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बैक डोर भर्तियां युवाओं के समान अवसर के अधिकार का हनन : संघ
Thu, 06 Nov 2025 07:20 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Thu, 06 Nov 2025 07:20 AM IST
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कांगड़ा में पत्रकार वार्ता करते हिमाचल बेराेजगार संघ के अध्यक्ष और अन्य। -संवाद
कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश की सरकारी शिक्षक भर्ती नीतियों के खिलाफ बेरोजगार बीएड (प्रशिक्षित अध्यापक) संघ ने आवाज बुलंद कर दी है। संघ के अध्यक्ष संजीव कुमार ने प्रेस वार्ता में सीधा आरोप जड़ा कि पिछले 15-20 वर्षों से प्रदेश सरकारें जानबूझकर बैक डोर और आउटसोर्स माध्यम से भर्तियां कर रही हैं। इससे लाखों प्रशिक्षित युवाओं के हितों की अनदेखी की जा रही है।
संजीव कुमार ने भर्ती नीतियों को संविधान के विरुद्ध बताया। उन्होंने कहा कि सरकार उन मौलिक अधिकारों का सम्मान नहीं कर रही है जो हर नागरिक को समान अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रदेश सरकार संविधान का पालन करती है जो हमें मूल अधिकार जैसे शिक्षा का अधिकार और समान अवसर प्रदान करता है। सरकार की नीतियां बेरोजगार युवाओं के लिए गहरी निराशा पैदा कर रही हैं।
संघ ने कहा कि पिछली सरकारों द्वारा लगभग 18 से 20 हजार शिक्षकों की पीटीए के तहत नियुक्तियां सीधे बैक डोर से की गईं। विरोध न होने पर सरकार को अंततः इन्हें नियमित करने की प्रक्रिया शुरू करनी पड़ी। 2555 शिक्षकों की भर्ती भी अप्रत्यक्ष तरीके से हुई। इस मामले में कानूनी लड़ाई में सरकार को हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा और उसे यह हलफनामा देना पड़ा कि यह केवल अंतरिम व्यवस्था है।
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संघ ने वर्तमान सरकार की नई भर्ती नीतियों एलडीआर और आरएंडपी रूल में संशोधन का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि इन नई नीतियों के तहत बैच वाइज भर्ती को प्राथमिकता दी जाएगी। संघ का तर्क है कि इससे पिछले 15 से 20 वर्षों से नौकरी की आस लगाए बैठे लाखों बेरोजगार युवाओं को नौकरी पाने का कोई मौका नहीं मिलेगा, क्योंकि उनके बैच की सीटें सीमित हो जाएंगी।
संघ ने हाल ही में 1427 एसएमसी टीचरों के लिए परीक्षा आयोजित करने के सरकारी निर्णय को गलत करार देते हुए इसका विरोध करने की घोषणा की। संजीव कुमार ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार अपनी वर्तमान भर्ती नीतियों में सुधार नहीं करती है तो प्रदेश के बेरोजगार युवा लगातार इन नीतियों का विरोध जारी रखेंगे। पत्रकार वार्ता में रवि कुमार, सरवण कुमार, अनिल कुमार, अमित शर्मा, प्रियांशु, संजीव, विक्रांत ठाकुर, सुदेश, विनय, मोहित, राकेश कुमार और संदीप कुमार आदि संघ के सदस्य मौजूद रहे।
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संजीव कुमार ने भर्ती नीतियों को संविधान के विरुद्ध बताया। उन्होंने कहा कि सरकार उन मौलिक अधिकारों का सम्मान नहीं कर रही है जो हर नागरिक को समान अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रदेश सरकार संविधान का पालन करती है जो हमें मूल अधिकार जैसे शिक्षा का अधिकार और समान अवसर प्रदान करता है। सरकार की नीतियां बेरोजगार युवाओं के लिए गहरी निराशा पैदा कर रही हैं।
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संघ ने कहा कि पिछली सरकारों द्वारा लगभग 18 से 20 हजार शिक्षकों की पीटीए के तहत नियुक्तियां सीधे बैक डोर से की गईं। विरोध न होने पर सरकार को अंततः इन्हें नियमित करने की प्रक्रिया शुरू करनी पड़ी। 2555 शिक्षकों की भर्ती भी अप्रत्यक्ष तरीके से हुई। इस मामले में कानूनी लड़ाई में सरकार को हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा और उसे यह हलफनामा देना पड़ा कि यह केवल अंतरिम व्यवस्था है।
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संघ ने वर्तमान सरकार की नई भर्ती नीतियों एलडीआर और आरएंडपी रूल में संशोधन का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि इन नई नीतियों के तहत बैच वाइज भर्ती को प्राथमिकता दी जाएगी। संघ का तर्क है कि इससे पिछले 15 से 20 वर्षों से नौकरी की आस लगाए बैठे लाखों बेरोजगार युवाओं को नौकरी पाने का कोई मौका नहीं मिलेगा, क्योंकि उनके बैच की सीटें सीमित हो जाएंगी।
संघ ने हाल ही में 1427 एसएमसी टीचरों के लिए परीक्षा आयोजित करने के सरकारी निर्णय को गलत करार देते हुए इसका विरोध करने की घोषणा की। संजीव कुमार ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार अपनी वर्तमान भर्ती नीतियों में सुधार नहीं करती है तो प्रदेश के बेरोजगार युवा लगातार इन नीतियों का विरोध जारी रखेंगे। पत्रकार वार्ता में रवि कुमार, सरवण कुमार, अनिल कुमार, अमित शर्मा, प्रियांशु, संजीव, विक्रांत ठाकुर, सुदेश, विनय, मोहित, राकेश कुमार और संदीप कुमार आदि संघ के सदस्य मौजूद रहे।