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Kangra News: कर्ज न चुकाने के दोषी की अपील खारिज, दो साल के कारावास का फैसला बरकरार
Sun, 26 Apr 2026 06:56 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sun, 26 Apr 2026 06:56 AM IST
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धर्मशाला। बैंक से कर्ज लेकर चेक बाउंस कराने के मामले में दोषी की अपील अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पालमपुर धीरू की अदालत ने खारिज कर दी है। अदालत ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए दोषी को सुनाई गई दो साल की सजा और आठ लाख रुपये मुआवजे के फैसले को बरकरार रखा है।
दोषी को 30 दिन के भीतर ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण करने के निर्देश दिए गए हैं, ऐसा न करने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) कंडवाड़ी ने अदालत में याचिका दायर कर बताया था कि आरोपी ने बैंक से ऋण लिया था, लेकिन किश्तें चुकाने में लगातार लापरवाही बरती। खाता अनियमित होने पर बैंक के दबाव में आरोपी ने 28 जुलाई 2017 को 5 लाख रुपये का चेक दिया, जो खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण बाउंस हो गया।
कानूनी नोटिस भेजने के बाद भी जब भुगतान नहीं हुआ, तो मामला अदालत पहुंचा। एसीजेएम पालमपुर की अदालत ने अगस्त 2024 में आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी, जिसे आरोपी ने जिला अदालत में चुनौती दी। आरोपी ने तर्क दिया कि चेक सुरक्षा के तौर पर दिया गया था। हालांकि, अदालत ने पाया कि आरोपी ने स्वयं ऋण की देनदारी और चेक जारी करने की बात स्वीकार की थी।
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अदालत ने टिप्पणी की कि आरोपी का रवैया टालमटोल वाला रहा और वह कई बार पेशी से भी गायब रहा। सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने अपील खारिज कर सजा बरकरार रखी।
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दोषी को 30 दिन के भीतर ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण करने के निर्देश दिए गए हैं, ऐसा न करने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) कंडवाड़ी ने अदालत में याचिका दायर कर बताया था कि आरोपी ने बैंक से ऋण लिया था, लेकिन किश्तें चुकाने में लगातार लापरवाही बरती। खाता अनियमित होने पर बैंक के दबाव में आरोपी ने 28 जुलाई 2017 को 5 लाख रुपये का चेक दिया, जो खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण बाउंस हो गया।
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कानूनी नोटिस भेजने के बाद भी जब भुगतान नहीं हुआ, तो मामला अदालत पहुंचा। एसीजेएम पालमपुर की अदालत ने अगस्त 2024 में आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी, जिसे आरोपी ने जिला अदालत में चुनौती दी। आरोपी ने तर्क दिया कि चेक सुरक्षा के तौर पर दिया गया था। हालांकि, अदालत ने पाया कि आरोपी ने स्वयं ऋण की देनदारी और चेक जारी करने की बात स्वीकार की थी।
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अदालत ने टिप्पणी की कि आरोपी का रवैया टालमटोल वाला रहा और वह कई बार पेशी से भी गायब रहा। सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने अपील खारिज कर सजा बरकरार रखी।