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Kangra News: चेक बाउंस के मामले में आरोपी दोषी करार
Fri, 25 Sep 2026 04:09 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Fri, 25 Sep 2026 04:09 AM IST
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धर्मशाला। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी-द्वितीय देहरा गौरव चौधरी की अदालत ने पंजाब नेशनल बैंक की 62,038.50 रुपये की देनदारी से जुड़े चेक बाउंस मामले में प्रतिवादी को परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत दोषी करार दिया है।
दोषी की सजा पर अदालत में 5 अक्तूबर को सुनवाई होगी। बैंक की ढलियारा शाखा की शिकायत के अनुसार क्षेत्र के ही प्रतिवादी ने बैंक से ऋण लिया था। ऋण खाते की देनदारी चुकाने के लिए उसने 30 जनवरी 2023 को 62,038.50 रुपये का चेक जारी किया।
बैंक में प्रस्तुत करने पर पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण चेक बाउंस हो गया। बैंक ने 4 फरवरी 2023 को कानूनी नोटिस भेजकर राशि चुकाने की मांग की लेकिन निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद 16 मार्च 2023 को अदालत में शिकायत दायर की गई।
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प्रतिवादी ने बैंक से ऋण लेने और चेक पर अपने हस्ताक्षर होने की बात स्वीकार की लेकिन चेक जारी करने से इन्कार करते हुए इसे सुरक्षा चेक बताया। अदालत ने उसे बचाव में साक्ष्य पेश करने का अवसर दिया लेकिन उसकी ओर से कोई साक्ष्य पेश नहीं किया गया।
अदालत ने कहा कि चेक पर हस्ताक्षर स्वीकार किए जाने के बाद कानून के तहत यह धारणा बनती है कि चेक कानूनी देनदारी चुकाने के लिए जारी किया गया था। आरोपी इस धारणा को संभावित बचाव के आधार पर खारिज कर सकता था, लेकिन वह ऐसा नहीं कर सका।
अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल सुरक्षा चेक होने का दावा दायित्व से मुक्त नहीं करता। यदि चेक की तारीख पर ऋण या किस्त की देनदारी मौजूद थी और उसका भुगतान नहीं किया गया तो चेक बाउंस होने पर धारा 138 के तहत कार्रवाई हो सकती है। इसके आधार पर अदालत ने बैंक का मामला संदेह से परे साबित मानते हुए प्रतिवादी को दोषी करार दिया।
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दोषी की सजा पर अदालत में 5 अक्तूबर को सुनवाई होगी। बैंक की ढलियारा शाखा की शिकायत के अनुसार क्षेत्र के ही प्रतिवादी ने बैंक से ऋण लिया था। ऋण खाते की देनदारी चुकाने के लिए उसने 30 जनवरी 2023 को 62,038.50 रुपये का चेक जारी किया।
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बैंक में प्रस्तुत करने पर पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण चेक बाउंस हो गया। बैंक ने 4 फरवरी 2023 को कानूनी नोटिस भेजकर राशि चुकाने की मांग की लेकिन निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद 16 मार्च 2023 को अदालत में शिकायत दायर की गई।
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प्रतिवादी ने बैंक से ऋण लेने और चेक पर अपने हस्ताक्षर होने की बात स्वीकार की लेकिन चेक जारी करने से इन्कार करते हुए इसे सुरक्षा चेक बताया। अदालत ने उसे बचाव में साक्ष्य पेश करने का अवसर दिया लेकिन उसकी ओर से कोई साक्ष्य पेश नहीं किया गया।
अदालत ने कहा कि चेक पर हस्ताक्षर स्वीकार किए जाने के बाद कानून के तहत यह धारणा बनती है कि चेक कानूनी देनदारी चुकाने के लिए जारी किया गया था। आरोपी इस धारणा को संभावित बचाव के आधार पर खारिज कर सकता था, लेकिन वह ऐसा नहीं कर सका।
अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल सुरक्षा चेक होने का दावा दायित्व से मुक्त नहीं करता। यदि चेक की तारीख पर ऋण या किस्त की देनदारी मौजूद थी और उसका भुगतान नहीं किया गया तो चेक बाउंस होने पर धारा 138 के तहत कार्रवाई हो सकती है। इसके आधार पर अदालत ने बैंक का मामला संदेह से परे साबित मानते हुए प्रतिवादी को दोषी करार दिया।