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मां के दूध का महत्व बताया
Updated Sat, 24 Feb 2018 12:17 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। स्तनपान न केवल शिशु के लिए सर्वोत्तम आहार है, बल्कि यह बाह्य भोज्य पदार्थों में मौजूद संक्रमणों के खिलाफ बच्चों का सुरक्षा कवच है। यह जानकारी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के कला जत्थों ने गीत एवं नाटकों के माध्यम से मां ‘एक संकल्प’ कार्यक्रम बारे में कांगड़ा जिला के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में चलाए गए अभियान के तहत दी।
कला जत्थों ने बताया कि मां के दूध में शिशु के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्व निश्चित अनुपात में मौजूद होते हैं। मां का दूध शिशु में जीवन भर के लिए कई रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर देता है। उन्होंने बताया कि छह माह तक शिशु के पानी की जरूरत भी मां के दूध से ही पूरी हो जाती है, उसे बाहर से पानी पिलाने की जरूरत नहीं होती है। उन्होंने बताया कि पानी देने से शिशु की स्तनपान की इच्छा कम हो जाती है और अन्य कई संक्रमण जैसे दस्त आदि होने का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि मां का दूध पीने वाले बच्चों का मानसिक विकास स्तनपान न करने वाले बच्चों की अपेक्षा अधिक होता है। मां का दूध बच्चे को आसानी से पच जाता है और शिशु में कब्ज की शिकायत नहीं रहती है। कलाकारों ने गीतों और नाटकों के जरिये लोगों को जननी शिशु सुरक्षा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान, परिवार नियोजन, मां एक संकल्प, व्यापक गर्भपात देखभाल, कॉल सेंटर 104 तथा दूषित पानी से होने वाले पानी रोगों से सुरक्षा उपायों के बारे जानकारी दी।
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धर्मशाला। स्तनपान न केवल शिशु के लिए सर्वोत्तम आहार है, बल्कि यह बाह्य भोज्य पदार्थों में मौजूद संक्रमणों के खिलाफ बच्चों का सुरक्षा कवच है। यह जानकारी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के कला जत्थों ने गीत एवं नाटकों के माध्यम से मां ‘एक संकल्प’ कार्यक्रम बारे में कांगड़ा जिला के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में चलाए गए अभियान के तहत दी।
कला जत्थों ने बताया कि मां के दूध में शिशु के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्व निश्चित अनुपात में मौजूद होते हैं। मां का दूध शिशु में जीवन भर के लिए कई रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर देता है। उन्होंने बताया कि छह माह तक शिशु के पानी की जरूरत भी मां के दूध से ही पूरी हो जाती है, उसे बाहर से पानी पिलाने की जरूरत नहीं होती है। उन्होंने बताया कि पानी देने से शिशु की स्तनपान की इच्छा कम हो जाती है और अन्य कई संक्रमण जैसे दस्त आदि होने का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि मां का दूध पीने वाले बच्चों का मानसिक विकास स्तनपान न करने वाले बच्चों की अपेक्षा अधिक होता है। मां का दूध बच्चे को आसानी से पच जाता है और शिशु में कब्ज की शिकायत नहीं रहती है। कलाकारों ने गीतों और नाटकों के जरिये लोगों को जननी शिशु सुरक्षा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान, परिवार नियोजन, मां एक संकल्प, व्यापक गर्भपात देखभाल, कॉल सेंटर 104 तथा दूषित पानी से होने वाले पानी रोगों से सुरक्षा उपायों के बारे जानकारी दी।
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