Jairam Thakur: नेता प्रतिपक्ष बोले- आजादी की लड़ाई को आवाज देने वाले वंदे मातरम का विरोध करना अपराध
पूर्व मुख्यमंत्री और नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार आने के बात जब वंदे मातरम गीत को ज्यादा से ज्यादा जगह राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रमों और उत्सवों में गाने का नियम बना तो इस पर कुछ पार्टियों ने एतराज जताया। कांग्रेस सरकार जिन भी राज्यों में थी, वहां पर इसका विरोध किया गया। पढ़ें पूरी खबर...
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राजधानी शिमला में शुक्रवार को राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के सृजन के 150 वर्ष पूरे होने पर भाजपा ने कार्यक्रम का आयोजन किया। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि वंदे मातरम भारत के स्वतंत्रता संग्राम का वह अमर गीत है, जिसने करोड़ों भारतीयों में अद्भुत देशभक्ति, साहस और आत्मबल का संचार किया। इसका इतिहास, रचना-पृष्ठभूमि और स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कहा कि केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार आने के बात जब वंदे मातरम गीत को ज्यादा से ज्यादा जगह राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रमों और उत्सवों में गाने का नियम बना तो इस पर कुछ पार्टियों ने एतराज जताया। कांग्रेस सरकार जिन भी राज्यों में थी, वहां पर इसका विरोध किया गया। देश की आजादी की लड़ाई में जीत और जोश का उद्गार बनने वाला इस गीत का विरोध करना तो दूर विरोध करने की बात सोचना भी किसी अपराध से कम नहीं है। वंदे मातरम के विरोध को स्वर देने वालों में कांग्रेस भी शामिल थी। 2019 में जब कुछ समय के लिए मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आई तो सचिवालय में वंदे मातरम गाने पर रोक ही लगा दी गई थी। अन्य प्रदेशों में भी किसी न किसी तरह वंदे मातरम का विरोध कांग्रेस और उसके सहयोगी करते रहते हैं। जबकि संविधान के अनुच्छेद 51 (ए) में संविधान का पालन, राष्ट्रध्वज, राष्ट्रगान का आदर व राष्ट्रीय आंदोलन के प्रेरक उच्च आदर्शों का पालन मूल कर्तव्य हैं।
पूर्व केंद्रीय मंत्री व हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि भारत की एकता, अखंडता, एकात्मकता व स्वाधीनता के महायज्ञ में राष्ट्रनायकों को प्रेरित करने में राष्ट्रगीत वंदे मातरम का योगदान अनुपम और अतुलनीय है। आज जब राष्ट्रगीत अपनी 150 वर्ष की स्वर्णिम गौरवगाथा के पड़ाव पर है तो हमें स्वाधीनता, राष्ट्रनायकों व महानुभावों का इस गीत को भारत की आत्मा में बसाने के लिए अपनी कृतज्ञता ज्ञापित करना चाहिए। वंदे मातरम सिर्फ हमारा राष्ट्रगीत नहीं, बल्कि जीते जागते राष्ट्र की आत्मा है। आज राष्ट्रीय गीत की 150वीं वर्षगांठ सिर्फ इतिहास को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि स्वदेशी के संकल्प को मन-कर्म-वचन से आत्मसात करने का क्षण है। इसकी आधारशिला पर विकसित भारत की भव्य प्रतिमा हमें गौरवान्वित करेगी।
मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने कहा कि प्रदेश के भाजपा नेता आपस में बंट गए हैं। उनकी आपसी लड़ाई खुले तौर पर सबके सामने आ गई है। भाजपा नेता अलग-अलग स्थानों का दौरा कर रहे हैं और उनके समर्थक अपने-अपने नेता को आगे बढ़ाने की कोशिश में जुटे हैं।
उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कांगड़ा का दौरा किया और मीडिया के जरिए लोगों को पता लगा कि कैसे वो कुछ विधायकों के साथ बैठक कर रहे हैं। दूसरी तरफ अनुराग ठाकुर भी दौरा कर रहे हैं और प्रदेश में जिस प्रकार से दोनों तरफ से अपने लीडर को आगे बढ़ाने की बात नारेबाजी के साथ चल रही है, उससे साफ जाहिर है कि भाजपा बंटी हुई है और लीडरशिप की लड़ाई चल रही है।
कांग्रेस पार्टी को पहले से ही इसका आभास और एहसास था लेकिन अब तो यह बात सार्वजनिक हो चुकी है कि किस प्रकार आमने-सामने नारेबाजी कर पूरे प्रदेश के दौरे कर भाजपाई अपना-अपना ग्रुप बना के आगे चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी को इससे कोई सरोकार नहीं है लेकिन दुखद बात यह है कि विपक्ष को जिम्मेवारी के साथ अपनी भूमिका निभानी चाहिए। प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने तीन साल में जनहित में जो फैसले लिए हैं, विपक्ष को उसके ऊपर आप बात करनी चाहिए। उनको बताना चाहिए कि कौन से फैसले ठीक नहीं लग रहे हैं जो प्रदेश के हित में नहीं है। उसके बारे में वह चिट्ठी लिख सकते हैं। उन्होंने कहा कि जहां तक प्रदेश में आर्थिक संकट की बात है। उसके ऊपर विपक्ष को जिम्मेवारी के साथ बात करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष बार-बार कहते हैं कि मदद के लिए राज्य सरकार केंद्र का धन्यवाद नहीं करती है। यह अफसोस की बात है कि जो व्यक्ति खुद मुख्यमंत्री रहे हों, वह सब जानते हैं कि ये सारी चीजें एक नियम के तहत आती हैं कि किसी भी राज्य के लिए जो मदद विश्व बैंक, एशियाई डेवलपमेंट बैंक से आती है उसकी एक निर्धारित प्रक्रिया है। भारत सरकार उसकी गारंटी देती है, हम योजनाएं बनाते हैं और मंजूर करते हैं। भाजपा नेताओं को इस बात पर भी गौर करना चाहिए कि जो 1500 करोड़ रुपये प्रदेश को मिलने थे उसमें विलंब क्यों हुआ है।