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नूरपुर में मातृ-शिशु अस्पताल अभी हवा में
Updated Wed, 15 Nov 2017 11:38 PM IST
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रितेश महाजन
नूरपुर(कांगड़ा)।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत नूरपुर में 10 करोड़ से बनने वाले मातृ-शिशु अस्पताल के लिए अभी तक साइट ही सिलेक्ट नहीं हो पाई है। हालांकि, 50 बिस्तर क्षमता वाले मातृ-शिशु अस्पताल के नए ब्लॉक का मौजूदा सिविल अस्पताल परिसर में ही निर्माण की योजना है, लेकिन इसके शिलान्यास को दो माह बीतने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग अभी तक साइट सिलेक्शन से जुड़ी कागजी औपचारिकताएं पूरी नहीं करवा पाया है।
13 सितंबर 2017 को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने शिमला में संयुक्त रूप से चंबा-नाहन मेडिकल कॉलेज समेत 12 स्वास्थ्य संस्थानों का एक साथ ऑनलाइन शिलान्यास किया था। इनमें जिला कांगड़ा के टांडा मेडिकल कॉलेज में 200 बिस्तर और नूरपुर के नागरिक अस्पताल में 50 बिस्तर वाले अस्पताल समेत सात मातृ-शिशु अस्पताल शामिल थे। धर्मशाला में खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं परिवहन मंत्री जीएस बाली ने टांडा और नागरिक अस्पताल नूरपुर में प्रस्तावित मदर-चाइल्ड अस्पताल की शिलान्यास पट्टिकाओं का सांकेतिक रूप से अनावरण किया था। मातृ-शिशु अस्पताल के बनने से प्रसव अथवा गर्भावस्था में होने वाली समस्याओं को लेकर महिलाओं व नवजात शिशुओं को इलाज के लिए भटकने से निजात मिलेगी। लेकिन नूरपुर में प्रस्तावित उक्त अस्पताल के निर्माण को लेकर अभी तक स्थल का ही चयन नहीं होने से प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग की केंद्र प्रायोजित प्रोजेक्ट को जमीनी स्तर पर उतारने को लेकर संजीदगी पर सवालिया निशान लग रहा है। इसकी वजह है कि अगस्त 2016 में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने अपने नूरपुर प्रवास के दौरान प्रदेश सरकार की ओर से नागरिक अस्पताल नूरपुर में डायलिसिस सेंटर खोलने का प्रस्ताव भेजने पर स्वीकृति देने की घोषणा की थी। लेकिन प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के उदासीन रवैये के चलते यह मामला सिरे नहीं चढ़ पाया है।
चीफ आर्किटेक्ट ने किया विजिट
मुख्य चिकित्सा अधिकारी कांगड़ा डॉ. आरएस राणा ने बताया कि मातृ-शिशु अस्पताल का निर्माण मौजूदा अस्पताल परिसर में करने की योजना है। इसके लिए चीफ आर्किटेक्ट स्पॉट विजिट भी कर चुके हैं।
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अतिरिक्त बिस्तर लगाने की जगह नहीं
जहां तक नागरिक अस्पताल नूरपुर में प्रस्तावित 50 बिस्तर वाले मातृ-शिशु ब्लाक के निर्माण का सवाल है तो इसका दर्जा 100 से बढ़ाकर 135 बिस्तर करने के बाद यहां अतिरिक्त बेड लगाने तक की जगह नहीं है। नूरपुर अस्पताल के परिसर में सिर्फ शवगृह, कैंटीन और ब्लड स्टोरेज सेंटर की तरफ ही कुछ जगह खाली है, जहां पर खासकर सर्दियों में चेकअप व इलाज के लिए आने वाले मरीज और उनके तामीरदार बैठते हैं। यही अस्पताल परिसर में एकमात्र ग्रीन एरिया नजर आता है। ऐसे में अस्पताल परिसर में 50 बिस्तर वाले नए मातृ-शिशु ब्लॉक के निर्माण पर सवालिया निशान लग रहा है।
