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परागपुर में ग्राम सभा की बैठकों का बहिष्कार
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देहरागोपीपुर (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े विकास खंड परागपुर के अधीन आने वाली 27 ग्राम पंचायतों में बुधवार को ग्राम सभा की बैठकों का आयोजन किया जाना था, लेकिन बिना पंचायत सचिवों के पंचायत प्रधानों तथा पदाधिकारियों ने ग्राम सभा की बैठकों का बहिष्कार किया। किसी भी पंचायत में कोरम पूर्ण नहीं हुआ।
प्रशासन ने हालांकि ग्राम सभा की बैठकों का आयोजन सुनिश्चित करने के लिए सिलाई टीचरों और ग्राम रोजगार सेवकों की तैनाती की थी, लेकिन अधिकांश पंचायत प्रतिनिधि सचिवों के पक्ष में खंड कार्यालय परागपुर पहुंच गए। पंचायत प्रतिनिधियों ने गरली पंचायत की प्रधान शशि बाला की अगुवाई में विकास खंड परागपुर के अधीक्षक मनोज कुमार को ज्ञापन सौंपा। प्रधानों ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मांग करते हुए कहा कि पंचायत सचिवों, तकनीकी सहायकों, कनिष्ठ और सहायक अभियंताओं की मांगों को जल्द पूरा किया जाए अन्यथा पंचायत प्रतिनिधि भी जिला परिषद कैडर के कर्मचारियों के समर्थन में धरने पर बैठ जाएंगे।
जिला परिषद कर्मचारी और अधिकारी महासंघ विकास खंड परागपुर के अध्यक्ष जीवन राणा ने बताया कि सरकार ने वाटर शेड प्रोजेक्ट में कार्यरत कर्मियों का ग्रामीण विकास विभाग में विलय किया है। हड़ताली कर्मचारी पिछले 22 साल से पंचायतीराज और ग्रामीण विकास विभाग का कार्य कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अभी तक सरकारी कर्मचारी नहीं माना गया है। उधर, विभाग के अधिकारियों के निर्देश पर हड़ताली कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस भी जारी होना शुरू हो गए हैं।
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प्रशासन ने हालांकि ग्राम सभा की बैठकों का आयोजन सुनिश्चित करने के लिए सिलाई टीचरों और ग्राम रोजगार सेवकों की तैनाती की थी, लेकिन अधिकांश पंचायत प्रतिनिधि सचिवों के पक्ष में खंड कार्यालय परागपुर पहुंच गए। पंचायत प्रतिनिधियों ने गरली पंचायत की प्रधान शशि बाला की अगुवाई में विकास खंड परागपुर के अधीक्षक मनोज कुमार को ज्ञापन सौंपा। प्रधानों ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मांग करते हुए कहा कि पंचायत सचिवों, तकनीकी सहायकों, कनिष्ठ और सहायक अभियंताओं की मांगों को जल्द पूरा किया जाए अन्यथा पंचायत प्रतिनिधि भी जिला परिषद कैडर के कर्मचारियों के समर्थन में धरने पर बैठ जाएंगे।
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जिला परिषद कर्मचारी और अधिकारी महासंघ विकास खंड परागपुर के अध्यक्ष जीवन राणा ने बताया कि सरकार ने वाटर शेड प्रोजेक्ट में कार्यरत कर्मियों का ग्रामीण विकास विभाग में विलय किया है। हड़ताली कर्मचारी पिछले 22 साल से पंचायतीराज और ग्रामीण विकास विभाग का कार्य कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अभी तक सरकारी कर्मचारी नहीं माना गया है। उधर, विभाग के अधिकारियों के निर्देश पर हड़ताली कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस भी जारी होना शुरू हो गए हैं।
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