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Kangra News: मक्की की फसल को कीट के प्रकोप से बचाने के लिए टीम गठित
Thu, 03 Jul 2025 12:48 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Thu, 03 Jul 2025 12:48 AM IST
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धर्मशाला। पिछले कुछ वर्षों से जिले में फॉल आर्मी कीट मक्की की फसल को नुकसान पहुंचा रहा है। अब इस कीट के संक्रमण की निगरानी के लिए विभागीय अधिकारियों की एक डायग्नोस्टिक टीम का गठन किया है। इस टीम में कृषि विज्ञान केंद्र के कीट विज्ञान विषय वाद विशेषज्ञ, जिला कृषि अधिकारी, कृषि विकास अधिकारी, आतमा परियोजना के उप परियोजना निदेशक और खंड स्तर पर विषयवाद विशेषज्ञ को शामिल किया है।
इस कड़ी में राज्य जैव नियंत्रण प्रयोगशाला पालमपुर की टीम ने कोटला क्षेत्र के नियांगल, भटोली और बाड़ा गांव का दौरा किया। इस दौरान वैज्ञानिक डॉ. सुखदेव शर्मा ने बताया कि यदि कीट का प्रकोप 10 प्रतिशत से कम हो तो पांच मिलीलीटर नीम आधारित कीटनाशक प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। कीटग्रस्त पौधों को खेत से निकालकर गड्ढे में दबाकर नष्ट करें। यदि प्रकोप 10 प्रतिशत से अधिक हो तो 0.4 ग्राम एमामैक्टिन बेंजोएट पांच एसजी प्रति लीटर पानी, 0.4 मिलिलीटर क्लोरएंट्रानिलीप्रोल 18.5 एससी (कोराजन) प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। इसके बाद किसान 10-15 दिन के लिए गहरी जुताई कर खेतों को खुला छोड़ दें ताकि सूर्य की किरणें जमीन के अंदर जा सकें। उन्होंने बताया कि जिस पौधे को कीट ने अपनी चपेट में लिया है, उस पौधे को उखाड़कर ज़मीन के अंदर दबा देना चाहिए। स्प्रे करते समय नोजल को मक्की की पत्ती की ओर निर्देशित करें, ताकि कीटनाशक सीधे कीट पर प्रभावी हो सके। मक्की में फूल आने की अवस्था से लेकर फसल कटाई तक किसी भी कीटनाशक का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। विषयवाद विशेषज्ञ डॉ. अंजू ठाकुर, डॉ रीता ठाकुर और सुरेष्ठा ने भी किसानों को कई उपाय बताए।
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इस कड़ी में राज्य जैव नियंत्रण प्रयोगशाला पालमपुर की टीम ने कोटला क्षेत्र के नियांगल, भटोली और बाड़ा गांव का दौरा किया। इस दौरान वैज्ञानिक डॉ. सुखदेव शर्मा ने बताया कि यदि कीट का प्रकोप 10 प्रतिशत से कम हो तो पांच मिलीलीटर नीम आधारित कीटनाशक प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। कीटग्रस्त पौधों को खेत से निकालकर गड्ढे में दबाकर नष्ट करें। यदि प्रकोप 10 प्रतिशत से अधिक हो तो 0.4 ग्राम एमामैक्टिन बेंजोएट पांच एसजी प्रति लीटर पानी, 0.4 मिलिलीटर क्लोरएंट्रानिलीप्रोल 18.5 एससी (कोराजन) प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। इसके बाद किसान 10-15 दिन के लिए गहरी जुताई कर खेतों को खुला छोड़ दें ताकि सूर्य की किरणें जमीन के अंदर जा सकें। उन्होंने बताया कि जिस पौधे को कीट ने अपनी चपेट में लिया है, उस पौधे को उखाड़कर ज़मीन के अंदर दबा देना चाहिए। स्प्रे करते समय नोजल को मक्की की पत्ती की ओर निर्देशित करें, ताकि कीटनाशक सीधे कीट पर प्रभावी हो सके। मक्की में फूल आने की अवस्था से लेकर फसल कटाई तक किसी भी कीटनाशक का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। विषयवाद विशेषज्ञ डॉ. अंजू ठाकुर, डॉ रीता ठाकुर और सुरेष्ठा ने भी किसानों को कई उपाय बताए।
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