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इस बार भी सता के साथ चला धर्मशाला
Updated Tue, 19 Dec 2017 12:14 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। विधानसभा क्षेत्र धर्मशाला ने सोमवार को एक बार फिर दिखा दिया कि वे प्रदेश की सत्ता के साथ चलती है। हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के साथ ही धर्मशाला से भी पूर्व मंत्री किशन कपूर की वापसी सत्ता में हुई है। पिछले करीब तीन दशकों में 1993 की किशन कपूर की जीत को छोड़ दिया जाए, तो धर्मशाला विधानसभा क्षेत्र ने एक बार भी विपक्ष की कुर्सी नहीं देखी है।
सोमवार को धर्मशाला में कांग्रेस प्रत्याशी सुधीर शर्मा को जहां अपने राजनीतिक करियर की जीत का चौका लगाने से रोका है, वहीं किशन कपूर ने धर्मशाला से पांचवीं बार जीत दर्ज करवाई। किशन कपूर ने सुधीर से पिछली हार का हिसाब चुकता कर लिया। इससे पूर्व किशन कपूर ने वर्ष 1990, 1993 और 1998 में भाजपा टिकट से चुनाव जीता था। इसके बाद 2003 में कांग्रेस की टिकट पर चंद्रेश कुमारी ने किशन कपूर का तिलिस्म तोड़ते हुए जीत दर्ज की, जबकि 2007 में किशन कपूर अपनी हार का बदला लेकर फिर हिमाचल विस पहुंचे, तो साल 2012 में बैजनाथ सीट रिजर्व से धर्मशाला विस क्षेत्र से चुनाव लड़ा और जीत की हैट्रिक लगाई। इससे पूर्व सुधीर शर्मा ने बैजनाथ विस से 2003 और 2007 का चुनाव जीता था।
सोमवार को घोषित चुनाव परिणामों में किशन कपूर ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार सुधीर शर्मा को 2997 वोटों से पराजित किया। भाजपा के उम्मीदवार कपूर को 26050, जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार सुधीर को 23053 वोट मिले। निर्दलीय उम्मीदवारों में पवन चौधरी को 471, अश्वनी काजल को 307, निशा कटोच को 133, अनूप धीमान को 273, कमल कुमार को 1655, दिग्विजय पुरी को 285, पंकज कुमार को 1726, रविंद्र राणा को 2127, विकास चौधरी, 281 और सुभाष चंद शुक्ला 127 मत मिले, जबकि 525 व्यक्तियों ने नोटा का प्रयोग किया।
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अपनों ने डुबोई सुधीर की सत्ता
धर्मशाला विधानसभा क्षेत्र में सुधीर के समक्ष कांग्रेस के ही पंकज कुमार, दिग्विजय पुरी ने चुनौती पेश की। पंकज को 1726 वोट मिले जो सुधीर के लिए घातक साबित हुए। कांग्रेस के परंपरागत वोट बैंक में प्रत्याशी रविंद्र राणा ने सेंध लगा दी। अपनों की ही नाराजगी के चलते पिछली बार किशन कपूर चुनाव हार गए थे।
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धर्मशाला। विधानसभा क्षेत्र धर्मशाला ने सोमवार को एक बार फिर दिखा दिया कि वे प्रदेश की सत्ता के साथ चलती है। हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के साथ ही धर्मशाला से भी पूर्व मंत्री किशन कपूर की वापसी सत्ता में हुई है। पिछले करीब तीन दशकों में 1993 की किशन कपूर की जीत को छोड़ दिया जाए, तो धर्मशाला विधानसभा क्षेत्र ने एक बार भी विपक्ष की कुर्सी नहीं देखी है।
सोमवार को धर्मशाला में कांग्रेस प्रत्याशी सुधीर शर्मा को जहां अपने राजनीतिक करियर की जीत का चौका लगाने से रोका है, वहीं किशन कपूर ने धर्मशाला से पांचवीं बार जीत दर्ज करवाई। किशन कपूर ने सुधीर से पिछली हार का हिसाब चुकता कर लिया। इससे पूर्व किशन कपूर ने वर्ष 1990, 1993 और 1998 में भाजपा टिकट से चुनाव जीता था। इसके बाद 2003 में कांग्रेस की टिकट पर चंद्रेश कुमारी ने किशन कपूर का तिलिस्म तोड़ते हुए जीत दर्ज की, जबकि 2007 में किशन कपूर अपनी हार का बदला लेकर फिर हिमाचल विस पहुंचे, तो साल 2012 में बैजनाथ सीट रिजर्व से धर्मशाला विस क्षेत्र से चुनाव लड़ा और जीत की हैट्रिक लगाई। इससे पूर्व सुधीर शर्मा ने बैजनाथ विस से 2003 और 2007 का चुनाव जीता था।
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सोमवार को घोषित चुनाव परिणामों में किशन कपूर ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार सुधीर शर्मा को 2997 वोटों से पराजित किया। भाजपा के उम्मीदवार कपूर को 26050, जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार सुधीर को 23053 वोट मिले। निर्दलीय उम्मीदवारों में पवन चौधरी को 471, अश्वनी काजल को 307, निशा कटोच को 133, अनूप धीमान को 273, कमल कुमार को 1655, दिग्विजय पुरी को 285, पंकज कुमार को 1726, रविंद्र राणा को 2127, विकास चौधरी, 281 और सुभाष चंद शुक्ला 127 मत मिले, जबकि 525 व्यक्तियों ने नोटा का प्रयोग किया।
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अपनों ने डुबोई सुधीर की सत्ता
धर्मशाला विधानसभा क्षेत्र में सुधीर के समक्ष कांग्रेस के ही पंकज कुमार, दिग्विजय पुरी ने चुनौती पेश की। पंकज को 1726 वोट मिले जो सुधीर के लिए घातक साबित हुए। कांग्रेस के परंपरागत वोट बैंक में प्रत्याशी रविंद्र राणा ने सेंध लगा दी। अपनों की ही नाराजगी के चलते पिछली बार किशन कपूर चुनाव हार गए थे।