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Kangra News: निजी स्कूल प्रबंधन मामले में सिविल अपील खारिज
Sat, 16 May 2026 02:14 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sat, 16 May 2026 02:14 AM IST
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-अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश देहरा ने निचली अदालत का निर्णय सही ठहराया
-स्कूल प्रबंधन ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को दी थी चुनौती
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अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। जिला कांगड़ा के एक निजी स्कूल से जुड़े प्रबंधन विवाद मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश देहरा सपना पांडे की अदालत ने स्कूल प्रबंधन की ओर से दायर सिविल अपील को खारिज कर दिया है। अदालत ने निचली अदालत की ओर से 2020 में पारित निर्णय एवं डिक्री को सही ठहराते हुए बरकरार रखा।
जानकारी के अनुसार, यह मामला सिविल अपील से संबंधित था जिसमें स्कूल प्रबंधन ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी जिसमें उनकी स्थायी निषेधाज्ञा की याचिका खारिज कर दी गई थी। इस मामले के अनुसार, स्कूल प्रबंधन ने अदालत में दावा किया था कि कुछ व्यक्तियों की ओर से स्कूल के प्रशासन और शैक्षणिक गतिविधियों में हस्तक्षेप किया जा रहा है।
प्रबंधन की ओर से कहा गया कि विद्यालय राज्य सरकार की सहायता और दानदाताओं के सहयोग से संचालित है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत गठित प्रबंधन समिति ही स्कूल संचालन की अधिकृत संस्था है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि प्रतिवादी एवं अन्य लोगों ने कई बार स्कूल परिसर में प्रवेश कर शांति भंग करने तथा स्कूल के रिकॉर्ड और खातों की मांग कर प्रशासनिक कार्यों में बाधा डालने का प्रयास किया। वर्ष 2014 में पुलिस हस्तक्षेप के बाद समझौता हुआ था लेकिन बावजूद इसके विवाद जारी रहा।
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दूसरी ओर, प्रतिवादियों ने स्कूल प्रबंधन के दावों को निराधार बताते हुए कहा कि मामला समिति एवं उसके सदस्यों के आंतरिक विवाद से जुड़ा है और दीवानी अदालत में इस प्रकार की राहत नहीं दी जा सकती। सभी पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद अतिरिक्त जिला न्यायाधीश देहरा ने फैसले में कहा कि ट्रायल कोर्ट की ओर से तथ्यों और कानून का सही मूल्यांकन किया गया था। उसके निर्णय में किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि या अवैधता नहीं पाई गई। अब अदालत ने अंतिम आदेश में अपील को खारिज किया है।
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-स्कूल प्रबंधन ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को दी थी चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। जिला कांगड़ा के एक निजी स्कूल से जुड़े प्रबंधन विवाद मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश देहरा सपना पांडे की अदालत ने स्कूल प्रबंधन की ओर से दायर सिविल अपील को खारिज कर दिया है। अदालत ने निचली अदालत की ओर से 2020 में पारित निर्णय एवं डिक्री को सही ठहराते हुए बरकरार रखा।
जानकारी के अनुसार, यह मामला सिविल अपील से संबंधित था जिसमें स्कूल प्रबंधन ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी जिसमें उनकी स्थायी निषेधाज्ञा की याचिका खारिज कर दी गई थी। इस मामले के अनुसार, स्कूल प्रबंधन ने अदालत में दावा किया था कि कुछ व्यक्तियों की ओर से स्कूल के प्रशासन और शैक्षणिक गतिविधियों में हस्तक्षेप किया जा रहा है।
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प्रबंधन की ओर से कहा गया कि विद्यालय राज्य सरकार की सहायता और दानदाताओं के सहयोग से संचालित है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत गठित प्रबंधन समिति ही स्कूल संचालन की अधिकृत संस्था है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि प्रतिवादी एवं अन्य लोगों ने कई बार स्कूल परिसर में प्रवेश कर शांति भंग करने तथा स्कूल के रिकॉर्ड और खातों की मांग कर प्रशासनिक कार्यों में बाधा डालने का प्रयास किया। वर्ष 2014 में पुलिस हस्तक्षेप के बाद समझौता हुआ था लेकिन बावजूद इसके विवाद जारी रहा।
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दूसरी ओर, प्रतिवादियों ने स्कूल प्रबंधन के दावों को निराधार बताते हुए कहा कि मामला समिति एवं उसके सदस्यों के आंतरिक विवाद से जुड़ा है और दीवानी अदालत में इस प्रकार की राहत नहीं दी जा सकती। सभी पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद अतिरिक्त जिला न्यायाधीश देहरा ने फैसले में कहा कि ट्रायल कोर्ट की ओर से तथ्यों और कानून का सही मूल्यांकन किया गया था। उसके निर्णय में किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि या अवैधता नहीं पाई गई। अब अदालत ने अंतिम आदेश में अपील को खारिज किया है।