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पहाड़ी पर बसे 90 घरों को पैदा हुआ खतरा
Updated Wed, 10 Oct 2018 01:28 AM IST
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भूस्खलन से पहाड़ी पर बसे 90 घरों को खतरा
हर बरसात में लगातार हो रहा भू-स्खलन
अमर उजाला ब्यूरो
गग्गल (कांगड़ा)। उपमंडल कांगड़ा के चार गांवों को हर बरसात में हो रहे भू-स्खलन से खतरा पैदा हो गया है। इसके चलते भड़ियारा, वेद्दी, खडियारा और केटलू आदि गांवों के करीब 90 घरों को खतरा पैदा हो गया है। यह समस्या गज खड्ड में लगातार हो रहे खनन के कारण हो रही है। हालांकि, अब इस क्षेत्र में खनन पर रोक लग चुकी है लेकिन पहले हुए खनन के कारण काफी नुकसान हुआ है। ऐसे में गज खड्ड के कभी भी रौद्र रूप धारण करने की स्थिति में पहाड़ी पर बसे गांवों को खतरा हो सकता है। संघर्ष समिति के प्रधान उधम सिंह डढवाल ने बताया कि इसके बारे में कई बार स्थानीय विधायकों से लेकर मंत्रियों को अवगत करवाया गया, लेकिन आज दिन तक इस समस्या का हल नहीं हुआ। डढवाल ने कहा कि इसके बारे में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर समस्या से अवगत करवाया है। पीएम आफिस से मिले पत्र के अनुसार उन्होंने वन विभाग और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को इस संवेदनशील क्षेत्र की जांच कर उचित कार्रवाई के लिए कहा गया है। वहीं, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भी इस पर जिलाधीश को गंभीरता से विचार करने के लिए कहा है, लेकिन इतना लंबा अरसा बीत जाने के बावजूद आज दिन तक यहां पर हो रहे भू-स्खलन को रोकने के लिए कोई उचित योजना नहीं बनाई गई है।
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हर बरसात में लगातार हो रहा भू-स्खलन
अमर उजाला ब्यूरो
गग्गल (कांगड़ा)। उपमंडल कांगड़ा के चार गांवों को हर बरसात में हो रहे भू-स्खलन से खतरा पैदा हो गया है। इसके चलते भड़ियारा, वेद्दी, खडियारा और केटलू आदि गांवों के करीब 90 घरों को खतरा पैदा हो गया है। यह समस्या गज खड्ड में लगातार हो रहे खनन के कारण हो रही है। हालांकि, अब इस क्षेत्र में खनन पर रोक लग चुकी है लेकिन पहले हुए खनन के कारण काफी नुकसान हुआ है। ऐसे में गज खड्ड के कभी भी रौद्र रूप धारण करने की स्थिति में पहाड़ी पर बसे गांवों को खतरा हो सकता है। संघर्ष समिति के प्रधान उधम सिंह डढवाल ने बताया कि इसके बारे में कई बार स्थानीय विधायकों से लेकर मंत्रियों को अवगत करवाया गया, लेकिन आज दिन तक इस समस्या का हल नहीं हुआ। डढवाल ने कहा कि इसके बारे में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर समस्या से अवगत करवाया है। पीएम आफिस से मिले पत्र के अनुसार उन्होंने वन विभाग और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को इस संवेदनशील क्षेत्र की जांच कर उचित कार्रवाई के लिए कहा गया है। वहीं, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भी इस पर जिलाधीश को गंभीरता से विचार करने के लिए कहा है, लेकिन इतना लंबा अरसा बीत जाने के बावजूद आज दिन तक यहां पर हो रहे भू-स्खलन को रोकने के लिए कोई उचित योजना नहीं बनाई गई है।