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नूरपुर(कांगड़ा)।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत नूरपुर में 10 करोड़ से बनने वाले मातृ-शिशु अस्पताल के लिए अभी तक साइट ही सिलेक्ट नहीं हो पाई है। हालांकि, 50 बिस्तर क्षमता वाले मातृ-शिशु अस्पताल के नए ब्लॉक का मौजूदा सिविल अस्पताल परिसर में ही निर्माण की योजना है, लेकिन इसके शिलान्यास को दो माह बीतने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग अभी तक साइट सिलेक्शन से जुड़ी कागजी औपचारिकताएं पूरी नहीं करवा पाया है।
13 सितंबर 2017 को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने शिमला में संयुक्त रूप से चंबा-नाहन मेडिकल कॉलेज समेत 12 स्वास्थ्य संस्थानों का एक साथ ऑनलाइन शिलान्यास किया था। इनमें जिला कांगड़ा के टांडा मेडिकल कॉलेज में 200 बिस्तर और नूरपुर के नागरिक अस्पताल में 50 बिस्तर वाले अस्पताल समेत सात मातृ-शिशु अस्पताल शामिल थे। धर्मशाला में खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं परिवहन मंत्री जीएस बाली ने टांडा और नागरिक अस्पताल नूरपुर में प्रस्तावित मदर-चाइल्ड अस्पताल की शिलान्यास पट्टिकाओं का सांकेतिक रूप से अनावरण किया था। मातृ-शिशु अस्पताल के बनने से प्रसव अथवा गर्भावस्था में होने वाली समस्याओं को लेकर महिलाओं व नवजात शिशुओं को इलाज के लिए भटकने से निजात मिलेगी। लेकिन नूरपुर में प्रस्तावित उक्त अस्पताल के निर्माण को लेकर अभी तक स्थल का ही चयन नहीं होने से प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग की केंद्र प्रायोजित प्रोजेक्ट को जमीनी स्तर पर उतारने को लेकर संजीदगी पर सवालिया निशान लग रहा है। इसकी वजह है कि अगस्त 2016 में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने अपने नूरपुर प्रवास के दौरान प्रदेश सरकार की ओर से नागरिक अस्पताल नूरपुर में डायलिसिस सेंटर खोलने का प्रस्ताव भेजने पर स्वीकृति देने की घोषणा की थी। लेकिन प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के उदासीन रवैये के चलते यह मामला सिरे नहीं चढ़ पाया है।
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चीफ आर्किटेक्ट ने किया विजिट
मुख्य चिकित्सा अधिकारी कांगड़ा डॉ. आरएस राणा ने बताया कि मातृ-शिशु अस्पताल का निर्माण मौजूदा अस्पताल परिसर में करने की योजना है। इसके लिए चीफ आर्किटेक्ट स्पॉट विजिट भी कर चुके हैं।
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अतिरिक्त बिस्तर लगाने की जगह नहीं
जहां तक नागरिक अस्पताल नूरपुर में प्रस्तावित 50 बिस्तर वाले मातृ-शिशु ब्लाक के निर्माण का सवाल है तो इसका दर्जा 100 से बढ़ाकर 135 बिस्तर करने के बाद यहां अतिरिक्त बेड लगाने तक की जगह नहीं है। नूरपुर अस्पताल के परिसर में सिर्फ शवगृह, कैंटीन और ब्लड स्टोरेज सेंटर की तरफ ही कुछ जगह खाली है, जहां पर खासकर सर्दियों में चेकअप व इलाज के लिए आने वाले मरीज और उनके तामीरदार बैठते हैं। यही अस्पताल परिसर में एकमात्र ग्रीन एरिया नजर आता है। ऐसे में अस्पताल परिसर में 50 बिस्तर वाले नए मातृ-शिशु ब्लॉक के निर्माण पर सवालिया निशान लग रहा है।