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सोशल मीडिया से बताई जा रही सरकारी स्कूलों की गतिविधियां

Sun, 29 Apr 2018 12:14 AM IST
Updated Sun, 29 Apr 2018 12:14 AM IST
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सोशल मीडिया से बताई जा रही सरकारी स्कूलों की गतिविधियां
सोशल मीडिया से बताई जा रहीं सरकारी स्कूलों की गतिविधियां
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बंडोल स्कूल की गतिविधियां डॉक्यूमेंट्री में कैद
बारह मिनट की डॉक्यूमेंट्री बनाकर सोशल मीडिया में की जारी
राकेश भारद्वाज
धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश में प्राथमिक स्कूलों में घट रही बच्चों की संख्या और अभिभावकों के सरकारी स्कूलों से उठ रहे विश्वास को फिर से लौटाने के लिए अब शिक्षा विभाग ने सोशल मीडिया का सहारा लिया है। इसके तहत जिला कांगड़ा की आदर्श प्राथमिक पाठशाला बंडोल की गतिविधियों पर आधारित करीब 12 मिनट की डॉक्यूमेंट्री बनाकर इसे सोशल मीडिया में अपलोड किया गया है। डॉक्यूमेंट्री में अध्यापक सुनील धीमान के बच्चों को पढ़ाने के तरीके बताए गए हैं, जिसमें वे बच्चों को किताबी ज्ञान के बजाय व्यावहारिक रूप से शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। शिक्षा विभाग ने इस डॉक्यूमेंट्री को सभी व्हाट्सएप ग्रुप में भी जारी किया है, जिसे देखकर अन्य अध्यापक भी बच्चों को व्यावहारिक शिक्षा प्रदान करने के टिप्स हासिल कर सकें।

जिला कांगड़ा की राजकीय प्राथमिक पाठशाला बंडोल को आदर्श विद्यालय बनाया गया है। विद्यालय में अध्यापक सुनील धीमान बच्चों को गीत-संगीत के माध्यम से जहां पहाड़े सिखा रहे हैं। वहीं पर्यावरण संरक्षण के लिए वे बच्चों को प्रकृति से बातचीत के तरीके बताते दिख रहे हैं। इसके अलावा गाय का प्रस्ताव पुस्तकों और कॉपी तक सीमित न रखकर उन्हें साक्षात रूप में गाय को दिखाकर गाय की विशेषताएं बताते नजर आ रहे हैं। सुनील धीमान बच्चों को पुस्तकों के बजाय पढ़ाई को रोचक बनाने के लिए व्यावहारिक शिक्षा प्रदान करते हैं। इसके लिए वे विषय से संबंधित सामग्री का उपयोग करते हैं। साथ ही संबंधित लोगों से भी मिलवाते नजर आते हैं। करीब 12 मिनट की इस डॉक्यूमेंट्री को सोशल मीडिया में अपलोड कर दिया गया है। साथ ही सभी स्कूलों के अध्यापकों को इसे देखकर बच्चों को पढ़ाने के टिप्स लेने के निर्देश जारी किए गए हैं। उधर, प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक कांगड़ा दीपक किनायत ने बताया कि बंडोल स्कूल की मुख्य अध्यापिका सरोज और अध्यापक सुनील धीमान बच्चों को पारंपरिक तरीकों से पढ़ाई के बजाय व्यावहारिक शिक्षा देने का उम्दा काम कर रहे हैं। इसकी डॉक्यूमेंट्री बनाकर अन्य स्कूलों के अध्यापकों को भेजी गई है। अध्यापकों से इस डॉक्यूमेंट्री को देखकर बच्चों को पढ़ाने का आह्वान किया गया है। इसके अलावा केंद्र मुख्य अध्यापकों के लिए विशेष वर्कशॉप भी लगाई जाएगी।
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