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शिमला-मटौर फोरलेन के बदले सर्वेक्षण का विरोध
Updated Sun, 18 Nov 2018 11:52 PM IST
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ज्वालामुखी (कांगड़ा)। शिमला-मटौर फोरलेन के ज्वालामुखी उपमंडल के ठेहडा से भड़ोली पुल तक बदले गए सर्वेक्षण का गांववासियों ने विरोध किया है। रविवार को प्रदर्शनकारियों ने जहां एनएच अथारिटी ो कोसा, वहीं जिला प्रशासन के विरुद्घ भी जमकर नारेबाजी की। साथ ही लोगों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि इस बार उनका विरोध शांतिपूर्वक था। अगर फिर भी उनकी मांग को पूरा नहीं किया गया तो वे आत्मदाह करने से भी गुरेज नहीं करेंगे।
इस दौरान घुरकाल पंचायत प्रधान शुभ कौर, उपप्रधान विनोद कुमार, चरण दास, कपिल देव, मिलाप सिंह, आशीष पटियाल, व्यापार मंडल अध्यक्ष किशोर कुमार, सुदेश वालिया, जसविंद्र सिंह, परवीन कुमार, कमल सिंह, देवराज, संजय, सुरेश गिल, सुरजीत राणा, तरसेम सिंह, मंजीत सिंह, उत्तम, सुरेंद्र, सौरभ राणा, बलबीर राणा, मीरा देवी, बीना, वनिता, संजीव, सोनू राणा, विजेंद्र सिंह, भगवान दास, हेमराज, सुनील, निर्मल, करनैल, संजय, नवजोत और नवदीप आदि ने आरोप जड़े कि नए सर्वे से उनकी उपजाऊ भूमि फोरलेन की जद में आए जाएगी।
उन्होंने कहा कि उनकी रोजी-रोटी का साधन खेतीबाड़ी के अलावा और कोई भी नहीं है। साथ ही कहा कि कुछ रसूखदारों के दबाव के कारण इस सर्वे को बदला गया है। उन्होंने कहा कि सर्वे ठेहड़ा से भड़ोली पुल तक बदल दिया गया है, जिसका सभी को एतराज है। क्योंकि इस सर्वे में उपजाऊ कृषि भूमि और मकान तबाह हो जाएंगे। वहीं इससे पहले ग्रामीणों ने सर्वे के विरोध में एसडीएम ज्वालामुखी को भी ज्ञापन सौंपा था, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
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पहले वाला यह था सर्वे
पहले वाला सर्वे एनएच-88 से होकर गुजर रहा था, जिसमें किसी को एतराज नहीं था और दो साल से सर्वे चल रहा था, पर अब कुछ रसूखदारों की मिलीभगत से अचानक सर्वे बदल दिया गया, जिस वजह से पूरे गांव उजड़ जाएंगे। गरीब इंसान तो आत्महत्या करने पर मजबूर हो जाएंगे। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जो सर्वे पहले किया गया था, उसी को रखा जाए।
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इस दौरान घुरकाल पंचायत प्रधान शुभ कौर, उपप्रधान विनोद कुमार, चरण दास, कपिल देव, मिलाप सिंह, आशीष पटियाल, व्यापार मंडल अध्यक्ष किशोर कुमार, सुदेश वालिया, जसविंद्र सिंह, परवीन कुमार, कमल सिंह, देवराज, संजय, सुरेश गिल, सुरजीत राणा, तरसेम सिंह, मंजीत सिंह, उत्तम, सुरेंद्र, सौरभ राणा, बलबीर राणा, मीरा देवी, बीना, वनिता, संजीव, सोनू राणा, विजेंद्र सिंह, भगवान दास, हेमराज, सुनील, निर्मल, करनैल, संजय, नवजोत और नवदीप आदि ने आरोप जड़े कि नए सर्वे से उनकी उपजाऊ भूमि फोरलेन की जद में आए जाएगी।
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उन्होंने कहा कि उनकी रोजी-रोटी का साधन खेतीबाड़ी के अलावा और कोई भी नहीं है। साथ ही कहा कि कुछ रसूखदारों के दबाव के कारण इस सर्वे को बदला गया है। उन्होंने कहा कि सर्वे ठेहड़ा से भड़ोली पुल तक बदल दिया गया है, जिसका सभी को एतराज है। क्योंकि इस सर्वे में उपजाऊ कृषि भूमि और मकान तबाह हो जाएंगे। वहीं इससे पहले ग्रामीणों ने सर्वे के विरोध में एसडीएम ज्वालामुखी को भी ज्ञापन सौंपा था, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
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पहले वाला यह था सर्वे
पहले वाला सर्वे एनएच-88 से होकर गुजर रहा था, जिसमें किसी को एतराज नहीं था और दो साल से सर्वे चल रहा था, पर अब कुछ रसूखदारों की मिलीभगत से अचानक सर्वे बदल दिया गया, जिस वजह से पूरे गांव उजड़ जाएंगे। गरीब इंसान तो आत्महत्या करने पर मजबूर हो जाएंगे। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जो सर्वे पहले किया गया था, उसी को रखा जाए।