासी चुन्नी लाल और पांच अन्य ने अदालत को बताया कि नबाही-चम्याणु-जुकैण-मतेहड़ी-गोपालपुर सड़क में उनकी भूमि का उपयोग हुआ। वर्ष 1998 में 10 जून को भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत अधिसूचना जारी हुई थी। हालांकि, मुआवजा देने के लिए अंतिम निर्णय पारित नहीं किया गया। बार-बार आग्रह के बावजूद कार्रवाई न होने पर उन्हें अदालत आना पड़ा। राजस्व विभाग के रिकॉर्ड और भूमि की निशानदेही रिपोर्ट से भूमि का सड़क में शामिल होना साबित हुआ। पीडब्ल्यूडी के कनिष्ठ अभियंता ने भी अधिग्रहण अधिसूचना जारी होने पर प्रक्रिया पूरी न होने की बात मानी। विभाग ने अधिग्रहण कार्रवाई पूरी करने पर कोई आपत्ति नहीं जताई।
अदालत ने माना कि निजी भूमि का सड़क निर्माण में उपयोग होने पर अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी करना आवश्यक है। यह भूमि मालिकों को नियमानुसार लाभ सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है। अदालत ने दोनों खसरा नंबरों की भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए। इस मामले में दोनों पक्षों को अपने-अपने खर्च वहन करने होंगे।
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बद्दू थौर निवासी चुन्नी लाल और पांच अन्य ने अदालत को बताया कि नबाही-चम्याणु-जुकैण-मतेहड़ी-गोपालपुर सड़क में उनकी भूमि का उपयोग हुआ। वर्ष 1998 में 10 जून को भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत अधिसूचना जारी हुई थी। हालांकि, मुआवजा देने के लिए अंतिम निर्णय पारित नहीं किया गया। बार-बार आग्रह के बावजूद कार्रवाई न होने पर उन्हें अदालत आना पड़ा। राजस्व विभाग के रिकॉर्ड और भूमि की निशानदेही रिपोर्ट से भूमि का सड़क में शामिल होना साबित हुआ। पीडब्ल्यूडी के कनिष्ठ अभियंता ने भी अधिग्रहण अधिसूचना जारी होने पर प्रक्रिया पूरी न होने की बात मानी। विभाग ने अधिग्रहण कार्रवाई पूरी करने पर कोई आपत्ति नहीं जताई।
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अदालत ने माना कि निजी भूमि का सड़क निर्माण में उपयोग होने पर अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी करना आवश्यक है। यह भूमि मालिकों को नियमानुसार लाभ सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है। अदालत ने दोनों खसरा नंबरों की भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए। इस मामले में दोनों पक्षों को अपने-अपने खर्च वहन करने होंगे।
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