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एकल नारी के लिए बजट में बनें अलग मद : राधा
Updated Sun, 29 Oct 2017 12:03 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। एकल नारी शक्ति संगठन की राष्ट्रीय कमेटी सदस्य राधा रघवाल ने धर्मशाला में प्रेस वार्ता में कहा कि एकल नारी प्रदेश में उसी राजनीतिक संगठन को समर्थन देगा, जो उनकी मांगें मानेगा। उन्होंने कहा कि संगठन ने एकल नारियों की समस्याओं और मांगों के संबंध में 11 सूत्री मांग पत्र तैयार किया है। साथ ही एकल नारी की मांगों को समर्थन देने के लिए आम लोगों के बीच में एक हस्ताक्षर अभियान भी छेड़ा है। राजनीतिक दलों के नेताओं और उम्मीदवारों को यह मांग पत्र सौंपा जाएगा।
उन्होंने कहा कि संगठन की मुख्य मांगों में पंचायतों में अलग से स्वायत्त न्याय पंचायत की स्थापना और गृह कर की रसीद पति और पत्नी दोनों के नाम जारी करने की मांग शामिल है। राजस्थान, उत्तराखंड और झारखंड की तर्ज पर राज्य सरकार परित्यक्त महिलाओं को परिभाषित कर उनके लिए नीति बनाने, सभी परित्यक्त महिलाओं को अलग से परिवार समझ कर राशन कार्ड देने, बच्चों के मां-बाप मानसिक और शारीरिक तौर पर विकलांग हैं, उनको भी मदर टैरेसा असहाय संबल योजना से जोड़ने सहित किन्नरों के सामाजिक उत्थान के लिए कानून बनाने की मांग उठाई है। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश में मनरेगा में 200 दिन का रोजगार देने, एकल महिलाओं के लिए राज्य सरकार के बजट में अलग मद बनाने, डिपो में मिलने वाले राशन की मात्रा में बढ़ोतरी और रिफाइंड के स्थान पर सरसों का तेल उपलब्ध करवाने की मांग रखी है। इस दौरान नीलम, तृप्ता देवी, सुनीता, रंजना, कुम्मो दवी और प्रतिभा आदि मौजूद रहीं।
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धर्मशाला। एकल नारी शक्ति संगठन की राष्ट्रीय कमेटी सदस्य राधा रघवाल ने धर्मशाला में प्रेस वार्ता में कहा कि एकल नारी प्रदेश में उसी राजनीतिक संगठन को समर्थन देगा, जो उनकी मांगें मानेगा। उन्होंने कहा कि संगठन ने एकल नारियों की समस्याओं और मांगों के संबंध में 11 सूत्री मांग पत्र तैयार किया है। साथ ही एकल नारी की मांगों को समर्थन देने के लिए आम लोगों के बीच में एक हस्ताक्षर अभियान भी छेड़ा है। राजनीतिक दलों के नेताओं और उम्मीदवारों को यह मांग पत्र सौंपा जाएगा।
उन्होंने कहा कि संगठन की मुख्य मांगों में पंचायतों में अलग से स्वायत्त न्याय पंचायत की स्थापना और गृह कर की रसीद पति और पत्नी दोनों के नाम जारी करने की मांग शामिल है। राजस्थान, उत्तराखंड और झारखंड की तर्ज पर राज्य सरकार परित्यक्त महिलाओं को परिभाषित कर उनके लिए नीति बनाने, सभी परित्यक्त महिलाओं को अलग से परिवार समझ कर राशन कार्ड देने, बच्चों के मां-बाप मानसिक और शारीरिक तौर पर विकलांग हैं, उनको भी मदर टैरेसा असहाय संबल योजना से जोड़ने सहित किन्नरों के सामाजिक उत्थान के लिए कानून बनाने की मांग उठाई है। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश में मनरेगा में 200 दिन का रोजगार देने, एकल महिलाओं के लिए राज्य सरकार के बजट में अलग मद बनाने, डिपो में मिलने वाले राशन की मात्रा में बढ़ोतरी और रिफाइंड के स्थान पर सरसों का तेल उपलब्ध करवाने की मांग रखी है। इस दौरान नीलम, तृप्ता देवी, सुनीता, रंजना, कुम्मो दवी और प्रतिभा आदि मौजूद रहीं।
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