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नए फोरलेन विवाद पर एसडीएम की पहल को सराहा
Updated Sun, 25 Nov 2018 11:28 PM IST
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फोरलेन के विवाद पर एसडीएम
ज्वालामुखी की पहल को सराहा
सात पंचायतों ने दी चेतावनी, प्रस्तावित मार्ग से ही बने फोरलेन
अमर उजाला ब्यूरो
ज्वालामुखी (कांगड़ा)। शिमला-मटौर फोरलेन के बदले गए सर्वेक्षण पर एसडीएम ज्वालामुखी की ओर से एनएचएआई प्रोजेक्ट निदेशक से नए सर्वे पर मांगे गए जवाब की ग्रामीणों ने सराहना की है। इसके साथ ही ग्रामीणों ने यह भी चेतावनी दी है कि लोगों के हितों को ध्यान में रखकर ही प्रस्तावित मार्ग एनएच 88 से ही फोरलेन को गुजारा जाए और आगे की कार्रवाई जल्द शुरू की जाए। घुरकाल पंचायत के लोगों के अनुसार ग्रामीणों के पुराने मकान प्रस्तावित फोरलेन मार्ग पर आ रहे थे, जिस वजह से उन्होंने उसी पंचायत में और जमीन खरीदी, ताकि वहां घर बनाया जा सके। लेकिन जब से फोरलेन का मार्ग बदला और नया सर्वे किया गया, उनकी नींद हराम हो गई है, क्योंकि पहले पुराना मकान फोरलेन जद में जा रहा था पर अब नहीं, अब जो जमीन खरीदी गई है उसको जाने के लिए कोई रास्ता ही नहीं बचा। इस तरह जमीन की कीमत ही शून्य हो गई। इस वजह से उनके पैसे भी डूब रहे हैं और बिना रास्ते की जमीन कोई खरीदेगा भी नहीं। प्रतिनिधियों ने प्रशासन और मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि प्रस्तावित भूमि का चयन करते हुए फोरलेन की मंजूरी दी जाए और नए सर्वे, जिसमें उनकी उपजाऊ और कृषि योग्य भूमि, मकान, संस्थान जा रहे हैं, उसे सिरे से खारिज किया जाए, अन्यथा ग्रामीण आंदोलन की राह अपनाएंगे।
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ज्वालामुखी की पहल को सराहा
सात पंचायतों ने दी चेतावनी, प्रस्तावित मार्ग से ही बने फोरलेन
अमर उजाला ब्यूरो
ज्वालामुखी (कांगड़ा)। शिमला-मटौर फोरलेन के बदले गए सर्वेक्षण पर एसडीएम ज्वालामुखी की ओर से एनएचएआई प्रोजेक्ट निदेशक से नए सर्वे पर मांगे गए जवाब की ग्रामीणों ने सराहना की है। इसके साथ ही ग्रामीणों ने यह भी चेतावनी दी है कि लोगों के हितों को ध्यान में रखकर ही प्रस्तावित मार्ग एनएच 88 से ही फोरलेन को गुजारा जाए और आगे की कार्रवाई जल्द शुरू की जाए। घुरकाल पंचायत के लोगों के अनुसार ग्रामीणों के पुराने मकान प्रस्तावित फोरलेन मार्ग पर आ रहे थे, जिस वजह से उन्होंने उसी पंचायत में और जमीन खरीदी, ताकि वहां घर बनाया जा सके। लेकिन जब से फोरलेन का मार्ग बदला और नया सर्वे किया गया, उनकी नींद हराम हो गई है, क्योंकि पहले पुराना मकान फोरलेन जद में जा रहा था पर अब नहीं, अब जो जमीन खरीदी गई है उसको जाने के लिए कोई रास्ता ही नहीं बचा। इस तरह जमीन की कीमत ही शून्य हो गई। इस वजह से उनके पैसे भी डूब रहे हैं और बिना रास्ते की जमीन कोई खरीदेगा भी नहीं। प्रतिनिधियों ने प्रशासन और मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि प्रस्तावित भूमि का चयन करते हुए फोरलेन की मंजूरी दी जाए और नए सर्वे, जिसमें उनकी उपजाऊ और कृषि योग्य भूमि, मकान, संस्थान जा रहे हैं, उसे सिरे से खारिज किया जाए, अन्यथा ग्रामीण आंदोलन की राह अपनाएंगे।