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गांधी और बुद्घ के विचारों से विश्व शांति का खोजा जाएगा रास्ता
Updated Fri, 01 Dec 2017 11:34 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला में दो महात्माओं के विचारों से विश्व शांति के लिए महा मंथन होगा। महात्मा बुद्ध और महात्मा गांधी के अहिंसा के विचारों के बीच से विश्व शांति के मार्ग की तलाश की जाएगी। इसके लिए सीयू में गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति तीन दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन करेगी। सेमिनार का शुभारंभ बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा करेंगे।
केंद्रीय विवि के कुलपति कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री ने प्रेस वार्ता में बताया कि पहले भारतीय विचारों को विश्व में निष्क्रिय समझा जाता था, लेकिन अब विश्व भर के देश भारतीय विचारों को विश्व शांति के लिए महत्वपूर्ण मानने लगे हैं। इसलिए अब देश के महान लोगों के विचारों को व्यावहारिक रूप में अपनाने की जरूरत है।
समिति के कार्यकारिणी सदस्य एवं खादी ग्रामोद्योग के पूर्व चेयरमैन लक्ष्मी दास ने बताया कि गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति गांधी के विचारों पर काम करने वाली संस्था है। इसके चेयरमैन देश के प्रधानमंत्री, जबकि केंद्रीय भाषा एवं संस्कृति मंत्री सचिव होते हैं। समिति के सीयू में आयोजित सेमिनार में देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों से 70 के करीब प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। सेमिनार में पढ़े जाने वाले चयनित शोध पत्रों का प्रकाशन किया जाएगा और देश-विदेश में भेजा जाएगा। इस मौके पर गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के सलाहकार बसंत, सीयू के अकादमिक डीन इंद्रवीन मल्लन और पत्रकारिता विभाग के विभागाध्यक्ष प्रदीप नय्यर आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे।
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धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला में दो महात्माओं के विचारों से विश्व शांति के लिए महा मंथन होगा। महात्मा बुद्ध और महात्मा गांधी के अहिंसा के विचारों के बीच से विश्व शांति के मार्ग की तलाश की जाएगी। इसके लिए सीयू में गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति तीन दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन करेगी। सेमिनार का शुभारंभ बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा करेंगे।
केंद्रीय विवि के कुलपति कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री ने प्रेस वार्ता में बताया कि पहले भारतीय विचारों को विश्व में निष्क्रिय समझा जाता था, लेकिन अब विश्व भर के देश भारतीय विचारों को विश्व शांति के लिए महत्वपूर्ण मानने लगे हैं। इसलिए अब देश के महान लोगों के विचारों को व्यावहारिक रूप में अपनाने की जरूरत है।
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समिति के कार्यकारिणी सदस्य एवं खादी ग्रामोद्योग के पूर्व चेयरमैन लक्ष्मी दास ने बताया कि गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति गांधी के विचारों पर काम करने वाली संस्था है। इसके चेयरमैन देश के प्रधानमंत्री, जबकि केंद्रीय भाषा एवं संस्कृति मंत्री सचिव होते हैं। समिति के सीयू में आयोजित सेमिनार में देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों से 70 के करीब प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। सेमिनार में पढ़े जाने वाले चयनित शोध पत्रों का प्रकाशन किया जाएगा और देश-विदेश में भेजा जाएगा। इस मौके पर गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के सलाहकार बसंत, सीयू के अकादमिक डीन इंद्रवीन मल्लन और पत्रकारिता विभाग के विभागाध्यक्ष प्रदीप नय्यर आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे।
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