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रेलवे बोर्ड की जमीन पर बसे प्रवासी मजदूरों के कट रहे चालान
Updated Tue, 21 Nov 2017 11:42 PM IST
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अनिल अवस्थी
पंचरुखी (कांगड़ा)। पंचरुखी में रेलवे बोर्ड की जमीन पर कब्जा जमाए बैठे प्रवासियों के अब चालान कटने लगे हैं। ये लोग रेलवे बोर्ड का कर्मचारी बताकर इन प्रवासियों के 100 रुपये की पर्ची काटकर जुर्माना कर रहे हैं। अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि यह लोग रेलवे बोर्ड के कर्मचारी हैं या कोई ओर। इससे प्रवासियों के साथ स्थानीय लोग भी सकते में है। हालांकि काटे गए चालान की पर्ची पर एक तरफ भारतीय रेल और दूसरी तरफ रेल सुरक्षा बल का नाम
लिखा हुआ है। रेलवे बोर्ड की जमीन पर 100 रुपये का चालान काटने का मामला पहली बार सामने आ रहा है। इससे किसी फर्जीवाड़े की भी बू आ रही है। बड़ी बात तो यह है कि स्थानीय स्टेशन मास्टर को इसके बारे कोई जानकारी नहीं है। इससे यह चालान संदेह के घेरे में आने लगे हैं। बताया जाता है कि यह सिलसिला काफी समय से चला है, जबकि पठानकोट से जोगेंद्रनगर तक कई प्रवासी रेलवे बोर्ड की जमीन पर कब्जा जमाए बैठे हुए हैं, लेकिन कानूनन यह रेलवे बोर्ड के जमीन पर नहीं बैठ सकते हैं, तो फिर यह चालान कैसे कटने लगे हैं। पता चला है कि रेलवे बोर्ड का कर्मचारी बताने वाले यह लोग महीने या दो महीने में आकर हर एक प्रवासी का 100 रुपये का चालान काट कर चले जाते हैं। इस बात को लेकर भी हैरानी तब हुई जब पता चला कि रेलवे बोर्ड के लोग यहां पहुंच कर प्रवासियों को यह कह कर धमकाते हैं कि उन्हें यहां से हटा दिया जाएगा। रहना है तो 100 रुपये की पर्ची कटवानी पड़ेगी। कटे चालान की पर्ची में किसी अधिकारी मुहर तक भी नहीं है। उधर, पंचरुखी स्टेशन मास्टर आरसी मक्कड़ ने कहा कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है।
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पंचरुखी (कांगड़ा)। पंचरुखी में रेलवे बोर्ड की जमीन पर कब्जा जमाए बैठे प्रवासियों के अब चालान कटने लगे हैं। ये लोग रेलवे बोर्ड का कर्मचारी बताकर इन प्रवासियों के 100 रुपये की पर्ची काटकर जुर्माना कर रहे हैं। अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि यह लोग रेलवे बोर्ड के कर्मचारी हैं या कोई ओर। इससे प्रवासियों के साथ स्थानीय लोग भी सकते में है। हालांकि काटे गए चालान की पर्ची पर एक तरफ भारतीय रेल और दूसरी तरफ रेल सुरक्षा बल का नाम
लिखा हुआ है। रेलवे बोर्ड की जमीन पर 100 रुपये का चालान काटने का मामला पहली बार सामने आ रहा है। इससे किसी फर्जीवाड़े की भी बू आ रही है। बड़ी बात तो यह है कि स्थानीय स्टेशन मास्टर को इसके बारे कोई जानकारी नहीं है। इससे यह चालान संदेह के घेरे में आने लगे हैं। बताया जाता है कि यह सिलसिला काफी समय से चला है, जबकि पठानकोट से जोगेंद्रनगर तक कई प्रवासी रेलवे बोर्ड की जमीन पर कब्जा जमाए बैठे हुए हैं, लेकिन कानूनन यह रेलवे बोर्ड के जमीन पर नहीं बैठ सकते हैं, तो फिर यह चालान कैसे कटने लगे हैं। पता चला है कि रेलवे बोर्ड का कर्मचारी बताने वाले यह लोग महीने या दो महीने में आकर हर एक प्रवासी का 100 रुपये का चालान काट कर चले जाते हैं। इस बात को लेकर भी हैरानी तब हुई जब पता चला कि रेलवे बोर्ड के लोग यहां पहुंच कर प्रवासियों को यह कह कर धमकाते हैं कि उन्हें यहां से हटा दिया जाएगा। रहना है तो 100 रुपये की पर्ची कटवानी पड़ेगी। कटे चालान की पर्ची में किसी अधिकारी मुहर तक भी नहीं है। उधर, पंचरुखी स्टेशन मास्टर आरसी मक्कड़ ने कहा कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है।
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