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Kangra News: 97 की उम्र में युवाओं जैसा हौसला, उपप्रधान का चुनाव लड़ रहे परस राम कामरेड
Sun, 24 May 2026 07:49 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sun, 24 May 2026 07:49 AM IST
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नगरोटा बगवां उपमंडल की झिकला हटवास पंचायत से उप प्रधान पद पर चुनाव लड़ रहे 97 वर्षीय परसराम अपन
नगरोटा बगवां (कांगड़ा)। उम्र 97 साल, लेकिन हौसला किसी युवा से कम नहीं। विकास खंड नगरोटा बगवां की ग्राम पंचायत झिकला हटवास से उपप्रधान पद का चुनाव लड़ रहे परस राम कामरेड इन दिनों पूरे क्षेत्र में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भले ही परस राम की कमर थोड़ी झुक गई हो, लेकिन समाज को बदलने की उनकी सोच आज भी बेहद मजबूत और इरादे बुलंद हैं।
परस राम का कहना है कि नशा आज समाज के लिए सबसे बड़ा कलंक बन चुका है और युवा पीढ़ी तेजी से इसकी गिरफ्त में जा रही है। इसी चिंता ने उन्हें इस उम्र में चुनाव मैदान में उतरने के लिए प्रेरित किया। परस राम ने बताया कि उनका जन्म वर्ष 1932 में हुआ था और उन्होंने चौथी कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की है।
जीवन के नौ दशक पार करने के बाद भी वह बिना चश्मे के आसानी से अखबार पढ़ लेते हैं, पूरी तरह सुनने में सक्षम हैं और खुद को तंदुरुस्त बताते हैं। वे अंग्रेजी भाषा भी अच्छी तरह समझ लेते हैं तथा जरूरत पड़ने पर ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान के लिए खुद प्रशासनिक अधिकारियों से पत्राचार (लेटर राइटिंग) करते हैं। वे लंबे समय से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) से जुड़े हैं और करीब 25-30 वर्ष पहले जिला परिषद का चुनाव भी लड़ चुके हैं।
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पहले चुनाव का मतलब समाज सेवा था, अब तौर-तरीके बदले
अपने पुराने अनुभवों को साझा करते हुए परस राम ने कहा कि पहले पंचायत चुनावों का एकमात्र उद्देश्य समाज सेवा होता था और गांव के लोग आपसी सहमति से ही योग्य उम्मीदवार चुन लेते थे, लेकिन अब चुनावी तौर-तरीके पूरी तरह बदल चुके हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने के बाद नशा निवारण के साथ-साथ पंचायत की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी। वे पंचायत के हर गांव में निगरानी (सीसीटीवी) कैमरे स्थापित करवाना चाहते हैं, ताकि अपराध और असामाजिक गतिविधियों पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके। 97 वर्षीय इस बुजुर्ग उम्मीदवार का जज्बा और समाज के प्रति समर्पण आज हर किसी के लिए प्रेरणा बन रहा है। संवाद
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परस राम का कहना है कि नशा आज समाज के लिए सबसे बड़ा कलंक बन चुका है और युवा पीढ़ी तेजी से इसकी गिरफ्त में जा रही है। इसी चिंता ने उन्हें इस उम्र में चुनाव मैदान में उतरने के लिए प्रेरित किया। परस राम ने बताया कि उनका जन्म वर्ष 1932 में हुआ था और उन्होंने चौथी कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की है।
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जीवन के नौ दशक पार करने के बाद भी वह बिना चश्मे के आसानी से अखबार पढ़ लेते हैं, पूरी तरह सुनने में सक्षम हैं और खुद को तंदुरुस्त बताते हैं। वे अंग्रेजी भाषा भी अच्छी तरह समझ लेते हैं तथा जरूरत पड़ने पर ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान के लिए खुद प्रशासनिक अधिकारियों से पत्राचार (लेटर राइटिंग) करते हैं। वे लंबे समय से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) से जुड़े हैं और करीब 25-30 वर्ष पहले जिला परिषद का चुनाव भी लड़ चुके हैं।
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पहले चुनाव का मतलब समाज सेवा था, अब तौर-तरीके बदले
अपने पुराने अनुभवों को साझा करते हुए परस राम ने कहा कि पहले पंचायत चुनावों का एकमात्र उद्देश्य समाज सेवा होता था और गांव के लोग आपसी सहमति से ही योग्य उम्मीदवार चुन लेते थे, लेकिन अब चुनावी तौर-तरीके पूरी तरह बदल चुके हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने के बाद नशा निवारण के साथ-साथ पंचायत की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी। वे पंचायत के हर गांव में निगरानी (सीसीटीवी) कैमरे स्थापित करवाना चाहते हैं, ताकि अपराध और असामाजिक गतिविधियों पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके। 97 वर्षीय इस बुजुर्ग उम्मीदवार का जज्बा और समाज के प्रति समर्पण आज हर किसी के लिए प्रेरणा बन रहा है। संवाद

नगरोटा बगवां उपमंडल की झिकला हटवास पंचायत से उप प्रधान पद पर चुनाव लड़ रहे 97 वर्षीय परसराम अपन